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बच्चों को सुपोषित बनाएगी पोषण वाटिका
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पोषण माह के तहत बच्चों को सुपोषित करने के लिए विद्यालयों में पोषण वाटिका विकसित की जा रही है। फल और सब्जी के अलावा पोषक तत्वों से युक्त पौधे लगाने का सिलसिला शुरू हो गया है। इसके तहत प्राथमिक विद्यालय विशुनपुरा मझवारा में पोषण वाटिका विकसित की जा रही है। इससे बच्चे मधुमेह, मुंह के छाले, अल्सर तथा डेंगू जैसी बीमारियों को मात देने में सक्षम होंगे।
विशुनपुरा मझवारा में पोषण वाटिका को तैयार करने में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सुजाता चतुर्वेदी व सविता यादव, विद्यालय की प्रधानाध्यापिका सुषमा पाठक सहयोग कर रही हैं। वाटिका में जामुन और अमरूद के पौधे रोपे गए हैं। जामुन मुंह के छाले और अल्सर ठीक करने में मददगार है। इसका सिरका मधुमेह के इलाज में लाभदायक है। दांतों के सड़ने, पायरिया तथा गला बैठने पर लोग अमरूद की पत्तियां उबालकर गरारा करते हैं तो फायदा मिलता है। वाटिका में लगे पौधे और सब्जियां मिड-डे मील के लिए उपयोगी होंगी।
बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) मनोज कुमार वर्मा ने बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सुजाता चतुर्वेदी तथा सविता यादव के सहयोग से गोभी के 30, टमाटर के 12, मिर्च के 10, बैगन के छह, नीबू एक, जामुन दो, आम दो, अमरूद एक, पपीता तीन, गेंदा पांच, गुड़हल दो, सहजन एक और तुलसी के दो पौधे रोपे गए हैं। इसके अलावा नेनुआ, बोड़ा, लौकी, भिंडी के बीजों सहित लगभग 100 पौधे रोपे गए हैं। शिक्षामित्र रागिनी मिश्रा का कहना है कि वाटिका की सब्जियां मिड-डे मील में उपयोगी साबित होंगी। सफाई कर्मी रामबचन इस बात से खुश हैं कि उन्होंने पोषण वाटिका बनाने में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सुजाता और सविता का सहयोग किया है। स्कूल में पढ़ने वाले राज की मां रीता, सौम्या की दादी सुभावती, अयांश की दादी ऊषा का कहना है कि पोषण वाटिका उनके बच्चों के लिए उपयोगी साबित होगी।
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क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डा. कमल रंजन का कहना है कि बच्चों के लिए फल और सब्जियां काफी महत्वपूर्ण हैं। पपीता एंजाइम का काम करता है और खाना पचाने में मददगार होता है। डेंगू की वजह से प्लेटलेट्स घटने पर उसे बढ़ाने में इसकी पत्तियां मददगार होती हैं। सहजन आयरन, कैल्शियम, विटामिन, मिनरल्स आदि सूक्ष्म पोषक तत्वों से भरपूर होता है। नींबू विटामिन सी का अच्छा स्रोत है और इसमें साइट्रिक एसिड होता है। यह शरीर में रोग प्रतिरोधी शक्ति तैयार करता है और पाचन में सहायता करता है।
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विशुनपुरा मझवारा में पोषण वाटिका को तैयार करने में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सुजाता चतुर्वेदी व सविता यादव, विद्यालय की प्रधानाध्यापिका सुषमा पाठक सहयोग कर रही हैं। वाटिका में जामुन और अमरूद के पौधे रोपे गए हैं। जामुन मुंह के छाले और अल्सर ठीक करने में मददगार है। इसका सिरका मधुमेह के इलाज में लाभदायक है। दांतों के सड़ने, पायरिया तथा गला बैठने पर लोग अमरूद की पत्तियां उबालकर गरारा करते हैं तो फायदा मिलता है। वाटिका में लगे पौधे और सब्जियां मिड-डे मील के लिए उपयोगी होंगी।
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बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) मनोज कुमार वर्मा ने बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सुजाता चतुर्वेदी तथा सविता यादव के सहयोग से गोभी के 30, टमाटर के 12, मिर्च के 10, बैगन के छह, नीबू एक, जामुन दो, आम दो, अमरूद एक, पपीता तीन, गेंदा पांच, गुड़हल दो, सहजन एक और तुलसी के दो पौधे रोपे गए हैं। इसके अलावा नेनुआ, बोड़ा, लौकी, भिंडी के बीजों सहित लगभग 100 पौधे रोपे गए हैं। शिक्षामित्र रागिनी मिश्रा का कहना है कि वाटिका की सब्जियां मिड-डे मील में उपयोगी साबित होंगी। सफाई कर्मी रामबचन इस बात से खुश हैं कि उन्होंने पोषण वाटिका बनाने में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सुजाता और सविता का सहयोग किया है। स्कूल में पढ़ने वाले राज की मां रीता, सौम्या की दादी सुभावती, अयांश की दादी ऊषा का कहना है कि पोषण वाटिका उनके बच्चों के लिए उपयोगी साबित होगी।
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क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डा. कमल रंजन का कहना है कि बच्चों के लिए फल और सब्जियां काफी महत्वपूर्ण हैं। पपीता एंजाइम का काम करता है और खाना पचाने में मददगार होता है। डेंगू की वजह से प्लेटलेट्स घटने पर उसे बढ़ाने में इसकी पत्तियां मददगार होती हैं। सहजन आयरन, कैल्शियम, विटामिन, मिनरल्स आदि सूक्ष्म पोषक तत्वों से भरपूर होता है। नींबू विटामिन सी का अच्छा स्रोत है और इसमें साइट्रिक एसिड होता है। यह शरीर में रोग प्रतिरोधी शक्ति तैयार करता है और पाचन में सहायता करता है।