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पीएफएमएस के फेर में अटका किसानों का भुगतान

Tue, 07 Jan 2020 12:15 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 07 Jan 2020 12:15 AM IST
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Payment of farmers stuck due to PFMS
आनलाइन के चक्कर में फंसा धान का दाम
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- ऐन वक्त पर भुगतान की प्रणाली बदलने से हो रही देरी
- प्रशिक्षित न होने के कारण नए सिस्टम पर समय से भुगतान नहीं कर पा रहे केंद्र प्रभारी
- करीब चार सौ किसानों का 14 करोड़ का भुगतान शेष
अमर उजाला ब्यूरो
जौनपुर। धान खरीद सीजन के मध्य में अचानक से भुगतान की नई प्रणाली लागू कर दिए जाने से क्रय केंद्र पर उपज बेचने वाले किसानों का भुगतान फंस गया है। अधिकांश केंद्र प्रभारी नए प्रणाली से भुगतान में दक्ष नहीं है। ऐसे में किसानों को 72 घंटे बजाए धनराशि पाने के लिए 7-10 दिन का इंतजार करना पड़ रहा है।
किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य दिलाने और बिचौलियों से बचाने के लिए शासन ने जिले में 115 क्रय केंद्रों की स्थापना की है। इन पर 72700 एमटी खरीद का लक्ष्य दिया गया है। क्रय केंद्रों पर एक नवंबर से ही खरीद शुरू हो गई है, जो 28 फरवरी तक चलनी है। खरीद प्रक्रिया आरंभ होने के समय आरटीजीएस के माध्यम से भुगतान का निर्देश था। इसके लिए केंद्र प्रभारियों को प्रशिक्षित भी किया गया था, ताकि किसी भी किसान का भुगतान न अटके। उन्हें बिक्री के 72 घंटे के अंदर धनराशि प्राप्त हो जाए। दिसंबर माह के अंत में शासन ने भुगतान की पुरानी व्यवस्था को बदलते हुए पब्लिक फाइनेंस मैनेजमेंट सिस्टम (पीएफएमएस) के माध्यम से भुगतान का निर्देश दिया है। मुश्किल यह है कि अधिकांश केंद्र प्रभारी इसमें प्रशिक्षित ही नहीं है। इस प्रक्रिया से भुगतान की बारीकियों से अनभिज्ञ होने के चलते संबंधित क्रय केंद्रों पर किसानों का भुगतान अटका है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक करीब चार सौ किसानों के 14 करोड़ रुपये धान बिक्री का भुगतान होना है। सिस्टम की खामियों में इसमें लगातार देरी हो रही है। किसान अपना भुगतान लेने के लिए क्रय केंद्रों का चक्कर काट रहे हैं, वहां तकनीकी खामी बताकर उन्हें लौटाया जा रहा है।
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भुगतान के लिए अब पीएफएमएस प्रणाली को लागू किया गया है। यह अधिक पारदर्शी है। हाल में केंद्र प्रभारियों को इसका प्रशिक्षण भी दिया गया है। अब कोई दिक्कत नहीं है। सभी केंद्र प्रभारियों को इसकी बारीकि समझा दी गई है। जल्द ही किसानों को उनके खाते में राशि भेज दी जाएगी। -रामप्रकाश, एडीएम वित्त।
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