UP: पांच साल बाद ही पूर्वांचल का पहला सौर ऊर्जा प्लांट बंद, कमरे में रखा जनरेटर और बैटरी नष्ट होने के कगार पर
जौनपुर जिले के रामपुर सवाई गांव में स्थापित पूर्वांचल का पहला सौर ऊर्जा प्लांट पांच साल बाद ही बंद हो गया था। अब यहां कमरे में रखा जनरेटर और बैटरी नष्ट होने के कगार पर है।
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मछलीशहर ब्लॉक के रामपुर सवाई गांव में वर्ष 1998 में पूर्वांचल का पहला सरकारी सौर ऊर्जा प्लांट स्थापित हुआ था। इस प्लांट से साढ़े चार किमी सीमा क्षेत्र के ग्रामीण मार्ग और 150 से अधिक घर रोशनी से जगमग होते थे। जापानी तकनीक पर आधारित यह प्लांट स्थापना के पांच साल बाद ही बंद हो गया। कमरे में रखा जनरेटर और बैटरी नष्ट होने के कगार पर है। कुछ पैनल गायब हो गए तो कुछ उखाड़ कर रख दिए गए हैं, खाली भूमि पर ग्रामीण अब जानवर बांधते हैं।
ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल और रोशनी देने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार के उस समय सौर ऊर्जा विभाग में सचिव रहे जमालपुर गांव निवासी स्व. गंगादीन यादव ने वर्ष 1996 में सौर ऊर्जा प्लांट प्रोजेक्ट स्थापना की सहमति दी थी। जिस समय गांव का चयन हुआ, उस समय रामपुर सवाई गांव बिजली से वंचित था।
तत्कालीन जिलाधिकारी नवनीत सहगल ने तब ग्राम प्रधान रहे ताराचंद यादव के प्रस्ताव पर शासन को गांव में सौर ऊर्जा प्लांट लगाने के लिए पत्र भेजा था, जिसको सौर ऊर्जा विभाग के सचिव ने मंजूरी दे दी थी। एक सोलर प्लांट के लिए आवंटित ग्राम समाज की एक एकड़ भूमि में 110 बड़े सोलर पैनल, 60 बैटरियां व जापानी तकनीक का इन्वर्टर लगाया गया था।
ऑटोमैटिक जनरेटर सिस्टम लगाया गया था, ताकि धूप न होने की दशा में वह स्वत: चलकर बैटरियां चार्ज कर सके। सौर ऊर्जा से हर घर में एक बल्ब जलाने के लिए 150 घरों में मुफ्त तार, बोर्ड आदि लगाए गए थे। 255 खंभे लगाकर रामपुर सवाई व आसपास के इलाके में रोशनी की व्यवस्था की गई। मार्ग पर प्रकाश के लिए लाइट लगाई गई। दो वर्ष बाद 1998 में प्रोजेक्ट चालू हो गया और पूरा गांव रोशनी से जगमग रहने लगा।
ग्रामीणों के मनोरंजन के लिए शासन ने दो कलर टेलीविजन भी दिए थे। प्रोजेक्ट पर कुल 72 लाख रुपये की लागत आई थी। प्लांट की देखभाल का जिम्मा ग्राम प्रधान को सौंपा गया। पांच वर्ष तक प्लांट के चलने के बाद गंवई राजनीति और आपसी खींचतान होने के कारण बंद हो गया। अब हालत यह है कि कुछ पैनल गायब हो गए तो कुछ उखाड़ कर रख दिए गए हैं। बैटरियां भी खराब हो गईं। खाली हुई भूमि पर ग्रामीण मवेशी बांधते हैं और कुछ लोगों ने आवंटित भूमि पर पक्का निर्माण कर कब्जा कर लिया है। किसी जिम्मेदार के ध्यान न देने से सौर ऊर्जा प्लांट का अस्तित्व ही समाप्त हो गया है।
मेरे कार्यकाल से पहले ही इस स्थान से सोलर पैनल गायब हो गए थे। खाली पड़े भवन में आसपास के लोग रहते हैं और खाली जमीन में पशु बांधे जा रहे हैं। योजना को चालू करने के लिए प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की। -मंजू देवी, ग्राम प्रधान
मामला बहुत पुराना है, ऐसे में जानकारी प्राप्त कर संबंधित विभाग को पत्र लिखकर परियोजना को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया जाएगा। -अंजलि भारतीय, खंड विकास अधिकारी मछलीशहर
हमारे गांव में बिजली की व्यवस्था नहीं थी। ग्राम प्रधान होने के नाते मेरा कर्तव्य था कि ग्रामीणों का अंधकार दूर करूं। इसके लिए मैंने उसे समय के जिलाधिकारी नवनीत सहगल से बात कर सौर ऊर्जा प्लांट को गांव में लगवाने के लिए अनुरोध किया था। 72 लाख रुपये की लागत से सौर ऊर्जा प्लांट की स्वीकृत कर दी गई थी। -ताराचंद्र यादव, पूर्व प्रधान रामपुर सवाई
सोलर सिस्टम योजना सौर ऊर्जा प्लांट के चालू होते ही गांव से अंधकार गायब हो गया। लेकिन दुख की बात यह है कि गांव की राजनीति के चलते हुए कुछ साल बाद बंद हो गया। इस समय केवल 10-11 घंटे ही बिजली मिल पाती है। यदि सोलर चलता तो 24 घंटे मुफ्त में बिजली मिलती। - रामधारी यादव रामपुर सवाई
जब सौर ऊर्जा संयंत्र लगा तो उसको देखने के लिए दूर-दराज से लोग आते थे। इस योजना के द्वारा हर घर, हर मार्ग रोशनी से जगमग हो रहा था। उन दिनों में गांव में रहने पर भी शहर की अनुभूति होती थी। लेकिन, अब 10-11 घंटे ही बिजली मिल पा रही है। -पंडित अभयराज दुबे रामपुर सवाई
घर में सोलर लाइट के नीचे पढ़ाई किया करते थे। सरकार द्वारा मुफ्त में ग्रामीणों को बिजली की सुविधा दी गई थी। लेकिन आज सोलर सिस्टम के पैनल ही गायब हो गए हैं। पूरा प्लांट बंद हो गया है। -मुलायम यादव रामपुर सवाई