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अपनी भयोहू को नहीं जीता पाए शाहगंज विधायक
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शाहगंज (सोंधी) में ब्लॉक प्रमुख के चुनाव में पूर्व मंत्री एवं शाहगंज के विधायक शैलेंद्र यादव ललई की प्रतिष्ठा दांव पर लगी थी। यहां से ब्लाक प्रमुख पद के लिए उनकी भयोहू व पूर्व प्रमुख सरिता यादव पत्नी मनोज कुमार यादव सपा से मैदान में थीं। सरिता भाजपा प्रत्याशी मंजू सिंह से 18 मतों से हार गईं।
मंजू सिंह भाजपा नेता विजय सिंह की भयोहू हैं। उन्हें चुनाव में 86 मत मिले, जबकि विधायक शैलेंद्र यादव ललई की भयोहू सरिता को 68 मत ही मिले। ब्लॉक प्रमुख के चुनाव पर नजर डालें तो इस सीट पर कई साल से विधायक शैलेंद्र यादव ललई के ही परिवार का कब्जा रहा है। 1973 में दीपनारायण सिंह को पराजित कर उनके परिवार के ईशनारायण यादव प्रमुख बने थे। वह 23 वर्षों तक इस पद पर काबिज रहे। 1996 में पासा पलटा तो इंद्रदेव यादव यहां से ब्लॉक प्रमुख चुने गए थे। इसके बाद 23 जनवरी 2001 को अनवर आलम ने प्रमुख की कुर्सी संभाली। दो वर्ष बाद उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया। जिसमें वह हार गए और 19 अगस्त 2003 को मो.अनस खान 10 माह 20 दिन के लिए कार्यवाहक प्रमुख बने। अविश्वास प्रस्ताव के बाद चुनाव हुआ तो 10 जुलाई 2004 को इंद्रदेव यादव दोबारा प्रमुख बने। 17 मार्च 2006 को इनका कार्यकाल खत्म हो गया। वर्ष 2005 के पंचायत चुनाव में यहां के प्रमुख का पद महिला के लिए आरक्षित हो गया। पूर्व प्रमुख ईशनारायण यादव की बहू सरिता यादव पत्नी मनोज कुमार यादव 18 मार्च 2006 को प्रमुख बनी थीं। 2010 के पंचायत चुनाव में यहां की सीट पिछड़ी जाति महिला के लिए आरक्षित हो गई थी। 18 मार्च 2011 को पूर्व प्रमुख इंद्रदेव यादव की पत्नी संगीता यादव प्रमुख बनी थीं, लेकिन राजनीति के खेल में वह एक वर्ष सात माह से अधिक समय तक अपनी कुर्सी संभाल नहीं पाईं। अपने खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव में वह हार गईं और 20 अक्टूबर 2012 को पूर्व मंत्री व शाहगंज विधायक शैलेन्द्र यादव की भयोहू नीलम यादव प्रमुख बन गईं । 2015 के पंचायत चुनाव में यहां की सीट फिर अनारक्षित हो गई और पूर्व प्रमुख ईशनारायण यादव के पुत्र मनोज कुमार यादव चुनाव जीतकर प्रमुख बने। प्रमुख ईश नारायण यादव, नीलम यादव, सरिता यादव, मनोज यादव का संबंध पूर्व मंत्री शैलेन्द्र यादव ललई के परिवार से रहा है।
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मंजू सिंह भाजपा नेता विजय सिंह की भयोहू हैं। उन्हें चुनाव में 86 मत मिले, जबकि विधायक शैलेंद्र यादव ललई की भयोहू सरिता को 68 मत ही मिले। ब्लॉक प्रमुख के चुनाव पर नजर डालें तो इस सीट पर कई साल से विधायक शैलेंद्र यादव ललई के ही परिवार का कब्जा रहा है। 1973 में दीपनारायण सिंह को पराजित कर उनके परिवार के ईशनारायण यादव प्रमुख बने थे। वह 23 वर्षों तक इस पद पर काबिज रहे। 1996 में पासा पलटा तो इंद्रदेव यादव यहां से ब्लॉक प्रमुख चुने गए थे। इसके बाद 23 जनवरी 2001 को अनवर आलम ने प्रमुख की कुर्सी संभाली। दो वर्ष बाद उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया। जिसमें वह हार गए और 19 अगस्त 2003 को मो.अनस खान 10 माह 20 दिन के लिए कार्यवाहक प्रमुख बने। अविश्वास प्रस्ताव के बाद चुनाव हुआ तो 10 जुलाई 2004 को इंद्रदेव यादव दोबारा प्रमुख बने। 17 मार्च 2006 को इनका कार्यकाल खत्म हो गया। वर्ष 2005 के पंचायत चुनाव में यहां के प्रमुख का पद महिला के लिए आरक्षित हो गया। पूर्व प्रमुख ईशनारायण यादव की बहू सरिता यादव पत्नी मनोज कुमार यादव 18 मार्च 2006 को प्रमुख बनी थीं। 2010 के पंचायत चुनाव में यहां की सीट पिछड़ी जाति महिला के लिए आरक्षित हो गई थी। 18 मार्च 2011 को पूर्व प्रमुख इंद्रदेव यादव की पत्नी संगीता यादव प्रमुख बनी थीं, लेकिन राजनीति के खेल में वह एक वर्ष सात माह से अधिक समय तक अपनी कुर्सी संभाल नहीं पाईं। अपने खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव में वह हार गईं और 20 अक्टूबर 2012 को पूर्व मंत्री व शाहगंज विधायक शैलेन्द्र यादव की भयोहू नीलम यादव प्रमुख बन गईं । 2015 के पंचायत चुनाव में यहां की सीट फिर अनारक्षित हो गई और पूर्व प्रमुख ईशनारायण यादव के पुत्र मनोज कुमार यादव चुनाव जीतकर प्रमुख बने। प्रमुख ईश नारायण यादव, नीलम यादव, सरिता यादव, मनोज यादव का संबंध पूर्व मंत्री शैलेन्द्र यादव ललई के परिवार से रहा है।
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