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नहाय, खाय के बाद खरना आज
ब्यूरो, अमर उजाला, जौनपुर
Updated Sat, 05 Nov 2016 01:24 AM IST
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डाला छठ की तैयारी में सब्जी मंडी में सजी फलों की दूकान।
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नहाय खाय की रस्म पूरी करने के साथ शुक्रवार को सूर्योपासना का पर्व डाला षष्ठी के व्रत की शुरुआत हो गई। लोक मंगल की कामना के लिए व्रतियों ने घरों में घी के दीए जलाए और प्रकृति की प्रतीक छठ माता की विधि विधान से पूजा की। शनिवार को खीर से खरना होगा।
रविवार की शाम अस्ताचलगामी सूर्य को पहला अर्घ्य देने के लिए घाटों, सरोवरों पर वेदियां बनाने की होड़ लगी रही। सात नवंबर की सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण किया जाएगा।घरों से लेकर बाजार तक छठ माता की आराधना के गीत गूंजने लगे हैं। साफ सफाई के बाद घरों में शुचिता-शुद्धता के नए वातावरण का सृजन हो गया है।
व्रती महिलाएं पारण होने तक जमीन पर ही आसन लगाएंगी। कार्तिक चतुर्थी यानी शुक्रवार को स्नान के बाद लौकी का भोग लगा। इसी के साथ नहाय-खाय की परंपरा निभाई गई। डाला सजाने के लिए सूप, डलिया के साथ ही हल्दी, सिंदूर, चंदन समेत अन्य पूजा सामग्रियों की खरीददारी की जा रही है।
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फलों का बाजार सजा हुआ है। गन्ने से छठ पूजा के लिए घाटों सरोवरों पर मंडप बनाए जाएंगे। पतियों की दीर्घायु के साथ ही घर, समाज और राष्ट्र के मंगल की कामना से अर्घ्य देने के लिए महिलाएं बाजे गाजे के साथ नदी और सरोवर के घाटों पर पहुंचेंगी। इसके लिए लोग वेदियां बनाकर उन पर नाम लिख अपनी जगह पक्की कर रहे हैं। गोमती नदी के घाटों पर वेदी बनाने के लिए शनिवार को सुबह से भीड़ लगेगी।
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रविवार की शाम अस्ताचलगामी सूर्य को पहला अर्घ्य देने के लिए घाटों, सरोवरों पर वेदियां बनाने की होड़ लगी रही। सात नवंबर की सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण किया जाएगा।घरों से लेकर बाजार तक छठ माता की आराधना के गीत गूंजने लगे हैं। साफ सफाई के बाद घरों में शुचिता-शुद्धता के नए वातावरण का सृजन हो गया है।
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व्रती महिलाएं पारण होने तक जमीन पर ही आसन लगाएंगी। कार्तिक चतुर्थी यानी शुक्रवार को स्नान के बाद लौकी का भोग लगा। इसी के साथ नहाय-खाय की परंपरा निभाई गई। डाला सजाने के लिए सूप, डलिया के साथ ही हल्दी, सिंदूर, चंदन समेत अन्य पूजा सामग्रियों की खरीददारी की जा रही है।
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फलों का बाजार सजा हुआ है। गन्ने से छठ पूजा के लिए घाटों सरोवरों पर मंडप बनाए जाएंगे। पतियों की दीर्घायु के साथ ही घर, समाज और राष्ट्र के मंगल की कामना से अर्घ्य देने के लिए महिलाएं बाजे गाजे के साथ नदी और सरोवर के घाटों पर पहुंचेंगी। इसके लिए लोग वेदियां बनाकर उन पर नाम लिख अपनी जगह पक्की कर रहे हैं। गोमती नदी के घाटों पर वेदी बनाने के लिए शनिवार को सुबह से भीड़ लगेगी।