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नए जमाने का सिनेमा है वेब सीरीज: शब्बीर
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देश के मशहुर गीतकार शब्बीर अहमद की फ़ोटो।
- फोटो : JAUNPUR
केराकत। हम तुमको निगाहों में इस तरह चुरा लेंगे..., तेरी-मेरी, मेरी-तेरी प्रेम कहानी है मुश्किल... जैसे गीतों के जरिए हर जुबां तक पहुंचने वाले गीतकार शब्बीर अहमद वेब सीरीज को नए जमाने का सिनेमा मानते हैं। उनका कहना है कि वेब सीरीज ने फिल्मों को काफी पीछे छोड़ दिया है। यह इंटरनेट का ऐसा माध्यम है, जो हर किसी की जेब में है। इसने प्रतिभाओं को भी नया प्लेटफार्म दिया है।
इन दिनों अपने पैतृक आवास जौनपुर के मुफ्तीगंज आए शब्बीर अहमद ने अमर उजाला से खास बातचीत में कहा कि पहले इतने प्लेटफार्म नहीं और न ही इतनी ज्यादा संभावनाएं। ऑनलाइन माध्यम के आने के बाद अब प्रतिभाएं छिप नहीं पाएंगी और न ही उन्हें आगे बढ़ने से कोई रोक पाएगा। अपनी काबिलियत के बल पर पल भर में वह देश-दुनिया में मशहूर हो सकते हैं। रानू मंडल इसकी नजीर हैं। हमें कड़ी मेहनत और सीखने की ललक को नहीं छोड़ना है। लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखकर ईमानदारी से काम करें तो सफलता जरुर मिलेगी। अभिनेता सलमान खान को अपना गॉड फादर मानने वाले शब्बीर अहमद ने सलमान की कई फिल्मों के गीत लिखे हैं। इसमें गर्व, बाडीगार्ड, पार्टनर, लक, वांटेड, नो प्राब्लम, किस किस से प्यार करुं, अपना सपना मनी-मनी, काल, गॉड तुसी ग्रेट हो आदि प्रमुख हैं। सड़क-2, सूर्यवंशी, बैड ब्वाय, वरुण धवन की फिल्म कूली नंबर वन की रिमेक में भी उन्होंने कई गाने लिखे हैं।
मुफलिसी में बीता बचपन, दंगों से पिता को छोड़ना पड़ा था मुंबई
शब्बीर अहमद का बचपन बेहद मुफलिसी में बीता है। मूल रुप से थानागद्दी निवासी पिता समीउल्ला मुंबई के भिवंडी में रहकर नाई की छोटी सी दुकान चलाते थे। कुछ पैसे जुटाए और फिर दुबई चले गए। मुंबई में दंगों के बाद वह लौटे और परिवार को लेकर वापस गांव चले आए। यहां मुफ्तीगंज बाजार की मदरसा गली में वर्ष 1988 में छोटा सा मकान बनाकर रहना शुरू किया। बचपन से ही गाने के शौकीन शब्बीर हमेशा कुछ न कुछ गुनगुनाते रहते थे। तब उन्हें भी नहीं पता था कि उनकी यह कला ही उन्हें अलग पहचान देगी। परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए अन्य लड़कों के साथ ही वह मुंबई चले गए। वहां उनकी मुलाकात हम तुम्हारे हैं सनम के सेट पर सलमान खान से हुई और फिर वहीं से उनका जीवन बदल गया। आज शब्बीर किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं।
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इन दिनों अपने पैतृक आवास जौनपुर के मुफ्तीगंज आए शब्बीर अहमद ने अमर उजाला से खास बातचीत में कहा कि पहले इतने प्लेटफार्म नहीं और न ही इतनी ज्यादा संभावनाएं। ऑनलाइन माध्यम के आने के बाद अब प्रतिभाएं छिप नहीं पाएंगी और न ही उन्हें आगे बढ़ने से कोई रोक पाएगा। अपनी काबिलियत के बल पर पल भर में वह देश-दुनिया में मशहूर हो सकते हैं। रानू मंडल इसकी नजीर हैं। हमें कड़ी मेहनत और सीखने की ललक को नहीं छोड़ना है। लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखकर ईमानदारी से काम करें तो सफलता जरुर मिलेगी। अभिनेता सलमान खान को अपना गॉड फादर मानने वाले शब्बीर अहमद ने सलमान की कई फिल्मों के गीत लिखे हैं। इसमें गर्व, बाडीगार्ड, पार्टनर, लक, वांटेड, नो प्राब्लम, किस किस से प्यार करुं, अपना सपना मनी-मनी, काल, गॉड तुसी ग्रेट हो आदि प्रमुख हैं। सड़क-2, सूर्यवंशी, बैड ब्वाय, वरुण धवन की फिल्म कूली नंबर वन की रिमेक में भी उन्होंने कई गाने लिखे हैं।
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मुफलिसी में बीता बचपन, दंगों से पिता को छोड़ना पड़ा था मुंबई
शब्बीर अहमद का बचपन बेहद मुफलिसी में बीता है। मूल रुप से थानागद्दी निवासी पिता समीउल्ला मुंबई के भिवंडी में रहकर नाई की छोटी सी दुकान चलाते थे। कुछ पैसे जुटाए और फिर दुबई चले गए। मुंबई में दंगों के बाद वह लौटे और परिवार को लेकर वापस गांव चले आए। यहां मुफ्तीगंज बाजार की मदरसा गली में वर्ष 1988 में छोटा सा मकान बनाकर रहना शुरू किया। बचपन से ही गाने के शौकीन शब्बीर हमेशा कुछ न कुछ गुनगुनाते रहते थे। तब उन्हें भी नहीं पता था कि उनकी यह कला ही उन्हें अलग पहचान देगी। परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए अन्य लड़कों के साथ ही वह मुंबई चले गए। वहां उनकी मुलाकात हम तुम्हारे हैं सनम के सेट पर सलमान खान से हुई और फिर वहीं से उनका जीवन बदल गया। आज शब्बीर किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं।
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