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बीमारी से ज्यादा बदइंतजामी से भी मर रहे लोग.....
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जौनपुर। कोरोना संक्रमण में लोगों को बेहतर दवा-उपचार के दावे भले ही हो रहे हों, लेकिन बदइंतजामी कम नहीं है। ऑक्सीजन, बेड सहित अन्य जरुरी सुविधाओं के लिए लोग भटक रहे हैं। उन्हें न तो समय से ऑक्सीजन मिल रहा है और न ही बेड। यहां-वहां के चक्कर लगाने और फोन मिलाने में ही मरीजों की जान चली जा रही है। इस बदइंतजामी से रोजाना कई जानें जा रही हैं, लेकिन इसका कोई समाधान नहीं हो रहा।
स्वास्थ्य विभाग के संसाधनों पर गौर करें तो दो एल-2 अस्पताल और एक 225 बेड का एल-1 अस्पताल चालू है। नॉन कोविड मरीजों के लिए जिला अस्पताल में सीरो वार्ड सहित अन्य सुविधाएं हैं। प्रशासन ने 12 निजी अस्पतालों को भी अधिग्रहित करते हुए उनके नंबर जारी किए हैं, ताकि लोग वहां भी अपनी सुविधानुसार भर्ती हो सकें। यह सारी व्यवस्थाएं बस नाम भर कर की हैं। मरीजों को रखने के लिए कहीं भी बेड उपलब्ध नहीं है। दोनों एल-2 अस्पताल दो दिन पहले ही भर चुके हैं। यहां एक-एक बेड के लिए मारामारी की स्थिति है। गंभीर स्थिति होने पर जब लोग अस्पताल पहुंचते हैं तो उन्हें गेट पर ही घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। निजी अस्पतालों में ऑक्सीजन के अभाव में बेड उपलब्ध नहीं है। अव्यवस्था के बीच मरीज और उनके तीमारदारों की दुश्वारी बढ़ रही है। ऐसे में रोजाना चार-पांच लोगों की जान जा रही है।
एल-2 के चार घंटे बाहर छटपटाती रही मिला, तब मिला बेडशहर के पॉलीटेक्निक चौराहा क्षेत्र की महिला (55) की रिपोर्ट कोविड पॉजिटिव आने के बाद होम आइसोलेशन में रखा गया था। ऑक्सीजन लेवल कम होने पर परिवार के लोग अस्पताल में भर्ती कराने के लिए भागदौड़ करने लगे। पहले निजी अस्पतालों में संपर्क किया, मगर कहीं भी बेड उपलब्ध नहीं था। थकहारकर जिला अस्पताल ले गए। यहां इमरजेंसी में जांच के बाद एल-2 में भर्ती करने को कहा गया, मगर वहां बेड ही खाली नहीं था। एल-2 अस्पताल के बाहर चार घंटे तक महिला फर्श पर ही पड़ी कराहती रही, मगर कोई सुनवाई नहीं हुई। बाद में जब मामला सोशल मीडिया में आया, तब आनन-फानन में बेड दिया गया।
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शहर के ओलंदगंज निवासी 32 वर्षीय युवक को सर्दी-खांसी और सांस लेने में दिक्कत होने पर परिजन रविवार को इमरजेंसी में पहुंचे। जांच में कोरोना की पुष्टि हुई। ऑक्सीजन लेवल काफी कम था। तत्काल एल-2 में भर्ती कर उपचार शुरू करने की जरुरत थी। कई घंटे तक युवक को लेकर परिजन एल-2 अस्पताल के बाहर बेड खाली होने का इंतजार करते रहे। चिकित्सक-कर्मचारियों से काफी मान-मनौवल करने और अफसरों को फोन करने के बाद भी बात नहीं बनी। कई घंटे बाद किसी तरह अस्पताल में प्रवेश मिला, तब तक स्थिति गंभीर हो चुकी। साथ आए परिवार के लोग पूरी तरह असहाय बने हुए थे।
मड़ियाहूं के रामपुर नदी निवासी रिटायर्ड फौजी (62) को सांस लेने में दिक्कत थी। ऑक्सीजन लेवल 90 से नीचे आ चुका था। भर्ती कराने के लिए परिजनों ने प्रशासन की ओर से अधिग्रहित अस्पतालों से संपर्क किया, लेकिन कहीं भी सुविधा शुरू नहीं थी। जहां भर्ती की सुविधा थी, वहां बेड खाली नहीं थे। विवश होकर परिजन वाराणसी ले गए, मगर वहां भी भर्ती नहीं किया गया। लौटकर किसी तरह शहर के निजी अस्पताल में उन्हें भर्ती कराया गया। भागदौड़ में इतना विलंब हो गया कि स्थिति अत्यंत गंभीर हो गई। रविवार की सुबह उन्होंने दम तोड़ दिया।
नगर के परमानतपुर निवासी युवक अपने मामा को लेकर तीन दिन पहले जिला अस्पताल पहुंचा था। उनकी सांस फूल रही थी और आक्सीजन लेबल 72-75 था। घंटे भर के जद्दोजहद के बाद एंटीजन किट की जांच में रिपोर्ट निगेटिव आई। उन्हें नॉन कोविड वार्ड में किसी तरह भर्ती किया गया। उपचार के बाद भी हालत लगातार बिगड़ती जा रही है। हालत गंभीर होने पर जांच किया तो हाईफ्लो ऑक्सीजन प्वाइंट की पाइप जाम थी, जिससे उन्हें ऑक्सीजन नहीं मिल रहा था। बाद में एक जनप्रतिनिधि के हस्तक्षेप पर ट्रूनट से जांच में रिपोर्ट पॉजिटिव आई तो एल-2 अस्पताल रेफर किया गया। वहां बेड ही खाली नहीं था। इस बीच उनकी मौत हो गई।
अचानक से मरीज बढ़ने से थोड़ी दिक्कत हुई है। दोनों एल-2 अस्पताल भर चुके हैं। रेहटी में भी 11 मरीज भर्ती है। निजी अस्पतालों के माध्यम से व्यवस्था सुचारु करने की कोशिश की जा रही है। ऑक्सीजन की हमारे यहां पर्याप्त उपलब्धता है। निजी अस्पतालों को भी जरुरत के अनुसार ऑक्सीजन उपलब्ध कराया जा रहा है। एक-दो दिनों में स्थिति बेहतर हो जाएगी। -डॉ. राकेश कुमार, सीएमओ।
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छह अस्पतालों में ही भर्ती करने की सुविधा
सीएमओ डॉ. राकेश कुमार ने बताया कि जिले के लता मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल, अरुणोदय चिकित्सालय नईगंज, ईशा हॉस्पिटल मड़ियाहूं रोड, सुनीता हॉस्पिटल नईगंज, आरके आर्थोपेडिक हॉस्पिटल शाहगंज, जेडी मेमोरियल हॉस्पिटल जिले के छह हॉस्पिटल कोविड-19 के एल-2 श्रेणी के अस्पताल हैं। इन छह निजी अस्पतालों को ही कोविड-19 के मरीजों को भर्ती करने का अधिकार दिया है। जिले के अन्य अस्पताल कोविड-19 के मरीजों को भर्ती न करेंगे। अगर इसकी अवहेलना की जाती है तो संबंधित अस्पताल संचालक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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स्वास्थ्य विभाग के संसाधनों पर गौर करें तो दो एल-2 अस्पताल और एक 225 बेड का एल-1 अस्पताल चालू है। नॉन कोविड मरीजों के लिए जिला अस्पताल में सीरो वार्ड सहित अन्य सुविधाएं हैं। प्रशासन ने 12 निजी अस्पतालों को भी अधिग्रहित करते हुए उनके नंबर जारी किए हैं, ताकि लोग वहां भी अपनी सुविधानुसार भर्ती हो सकें। यह सारी व्यवस्थाएं बस नाम भर कर की हैं। मरीजों को रखने के लिए कहीं भी बेड उपलब्ध नहीं है। दोनों एल-2 अस्पताल दो दिन पहले ही भर चुके हैं। यहां एक-एक बेड के लिए मारामारी की स्थिति है। गंभीर स्थिति होने पर जब लोग अस्पताल पहुंचते हैं तो उन्हें गेट पर ही घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। निजी अस्पतालों में ऑक्सीजन के अभाव में बेड उपलब्ध नहीं है। अव्यवस्था के बीच मरीज और उनके तीमारदारों की दुश्वारी बढ़ रही है। ऐसे में रोजाना चार-पांच लोगों की जान जा रही है।
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एल-2 के चार घंटे बाहर छटपटाती रही मिला, तब मिला बेडशहर के पॉलीटेक्निक चौराहा क्षेत्र की महिला (55) की रिपोर्ट कोविड पॉजिटिव आने के बाद होम आइसोलेशन में रखा गया था। ऑक्सीजन लेवल कम होने पर परिवार के लोग अस्पताल में भर्ती कराने के लिए भागदौड़ करने लगे। पहले निजी अस्पतालों में संपर्क किया, मगर कहीं भी बेड उपलब्ध नहीं था। थकहारकर जिला अस्पताल ले गए। यहां इमरजेंसी में जांच के बाद एल-2 में भर्ती करने को कहा गया, मगर वहां बेड ही खाली नहीं था। एल-2 अस्पताल के बाहर चार घंटे तक महिला फर्श पर ही पड़ी कराहती रही, मगर कोई सुनवाई नहीं हुई। बाद में जब मामला सोशल मीडिया में आया, तब आनन-फानन में बेड दिया गया।
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शहर के ओलंदगंज निवासी 32 वर्षीय युवक को सर्दी-खांसी और सांस लेने में दिक्कत होने पर परिजन रविवार को इमरजेंसी में पहुंचे। जांच में कोरोना की पुष्टि हुई। ऑक्सीजन लेवल काफी कम था। तत्काल एल-2 में भर्ती कर उपचार शुरू करने की जरुरत थी। कई घंटे तक युवक को लेकर परिजन एल-2 अस्पताल के बाहर बेड खाली होने का इंतजार करते रहे। चिकित्सक-कर्मचारियों से काफी मान-मनौवल करने और अफसरों को फोन करने के बाद भी बात नहीं बनी। कई घंटे बाद किसी तरह अस्पताल में प्रवेश मिला, तब तक स्थिति गंभीर हो चुकी। साथ आए परिवार के लोग पूरी तरह असहाय बने हुए थे।
मड़ियाहूं के रामपुर नदी निवासी रिटायर्ड फौजी (62) को सांस लेने में दिक्कत थी। ऑक्सीजन लेवल 90 से नीचे आ चुका था। भर्ती कराने के लिए परिजनों ने प्रशासन की ओर से अधिग्रहित अस्पतालों से संपर्क किया, लेकिन कहीं भी सुविधा शुरू नहीं थी। जहां भर्ती की सुविधा थी, वहां बेड खाली नहीं थे। विवश होकर परिजन वाराणसी ले गए, मगर वहां भी भर्ती नहीं किया गया। लौटकर किसी तरह शहर के निजी अस्पताल में उन्हें भर्ती कराया गया। भागदौड़ में इतना विलंब हो गया कि स्थिति अत्यंत गंभीर हो गई। रविवार की सुबह उन्होंने दम तोड़ दिया।
नगर के परमानतपुर निवासी युवक अपने मामा को लेकर तीन दिन पहले जिला अस्पताल पहुंचा था। उनकी सांस फूल रही थी और आक्सीजन लेबल 72-75 था। घंटे भर के जद्दोजहद के बाद एंटीजन किट की जांच में रिपोर्ट निगेटिव आई। उन्हें नॉन कोविड वार्ड में किसी तरह भर्ती किया गया। उपचार के बाद भी हालत लगातार बिगड़ती जा रही है। हालत गंभीर होने पर जांच किया तो हाईफ्लो ऑक्सीजन प्वाइंट की पाइप जाम थी, जिससे उन्हें ऑक्सीजन नहीं मिल रहा था। बाद में एक जनप्रतिनिधि के हस्तक्षेप पर ट्रूनट से जांच में रिपोर्ट पॉजिटिव आई तो एल-2 अस्पताल रेफर किया गया। वहां बेड ही खाली नहीं था। इस बीच उनकी मौत हो गई।
अचानक से मरीज बढ़ने से थोड़ी दिक्कत हुई है। दोनों एल-2 अस्पताल भर चुके हैं। रेहटी में भी 11 मरीज भर्ती है। निजी अस्पतालों के माध्यम से व्यवस्था सुचारु करने की कोशिश की जा रही है। ऑक्सीजन की हमारे यहां पर्याप्त उपलब्धता है। निजी अस्पतालों को भी जरुरत के अनुसार ऑक्सीजन उपलब्ध कराया जा रहा है। एक-दो दिनों में स्थिति बेहतर हो जाएगी। -डॉ. राकेश कुमार, सीएमओ।
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छह अस्पतालों में ही भर्ती करने की सुविधा
सीएमओ डॉ. राकेश कुमार ने बताया कि जिले के लता मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल, अरुणोदय चिकित्सालय नईगंज, ईशा हॉस्पिटल मड़ियाहूं रोड, सुनीता हॉस्पिटल नईगंज, आरके आर्थोपेडिक हॉस्पिटल शाहगंज, जेडी मेमोरियल हॉस्पिटल जिले के छह हॉस्पिटल कोविड-19 के एल-2 श्रेणी के अस्पताल हैं। इन छह निजी अस्पतालों को ही कोविड-19 के मरीजों को भर्ती करने का अधिकार दिया है। जिले के अन्य अस्पताल कोविड-19 के मरीजों को भर्ती न करेंगे। अगर इसकी अवहेलना की जाती है तो संबंधित अस्पताल संचालक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।