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बिक रहा मौत का मंझा
जौनपुर ब्यूराे
Updated Wed, 13 Jan 2016 12:40 AM IST
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लोगों की मौत का कारण बन रहा चाइनीज मंझा अभी भी खुले आम बाजारों में बिक रहा है। हाईकोर्ट के सख्त निर्देश के बाद भी चोरी छिपे ही पर इसका धंधा जोरों पर है।
शहर से गांव तक मौत का यह मंझा लोगों के हाथों में है। मंझे से शहर में एक बालक की मौत हो चुकी है जबकि युवक समेत दो गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं। बावजूद इसका क्रेज लोगों के सिर चढ़ कर बोल रहा है।
मौत का सामान बने चायनीज मंझे की बिक्री पर हालांकि प्रशासन ने रोक लगा दी है। लेकिन अपना फायदा देख रहे चंद दूकानदार अभी भी इसे बेचने से बाज नहीं आ रहे हैं।
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शहर से गांव तक हर पतंगबाजों के हाथ में इसे देखा जा सकता है। 15 सितंबर को नगर कोतवाली क्षेत्र के परमानतपुर मोहल्ले में चाइनीज मंझे से गला कटने से एक बालक की मौत हो गई थी।
उसी दिन सद्भावना पुल के पास इसी मंझे की चपेट में आने से मो. कैस नामक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया था। आठ जनवरी को भी इस मंझे ने रासमंडल मोहल्ले में ओम सेठ नामक आठ वर्षीय बालक को गंभीर रूप से घायल कर दिया।
लगातार हो रही घटना और हाईकोर्ट के कड़े निर्देश के बाद जिला प्रशासन ने अभियान चलाकर भारी मात्रा में चाइनीज मंझा जब्त किया था।
कार्रवाई के भय से अब दूकानदार खुलेआम इसे बेच तो नहीं रहे पर कारोबार को पूरी तरह बंद भी नहीं किया है। चोरी छिपे अभी भी वह मौत के इस मंझे को बेच रहे हैं।
सूत्रों की माने तो मकर संक्रांति पर्व पर पतंग और मंझे की मांग को देखते हुए कारोबारी पहले से ही मंझा डंप किए हुए हैं। त्योहार पर एक बार फिर बड़े पैमाने पर इसकी बिक्री से इंकार नहीं किया जा सकता।
ऐसे में यदि प्रशासन एक बार जबरदस्त अभियान चला दे तो त्योहार पर इस मंझे से होने वाली घटनाओं पर अंकुश लग सकता है।
नगर मजिस्ट्रेट उमाकांत त्रिपाठी ने बताया कि जिले में चाइनीज मंझे की बिक्री पर रोक लगा दी गई है। कई बार दूकानों पर छापेमारी कर मंझा जब्त किया गया है।
उन्होंने कहा है कि अगर कहीं किसी दूकान पर चाइनीज मंझा की बिक्री की जा रही हो तो उसकी सूचना प्रशासन को दी जाए, उस पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।
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शहर से गांव तक मौत का यह मंझा लोगों के हाथों में है। मंझे से शहर में एक बालक की मौत हो चुकी है जबकि युवक समेत दो गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं। बावजूद इसका क्रेज लोगों के सिर चढ़ कर बोल रहा है।
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मौत का सामान बने चायनीज मंझे की बिक्री पर हालांकि प्रशासन ने रोक लगा दी है। लेकिन अपना फायदा देख रहे चंद दूकानदार अभी भी इसे बेचने से बाज नहीं आ रहे हैं।
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शहर से गांव तक हर पतंगबाजों के हाथ में इसे देखा जा सकता है। 15 सितंबर को नगर कोतवाली क्षेत्र के परमानतपुर मोहल्ले में चाइनीज मंझे से गला कटने से एक बालक की मौत हो गई थी।
उसी दिन सद्भावना पुल के पास इसी मंझे की चपेट में आने से मो. कैस नामक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया था। आठ जनवरी को भी इस मंझे ने रासमंडल मोहल्ले में ओम सेठ नामक आठ वर्षीय बालक को गंभीर रूप से घायल कर दिया।
लगातार हो रही घटना और हाईकोर्ट के कड़े निर्देश के बाद जिला प्रशासन ने अभियान चलाकर भारी मात्रा में चाइनीज मंझा जब्त किया था।
कार्रवाई के भय से अब दूकानदार खुलेआम इसे बेच तो नहीं रहे पर कारोबार को पूरी तरह बंद भी नहीं किया है। चोरी छिपे अभी भी वह मौत के इस मंझे को बेच रहे हैं।
सूत्रों की माने तो मकर संक्रांति पर्व पर पतंग और मंझे की मांग को देखते हुए कारोबारी पहले से ही मंझा डंप किए हुए हैं। त्योहार पर एक बार फिर बड़े पैमाने पर इसकी बिक्री से इंकार नहीं किया जा सकता।
ऐसे में यदि प्रशासन एक बार जबरदस्त अभियान चला दे तो त्योहार पर इस मंझे से होने वाली घटनाओं पर अंकुश लग सकता है।
नगर मजिस्ट्रेट उमाकांत त्रिपाठी ने बताया कि जिले में चाइनीज मंझे की बिक्री पर रोक लगा दी गई है। कई बार दूकानों पर छापेमारी कर मंझा जब्त किया गया है।
उन्होंने कहा है कि अगर कहीं किसी दूकान पर चाइनीज मंझा की बिक्री की जा रही हो तो उसकी सूचना प्रशासन को दी जाए, उस पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।