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आबादी 56 लाख, 28.5 फीसदी हैं निरक्षर
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करीब 56 लाख की आबादी वाले जिले की साक्षरता दर 71.5 फीसदी से आगे नहीं बढ़ सकी है। महिलाओं की साक्षरता दर और भी चिंताजनक है। अब भी 40.2 फीसदी महिलाएं निरक्षर हैं। निरक्षरता का नामोनिशान मिटाने के लिए आठ सितंबर को एक बार फिर साक्षरता दिवस मनाने की तैयारी पूरी कर ली गई है।
साक्षरता दर बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय साक्षरता मिशन के तहत संचालित प्रौढ़ शिक्षा जैसे कार्यक्रम वर्ष 2004 में ही बंद हो गए । बाद में सर्व शिक्षा अभियान शुरू किया गया, लेकिन वह अभियान भी परवान नहीं चढ़ सका। उस वक्त साक्षरता मिशन के प्रभारी रहे कंचन सिंह परिहार का कहना है कि एक समय था कि जलालपुर में सास-बहू और बक्शा में ससुर और बहू, ग्राम प्रधान एक साथ पढ़ाई कर साक्षर बने थे। अब ड्राप आउट बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए समय-समय पर सर्वे जरूर कराए जाते हैं, लेकिन पढ़ने लिखने की उम्र को पार कर चुके महिला और पुरुषों को साक्षर बनाने का कोई कार्यक्रम नहीं चल रहा है। उधर, साक्षरता दर के आंकड़ों पर नजर डालेंगे तो पूरे जिले की साक्षरता दर 71.5 फीसदी है। यानी कुल आबादी में 28.5 फीसदी लोग अभी भी निरक्षर हैं। इसमें महिलाओं की साक्षरता दर और भी चिंताजनक है। पुरुषों की साक्षरता दर 83.8 फीसदी है, जबकि महिलाएं 59.8 फीसदी ही साक्षर हैं। इसमें भी मछलीशहर ब्लॉक में स्थिति और निराशाजनक है। मछलीशहर ब्लॉक में महिलाओं की साक्षरता दर 54.91 फीसदी है। अर्थ एवं संख्या विभाग के आंकड़े बताते हैं कि बक्शा ब्लॉक में महिलाओं की साक्षरता दर 60.72 फीसदी के साथ उच्च स्तर पर है। राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक शिवजोर का कहना है कि अब तो पढ़ाई से अधिक जोर मिड डे मील और बच्चों के जूता, मोजा और बैग पर दिया जा रहा है। इन सब चीजों पर सरकार जितना बजट खर्च कर रही है उससे कहीं कम बजट में साक्षरता के लिए कोई बेहतर कार्यक्रम चलाया जा सकता है। अवकाश प्राप्त शिक्षक रामलखन सिंह का कहना है कि साक्षरता दिवस की कामयाबी तभी होगी, जब साक्षरता दर बढ़ाने के लिए सरकार के स्तर पर कोई ठोस पहल की जाए।
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साक्षरता दर बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय साक्षरता मिशन के तहत संचालित प्रौढ़ शिक्षा जैसे कार्यक्रम वर्ष 2004 में ही बंद हो गए । बाद में सर्व शिक्षा अभियान शुरू किया गया, लेकिन वह अभियान भी परवान नहीं चढ़ सका। उस वक्त साक्षरता मिशन के प्रभारी रहे कंचन सिंह परिहार का कहना है कि एक समय था कि जलालपुर में सास-बहू और बक्शा में ससुर और बहू, ग्राम प्रधान एक साथ पढ़ाई कर साक्षर बने थे। अब ड्राप आउट बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए समय-समय पर सर्वे जरूर कराए जाते हैं, लेकिन पढ़ने लिखने की उम्र को पार कर चुके महिला और पुरुषों को साक्षर बनाने का कोई कार्यक्रम नहीं चल रहा है। उधर, साक्षरता दर के आंकड़ों पर नजर डालेंगे तो पूरे जिले की साक्षरता दर 71.5 फीसदी है। यानी कुल आबादी में 28.5 फीसदी लोग अभी भी निरक्षर हैं। इसमें महिलाओं की साक्षरता दर और भी चिंताजनक है। पुरुषों की साक्षरता दर 83.8 फीसदी है, जबकि महिलाएं 59.8 फीसदी ही साक्षर हैं। इसमें भी मछलीशहर ब्लॉक में स्थिति और निराशाजनक है। मछलीशहर ब्लॉक में महिलाओं की साक्षरता दर 54.91 फीसदी है। अर्थ एवं संख्या विभाग के आंकड़े बताते हैं कि बक्शा ब्लॉक में महिलाओं की साक्षरता दर 60.72 फीसदी के साथ उच्च स्तर पर है। राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक शिवजोर का कहना है कि अब तो पढ़ाई से अधिक जोर मिड डे मील और बच्चों के जूता, मोजा और बैग पर दिया जा रहा है। इन सब चीजों पर सरकार जितना बजट खर्च कर रही है उससे कहीं कम बजट में साक्षरता के लिए कोई बेहतर कार्यक्रम चलाया जा सकता है। अवकाश प्राप्त शिक्षक रामलखन सिंह का कहना है कि साक्षरता दिवस की कामयाबी तभी होगी, जब साक्षरता दर बढ़ाने के लिए सरकार के स्तर पर कोई ठोस पहल की जाए।
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