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पांच जिलों में पर्यटन में ऊर्जा भरेगा पूविवि.
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जौनपुर। चाहें तो वो जौनपुर और गाजीपुर की ऐतिहासिक धरोहरें हों या फिर सोनभद्र और मिर्जापुर में बिखरी प्रकृति की सुंदरता हों, अब जल्द ही इन्हें पर्यटन के नक्शे पर लोग जानने लगेंगे। केंद्र द्वारा चिह्नित पांच जिलों में उपलब्ध पर्यटन स्थलों के विकास की संभावनाएं तलाशने और यहां के पर्यटन को आकर्षक और विश्वस्तरीय बनाने के लिए रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसके लिए पूर्वांचल विवि. में पर्यटन प्रबंधन एवं शोध उत्कृष्टता केंद्र के स्थापित किया जाएगा। शासन ने इसके लिए मंजूरी दे दी है।
पूर्वांचल के विभिन्न जिलों में तमाम ऐतिहासिक, प्राकृतिक और पौराणिक महत्व के स्थल हैं, लेकिन उनका प्रचार-प्रसार और बेहतर पर्यटकीय सुविधाएं न होने से ज्यादातर लोग उनसे अनभिज्ञ हैं। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए अनुकूल माहौल भी अब तक तैयार नहीं किया गया है। लिहाजा सरकार ने यहां पर्यटन के क्षेत्र को बढ़ावा देने और इसमें रोजगार के नए अवसर सृजित करने के लिए पूविवि. को पर्यटन प्रबंधन एवं शोध उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने की मंजूरी दी है। बीकॉम ऑनर्स के समन्वयक डॉ. आशुतोष कुमार सिंह को इस केंद्र का भी समन्वयक बनाया गया है। यह केंद्र पर्यटन के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण स्थलों और उनसे जुड़ी सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक मान्यताओं का अध्ययन करेगा। उसे संवारने और उससे जुड़े लोगों को आत्मनिर्भर बनाने के बाबत सुझाव तैयार कर रिपोर्ट शासन को देगा। पर्यटन उद्योग की आवश्यकताओं के अनुसार कौशल विकास व आधारभूत सुविधाओं का अध्ययन भी इस केंद्र की प्राथमिकता होगी।
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पांच जिलों में होगा अध्ययन
पर्यटन प्रबंधन एवं शोध उत्कृष्टता केंद्र का अध्ययन क्षेत्र के पूर्वांचल के पांच जिले होंगे। इसमें जौनपुर के अलावा मिर्जापुर, सोनभद्र, वाराणसी और गाजीपुर शामिल हैं। जौनपुर का शाही किला, फिरोज शाह का मकबरा, बड़ी मस्जिद, अटाला मस्जिद, चार अंगुल मस्जिद, चौकिया स्थित मां शीतला धाम, स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े स्थल, गाजीपुर में लार्ड कार्नवालिस का मकबरा, राजा गाधी का किला, भगवान परशुराम का मंदिर, सोनभद्र व मिर्जापुर में बांध, जलप्रपात, प्राकृतिक पर्यटन स्थल, गंगा घाट आदि शामिल होंगे।
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भारतीय शिक्षा नीति 2020 के प्रावधानों के अंतर्गत शोध एवं कौशल विकास को प्रोत्साहित और पर्यटन क्षेत्र को विकसित करने के उद्देश्य से इस केंद्र की स्थापना की गई है। आशा है कि यह केंद्र अपने उद्देश्यों पर खरा उतरेगा। -प्रो. निर्मला एस. मौर्य, कुलपति।
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शासन की मंजूरी के बाद केंद्र स्थापना की तैयारी शुरू कर दी गई है। प्रारंभिक बजट भी अवमुक्त हुआ है। शीघ्र ही बैठक कर विभिन्न गतिविधियों की विस्तृत रूपरेखा तैयार की जाएगी, जिससे केंद्र को क्रियाशील बनाया जा सका। -डॉ. आशुतोष कुमार सिंह, समन्वयक, पर्यटन प्रबंधन एवं शोध उत्कृष्टता केंद्र, पूविवि.।
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पूर्वांचल के विभिन्न जिलों में तमाम ऐतिहासिक, प्राकृतिक और पौराणिक महत्व के स्थल हैं, लेकिन उनका प्रचार-प्रसार और बेहतर पर्यटकीय सुविधाएं न होने से ज्यादातर लोग उनसे अनभिज्ञ हैं। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए अनुकूल माहौल भी अब तक तैयार नहीं किया गया है। लिहाजा सरकार ने यहां पर्यटन के क्षेत्र को बढ़ावा देने और इसमें रोजगार के नए अवसर सृजित करने के लिए पूविवि. को पर्यटन प्रबंधन एवं शोध उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने की मंजूरी दी है। बीकॉम ऑनर्स के समन्वयक डॉ. आशुतोष कुमार सिंह को इस केंद्र का भी समन्वयक बनाया गया है। यह केंद्र पर्यटन के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण स्थलों और उनसे जुड़ी सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक मान्यताओं का अध्ययन करेगा। उसे संवारने और उससे जुड़े लोगों को आत्मनिर्भर बनाने के बाबत सुझाव तैयार कर रिपोर्ट शासन को देगा। पर्यटन उद्योग की आवश्यकताओं के अनुसार कौशल विकास व आधारभूत सुविधाओं का अध्ययन भी इस केंद्र की प्राथमिकता होगी।
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पांच जिलों में होगा अध्ययन
पर्यटन प्रबंधन एवं शोध उत्कृष्टता केंद्र का अध्ययन क्षेत्र के पूर्वांचल के पांच जिले होंगे। इसमें जौनपुर के अलावा मिर्जापुर, सोनभद्र, वाराणसी और गाजीपुर शामिल हैं। जौनपुर का शाही किला, फिरोज शाह का मकबरा, बड़ी मस्जिद, अटाला मस्जिद, चार अंगुल मस्जिद, चौकिया स्थित मां शीतला धाम, स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े स्थल, गाजीपुर में लार्ड कार्नवालिस का मकबरा, राजा गाधी का किला, भगवान परशुराम का मंदिर, सोनभद्र व मिर्जापुर में बांध, जलप्रपात, प्राकृतिक पर्यटन स्थल, गंगा घाट आदि शामिल होंगे।
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भारतीय शिक्षा नीति 2020 के प्रावधानों के अंतर्गत शोध एवं कौशल विकास को प्रोत्साहित और पर्यटन क्षेत्र को विकसित करने के उद्देश्य से इस केंद्र की स्थापना की गई है। आशा है कि यह केंद्र अपने उद्देश्यों पर खरा उतरेगा। -प्रो. निर्मला एस. मौर्य, कुलपति।
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शासन की मंजूरी के बाद केंद्र स्थापना की तैयारी शुरू कर दी गई है। प्रारंभिक बजट भी अवमुक्त हुआ है। शीघ्र ही बैठक कर विभिन्न गतिविधियों की विस्तृत रूपरेखा तैयार की जाएगी, जिससे केंद्र को क्रियाशील बनाया जा सका। -डॉ. आशुतोष कुमार सिंह, समन्वयक, पर्यटन प्रबंधन एवं शोध उत्कृष्टता केंद्र, पूविवि.।