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पिंडरा हत्याकांड : चार दोषियों को उम्रकैद के फैसले पर मृतक के पिता ने कहा-तीन वर्ष बाद मिला इंसाफ
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केराकत। फूलपुर थाना क्षेत्र के पिंडरा स्थित नेशनल इंटर कॉलेज मैदान के सामने वर्ष 2022 में हुई युवक की हत्या के मामले में कोर्ट ने शुक्रवार को चार दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट की इस फैसले पर मृतक के पिता ने कहा कि बेटे की हत्या का इंसाफ तीन साल बाद मिला है। केराकत कोतवाली के मीरपुर निवासी मृतक के पिता अवधेश ने बताया कि वाराणसी के पिंडरा स्थित नेशनल इंटर कॉलेज के सामने बोलेरो सवार बदमाशों ने अमन यादव (19) की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस मामले में शुक्रवार को फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट ने फैसला सुनाया। कोर्ट के न्यायाधीश मनोज कुमार द्वितीय ने नामजद चार आरोपियों बबलू यादव उर्फ अजय निवासी पसेवां, सदानंद यादव निवासी कटहरी, उमेश यादव उर्फ जुगेश घुरहुपुर और विकास यादव उर्फ विशाल निवासी दिल्लपुरा निवासी केराकत को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 25-25 हजार रुपये का अर्थदंड और हत्या के प्रयास में 7 साल की कठोर कारावास की सजा भी दी।
आरोपियों को सजा सुनाए जाने के बाद मृतक के पिता अवधेश यादव ने कहा कि अमन मेरा इकलौता पुत्र था। हत्यारों को सजा मिलने से उन्हें थोड़ी राहत मिली है। न्यायपालिका पर उनका भरोसा और मजबूत हुआ है। घटना के बाद से परिवार पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा था। आज भी घर में मातम का माहौल बना हुआ है।
ये था मामला -घटना के समय मृतक अमन यादव की उम्र 19 साल थी। उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं था। वह गोरख यादव के साथ इलाज के लिए वाराणसी गया था। लौटते समय बदमाशों की गोली का शिकार हो गया। घटना के पीछे गिरोह में बंटवारे और असलहों की अदला-बदली को लेकर रंजिश हुई थी। कभी साथ में अपराध करने वाला गिरोह दो हिस्सों में बंट गया। इसके बाद अमन की हत्या और कृपाशंकर पर हमला सदानंद गिरोह का तीसरा हमला बताया जाता है। कृपाशंकर उर्फ गोरख पर पहले से दर्जनों मुकदमे दर्ज हैं। वह जौनपुर के आपराधिक जगत में कुख्यात नाम माना जाता है।
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आरोपियों को सजा सुनाए जाने के बाद मृतक के पिता अवधेश यादव ने कहा कि अमन मेरा इकलौता पुत्र था। हत्यारों को सजा मिलने से उन्हें थोड़ी राहत मिली है। न्यायपालिका पर उनका भरोसा और मजबूत हुआ है। घटना के बाद से परिवार पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा था। आज भी घर में मातम का माहौल बना हुआ है।
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ये था मामला -घटना के समय मृतक अमन यादव की उम्र 19 साल थी। उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं था। वह गोरख यादव के साथ इलाज के लिए वाराणसी गया था। लौटते समय बदमाशों की गोली का शिकार हो गया। घटना के पीछे गिरोह में बंटवारे और असलहों की अदला-बदली को लेकर रंजिश हुई थी। कभी साथ में अपराध करने वाला गिरोह दो हिस्सों में बंट गया। इसके बाद अमन की हत्या और कृपाशंकर पर हमला सदानंद गिरोह का तीसरा हमला बताया जाता है। कृपाशंकर उर्फ गोरख पर पहले से दर्जनों मुकदमे दर्ज हैं। वह जौनपुर के आपराधिक जगत में कुख्यात नाम माना जाता है।
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