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जिले में 3.20 घंटे तक रहा सूर्यग्रहण....
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32- सूर्य ग्रहण के चलते अबंद रहा भंण्डारी रोड स्थित मंदिर।
- फोटो : JAUNPUR
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जौनपुर। वर्ष के अंतिम सूर्यग्रहण का बृहस्पतिवार को जिले के जनजीवन पर व्यापक असर दिखा। करीब 3.20 मिनट तक ग्रहण के मुख्य काल में लोगों ने किसी भी नए कार्य से परहेज किया। शुभ कार्य भी वर्जित रहे। दोपहर 11.09 बजे ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिरों में पूजन-आरती कर भोग लगाया गया। घने कोहरे के चलते छल्ले जैसा सूर्य देखने की हसरत संजोए लोगों को मायूस होना पड़ा।
सूर्यग्रहण के लिए बुधवार की रात सूतक काल लगने के पहले से ही शीतला चौकिया माता मंदिर, मैहर देवी मंदिर, जगन्नाथ मंदिर, हनुमान मंदिर सभी मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए थे। इसके असर से प्रभावित राशियों के लोग मंत्रोच्चार के माध्यम से ग्रहण के प्रभाव से बचने की कोशिश में जुटे रहे। अन्य दिनों की अपेक्षा बृहस्पतिवार को सुबह देर तक अंधेरा छाया रहा। पहले तो लोग इसके लिए कोहरे को कारण मानते रहे, लेकिन ग्रहण के बारे में जानकारी होते ही आनन-फानन में दैनिक कार्य निपटाने में जुट गए। ग्रहण काल में भोजन-पानी न करने की भ्रांतियों के चलते घरों में सुबह ही खाना-पानी सहित अन्य जरुरी कार्य निपटाने में जुट गए थे। ग्रहण काल समाप्त होने के बाद लोगों ने स्नान-ध्यान किया। शहर के गोमती नदी के तट पर स्नान के लिए लोगों की भीड़ लगी रही। साफ-सफाई कर मंदिरों के भी कपाट खोल दिए गए। दर्शन-पूजन के बाद लोगों ने अन्न, धन, वस्त्र का दान किया। विविध धार्मिक अनुष्ठानों के जरिए ग्रह शांति की कामना की। इस दौरान तमाम लोग ग्रहण के सूर्य को देखने की कोशिश में जुटे रहे, लेकिन घने कोहरे के चलते उन्हें मायूसी मिली।
सुबह 8.29 से जिले में रहा ग्रहण का प्रभाव
ज्योतिषाचार्य पं.रजनीकांत द्विवेदी के मुताबिक जिले में ग्रहण का प्रभाव सुबह 8.29 बजे से 11.09 बजे तक रहा। इसके 12 घंटे पहले ही सूतक काल शुरू हो गया था। इस अवधि में पूजा-पाठ, भोग-आरती सब कुछ वर्जित रहता है। लिहाजा सभी मंदिरों के कपाट रात्रि में ही बंद कर दिए गए थे। ग्रहण का प्रभाव खत्म होने के बाद मंदिरों की शुद्धि की गई। फिर भोग, आरती सहित अन्य कार्यक्रम हुए। बताया कि यह संपूर्ण ग्रहण था, लिहाजा इससे प्रभावित होने वाली राशियों से जुड़े जातकों को विविध धार्मिक अनुष्ठान कराए गए।
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सूर्यग्रहण के लिए बुधवार की रात सूतक काल लगने के पहले से ही शीतला चौकिया माता मंदिर, मैहर देवी मंदिर, जगन्नाथ मंदिर, हनुमान मंदिर सभी मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए थे। इसके असर से प्रभावित राशियों के लोग मंत्रोच्चार के माध्यम से ग्रहण के प्रभाव से बचने की कोशिश में जुटे रहे। अन्य दिनों की अपेक्षा बृहस्पतिवार को सुबह देर तक अंधेरा छाया रहा। पहले तो लोग इसके लिए कोहरे को कारण मानते रहे, लेकिन ग्रहण के बारे में जानकारी होते ही आनन-फानन में दैनिक कार्य निपटाने में जुट गए। ग्रहण काल में भोजन-पानी न करने की भ्रांतियों के चलते घरों में सुबह ही खाना-पानी सहित अन्य जरुरी कार्य निपटाने में जुट गए थे। ग्रहण काल समाप्त होने के बाद लोगों ने स्नान-ध्यान किया। शहर के गोमती नदी के तट पर स्नान के लिए लोगों की भीड़ लगी रही। साफ-सफाई कर मंदिरों के भी कपाट खोल दिए गए। दर्शन-पूजन के बाद लोगों ने अन्न, धन, वस्त्र का दान किया। विविध धार्मिक अनुष्ठानों के जरिए ग्रह शांति की कामना की। इस दौरान तमाम लोग ग्रहण के सूर्य को देखने की कोशिश में जुटे रहे, लेकिन घने कोहरे के चलते उन्हें मायूसी मिली।
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सुबह 8.29 से जिले में रहा ग्रहण का प्रभाव
ज्योतिषाचार्य पं.रजनीकांत द्विवेदी के मुताबिक जिले में ग्रहण का प्रभाव सुबह 8.29 बजे से 11.09 बजे तक रहा। इसके 12 घंटे पहले ही सूतक काल शुरू हो गया था। इस अवधि में पूजा-पाठ, भोग-आरती सब कुछ वर्जित रहता है। लिहाजा सभी मंदिरों के कपाट रात्रि में ही बंद कर दिए गए थे। ग्रहण का प्रभाव खत्म होने के बाद मंदिरों की शुद्धि की गई। फिर भोग, आरती सहित अन्य कार्यक्रम हुए। बताया कि यह संपूर्ण ग्रहण था, लिहाजा इससे प्रभावित होने वाली राशियों से जुड़े जातकों को विविध धार्मिक अनुष्ठान कराए गए।
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