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हिंसा को रोकने के लिए छोड़नी होगी शर्म
ब्यूरो, अमर उजाला, जौनपुर
Updated Mon, 26 Jan 2015 12:50 AM IST
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दिल्ली महिला हेल्पलाइन की मुख्य सलाहकार खदीजा फारूकी ने कहा कि हिंसा को रोकने के लिए महिलाओं को अपनी शर्म छोड़नी होगी। जिस तरह से देश को गुलामी से मुक्त कराने के लिए स्वतंत्रता सेनानियों ने अपना सर्वस्व बलिदान करने के लिए उतारू हो गए तो आजादी मिल गई उसी तरह से देश महिलाएं जिस दिन हिंसा का विरोध करना शुरू कर
देंगी तो हिंसा की घटनाएं रुक जाएंगी। जनपद की मूल निवासी खदीजा फारूकी अपने दो दिवसीय दौरे पर जौनपुर आई हैं। वह रविवार को सिविल लाइन स्थित सामाजिक कार्यकर्ता अजीत यादव के आवास पर पत्रकारों से बात कर रही थीं।
उन्होंने कहा कि महिला हिंंसा एक ऐसा जुर्म है जिसमें पीड़ित को ही शर्म खानी होती है। चोरी, डकैती, लूट हत्या जैसे तमाम जुर्म के मामले में जुर्म करने वाला इंसान ही डरता है। यह पुरुष प्रधान समाज की अजीब विडंबना है। यह व्यथा इस समाज की ही देन है जिसमें महिलाएं जुर्म सहने के बाद भी घुट घुट कर मरने को विवश होती हैं।
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उन्होंने कहा कि जिस दिन औरत को शर्म आना बंद हो जाए उसी दिन से उनके साथ हिंसा की घटनाएं बंद हो जाएंगी। आने वाली पीढ़ी को हिंसा से मुक्त करने के लिए आज की महिलाओं को शर्म को छोड़ प्रतिकार करना होगा। उन्होंने कहा
कि घर का आंगन ही समाज निर्माण की फैक्ट्री है। इस फैक्ट्री से अगर डिफेक्टिव माल निकलेंगे तो समाज पर ही कहीं न कहीं से बुरा असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि निर्भया कांड के बाद बनी दिल्ली महिला हेल्पलाइन में दो साल में 14 लाख केस दर्ज किए जिनमें से 60 फीसदी मामलों का निस्तारण कर दिया गया। इसकी सफलता को देखते हुए 12 राज्यों ने दिल्ली की ही तर्ज पर महिला हेल्पलाइन की स्थापना करने की तैयारी की है।
उन्होंने कहा कि यूपी की महिला हेल्पलाइन 1090 को और पुख्ता बनाने की जरूरत है। यूपी की तमाम महिलाएं दिल्ली महिला हेल्पलाइन को फोन कर अपनी पीड़ा बताती हैं। इसे देखते हुए वह शीघ्र ही जौनपुर में अलग अलग गांवों में महिला पंचायत का आयोजन कर उन्हें उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करेंगी।
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देंगी तो हिंसा की घटनाएं रुक जाएंगी। जनपद की मूल निवासी खदीजा फारूकी अपने दो दिवसीय दौरे पर जौनपुर आई हैं। वह रविवार को सिविल लाइन स्थित सामाजिक कार्यकर्ता अजीत यादव के आवास पर पत्रकारों से बात कर रही थीं।
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उन्होंने कहा कि महिला हिंंसा एक ऐसा जुर्म है जिसमें पीड़ित को ही शर्म खानी होती है। चोरी, डकैती, लूट हत्या जैसे तमाम जुर्म के मामले में जुर्म करने वाला इंसान ही डरता है। यह पुरुष प्रधान समाज की अजीब विडंबना है। यह व्यथा इस समाज की ही देन है जिसमें महिलाएं जुर्म सहने के बाद भी घुट घुट कर मरने को विवश होती हैं।
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उन्होंने कहा कि जिस दिन औरत को शर्म आना बंद हो जाए उसी दिन से उनके साथ हिंसा की घटनाएं बंद हो जाएंगी। आने वाली पीढ़ी को हिंसा से मुक्त करने के लिए आज की महिलाओं को शर्म को छोड़ प्रतिकार करना होगा। उन्होंने कहा
कि घर का आंगन ही समाज निर्माण की फैक्ट्री है। इस फैक्ट्री से अगर डिफेक्टिव माल निकलेंगे तो समाज पर ही कहीं न कहीं से बुरा असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि निर्भया कांड के बाद बनी दिल्ली महिला हेल्पलाइन में दो साल में 14 लाख केस दर्ज किए जिनमें से 60 फीसदी मामलों का निस्तारण कर दिया गया। इसकी सफलता को देखते हुए 12 राज्यों ने दिल्ली की ही तर्ज पर महिला हेल्पलाइन की स्थापना करने की तैयारी की है।
उन्होंने कहा कि यूपी की महिला हेल्पलाइन 1090 को और पुख्ता बनाने की जरूरत है। यूपी की तमाम महिलाएं दिल्ली महिला हेल्पलाइन को फोन कर अपनी पीड़ा बताती हैं। इसे देखते हुए वह शीघ्र ही जौनपुर में अलग अलग गांवों में महिला पंचायत का आयोजन कर उन्हें उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करेंगी।