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Jaunpur News: 154 साल से सुख-दुख साझा कर रहा पोस्टकार्ड
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जौनपुर। सोशल मीडिया में खोई युवा पीढ़ी का पाला भले ही पोस्टकार्ड से न पड़ा हो, पर एक दौर में पोस्टकार्ड खत भेजने का प्रमुख जरिया था। शादी-ब्याह, शुभकामनाओं से लेकर मौत की खबरों तक को इन पोस्टकार्डों ने सहेजा है। तमाम राजनेताओं से लेकर साहित्यकारों व आंदोलनकारियों ने पोस्टकार्ड का बखूबी प्रयोग किया है। अपना वही पोस्टकार्ड एक अक्तूबर 2023 को वैश्विक स्तर पर 154 साल का हो गया। दुनिया में पहला पोस्टकार्ड एक अक्तूबर 1869 को ऑस्ट्रिया में जारी किया गया था।
डाकघरों में चार तरह के पोस्टकार्ड मिलते रहे हैं। मेघदूत पोस्टकार्ड, सामान्य पोस्टकार्ड, प्रिंटेड पोस्टकार्ड और कम्पटीशन पोस्टकार्ड। ये क्रमश : 25 पैसे, 50 पैसे, 6 रुपये और 10 रुपये में उपलब्ध हैं। कम्पटीशन पोस्टकार्ड फिलहाल बंद हो गया है। इन चारों पोस्टकार्ड की लंबाई 14 सेंटीमीटर और चौड़ाई नौ सेंटीमीटर होती है। जिले के डाकघरों में मेघदूत पोस्टकार्ड व सामान्य पोस्टकार्ड मौजूद है। इसमें भी सामान्य पोस्टकार्ड की ही डिमांड होती है। जिले के मुख्य डाकघर समेत 53 उपडाकघर में पोस्टकार्ड के प्रति अभी भी लोगों का क्रेज बरकरार है। मुख्य डाकघर के अधीक्षक परमानंद कुमार ने बताया कि जौनपुर के डाकघरों में पिछले वित्तीय वर्ष करीब 39 हजार पोस्टकार्डों की बिक्री हुई थी, इस बार अब तक करीब 20 हजार पोस्टकार्डों की बिक्री की जा चुकी है।
आज भी आम आदमी की पहचान है पोस्टकार्ड
वाराणसी परिक्षेत्र के पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि पोस्टकार्ड न सिर्फ व्यक्तिगत बल्कि तमाम सामाजिक-साहित्यिक-धार्मिक-राजनैतिक आंदोलनों का गवाह रहा है। पोस्टकार्ड का खुलापन पारदर्शिता का परिचायक है तो इसकी सर्वसुलभता लोकतंत्र को मजबूती देती रही है। आज भी तमाम आंदोलनों की शुरुआत पोस्टकार्ड अभियान से ही होती है। ईमेल, एसएमएस, फेसबुक, टि्वटर और व्हाट्सएप ने संचार की परिभाषा भले ही बदल दी हो, पर पोस्टकार्ड अभी भी आम आदमी की पहचान है।
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डाकघरों में चार तरह के पोस्टकार्ड मिलते रहे हैं। मेघदूत पोस्टकार्ड, सामान्य पोस्टकार्ड, प्रिंटेड पोस्टकार्ड और कम्पटीशन पोस्टकार्ड। ये क्रमश : 25 पैसे, 50 पैसे, 6 रुपये और 10 रुपये में उपलब्ध हैं। कम्पटीशन पोस्टकार्ड फिलहाल बंद हो गया है। इन चारों पोस्टकार्ड की लंबाई 14 सेंटीमीटर और चौड़ाई नौ सेंटीमीटर होती है। जिले के डाकघरों में मेघदूत पोस्टकार्ड व सामान्य पोस्टकार्ड मौजूद है। इसमें भी सामान्य पोस्टकार्ड की ही डिमांड होती है। जिले के मुख्य डाकघर समेत 53 उपडाकघर में पोस्टकार्ड के प्रति अभी भी लोगों का क्रेज बरकरार है। मुख्य डाकघर के अधीक्षक परमानंद कुमार ने बताया कि जौनपुर के डाकघरों में पिछले वित्तीय वर्ष करीब 39 हजार पोस्टकार्डों की बिक्री हुई थी, इस बार अब तक करीब 20 हजार पोस्टकार्डों की बिक्री की जा चुकी है।
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आज भी आम आदमी की पहचान है पोस्टकार्ड
वाराणसी परिक्षेत्र के पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि पोस्टकार्ड न सिर्फ व्यक्तिगत बल्कि तमाम सामाजिक-साहित्यिक-धार्मिक-राजनैतिक आंदोलनों का गवाह रहा है। पोस्टकार्ड का खुलापन पारदर्शिता का परिचायक है तो इसकी सर्वसुलभता लोकतंत्र को मजबूती देती रही है। आज भी तमाम आंदोलनों की शुरुआत पोस्टकार्ड अभियान से ही होती है। ईमेल, एसएमएस, फेसबुक, टि्वटर और व्हाट्सएप ने संचार की परिभाषा भले ही बदल दी हो, पर पोस्टकार्ड अभी भी आम आदमी की पहचान है।
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