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स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए लोग बेहाल
ब्यूरो, अमर उजाला, जौनपुर
Updated Tue, 05 Jul 2016 01:19 AM IST
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सिकरारा के चांदपुर में निर्मित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैंडओवर न होने से हैं बंद।
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जिले में स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई हैं। लोग 10 से 15 किलो मीटर की दूरी तय कर इलाज के लिए जाते हैं। उनकी समस्याओं को देखते हुए शासन ने करोड़ों खर्च कर 04 प्राथमिक, 02 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और 04 उपकेंद्रों का निर्माण कराया।
भवन बनकर तैयार हो गया है बावजूद कार्यदायी संस्था ने इसे स्वास्थ्य महकमे को हैंडओवर नहीं किया है। इससे लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैय्या नहीं हो पा रही हैं। करंजाकला विकास खंड के आदमपुर में चार करोड़ 82 लाख 50 हजार की लागत से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बनाया गया है।
मार्च 2014 में इसे विभाग को हैंडओवर हो जाना चाहिए था लेकिन आज तक अस्पताल का यह भवन हैंडओवर नहीं हो सका। आदमपुर और आस पास के लोगों को इलाज के लिए 15 किलोमीटर दूर सिद्दीकपुर, शाहगंज या जिला मुख्यालय आना पड़ता है।
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इसी तरह सिकरारा में तकरीबन 03 करोड़ की लागत से अप्रैल 2015 में भवन बन जाना चाहिए था लेकिन निर्माण कार्य आज तक अधूरा पड़ा है। इसी तरह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जयरामपुर, बीवीगंज, सरायडीह और बाकी दिसंबर 2012 में बिल्डिंग हैंडओवर हो जानी चाहिए लेकिन भवन अधूरे पड़े हैं।
कमोबेस यही स्थिति अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य के ंद्र अड़ियार, भन्नौर, परियांवा और जयगोपालगंज आदि की भी है। इन्हें अगस्त 2015 में ही हैंडओवर हो जाना चाहिए था।
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भवन बनकर तैयार हो गया है बावजूद कार्यदायी संस्था ने इसे स्वास्थ्य महकमे को हैंडओवर नहीं किया है। इससे लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैय्या नहीं हो पा रही हैं। करंजाकला विकास खंड के आदमपुर में चार करोड़ 82 लाख 50 हजार की लागत से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बनाया गया है।
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मार्च 2014 में इसे विभाग को हैंडओवर हो जाना चाहिए था लेकिन आज तक अस्पताल का यह भवन हैंडओवर नहीं हो सका। आदमपुर और आस पास के लोगों को इलाज के लिए 15 किलोमीटर दूर सिद्दीकपुर, शाहगंज या जिला मुख्यालय आना पड़ता है।
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इसी तरह सिकरारा में तकरीबन 03 करोड़ की लागत से अप्रैल 2015 में भवन बन जाना चाहिए था लेकिन निर्माण कार्य आज तक अधूरा पड़ा है। इसी तरह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जयरामपुर, बीवीगंज, सरायडीह और बाकी दिसंबर 2012 में बिल्डिंग हैंडओवर हो जानी चाहिए लेकिन भवन अधूरे पड़े हैं।
कमोबेस यही स्थिति अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य के ंद्र अड़ियार, भन्नौर, परियांवा और जयगोपालगंज आदि की भी है। इन्हें अगस्त 2015 में ही हैंडओवर हो जाना चाहिए था।