जौनपुर। सावन माह के शुक्ल की पंचमी पर शनिवार को नाग देवता की पूजा हुई। दूध-लावा चढ़ाकर नाग देवता से अकाल मृत्यु के दोष से मुक्ति की प्रार्थना की। कोरोना संकट के कारण इस बार नाग पंचमी पर लगने वाले परंपरागत मेलों और अन्य धार्मिक अनुष्ठान ठप रहे। मंदिरों में सन्नाटा पसरा रहा। गांवों में कुछ स्थानों पर युवाओं ने कबड्डी, कुश्ती, खो-खो खेलकर परपंरा का निर्वहन किया। बच्चों की टोली बगीचों में झूला झुलकर आनंद उठाती नजर आई। शहर के सद्भावना पुल स्थित नव दुर्गा शिव मंदिर, शाहीपुल स्थित गोमतेश्वर महादेव मंदिर सहित अन्य मंदिरों में लोगों ने जलाभिषेक किया। पांचों शिवाला, केराकवीर मंदिर में भी दर्शन-पूजन होता रहा। बरईपार: शिव मंदिरों में पहुंचकर भक्तों ने नाग देवता को दूध, लावा चढाकर पूजा किया। छोटे भाईयों ने बहनों द्वारा तैयार की गई गुड़ियों को जलाशय में पीटकर परंपरा का निर्वहन किया। मीरगंज: क्षेत्र में नागपंचमी पर लोगों ने मंदिरों में दूध लावा चढा कर नाग की पूजा की। कुछ गांवों में खेलकूद आयोजित हुआ। मछलीशहर: नाग पंचमी पर नाग देवता को दूध लावा चढ़ाकर पूजन किया गया। युवकों ने कबड्डी और कूड़ी कूदने की प्रतियोगिता भी हुई। मुफ्तीगंज: क्षेत्र के मुफ्तीगंज, हनुवाडिह व नैपुरा में स्थापित शिव मंदिरो में धतूरा, बेलपत्र आदि से जलाभिषेक किया गया। नेवढ़िया: क्षेत्र के सारंगडीह गांव स्थित लौहारदेव बाबा मंदिर पर नागपंचमी पर दर्शन पूजन के लिए भक्तों की भीड रही। सिंगरामऊ: क्षेत्र के बाबा गुदरनाथ धाम, त्रिवुभनबाबा, झलियवहा बाबा, गौरीशंकर मंदिर, शहीद बाबा समेत अन्य शिवालयों में दुग्धाभिषेक, रुद्राभिषेक, महामृत्यंजय मंत्र और ओम नम: शिवाय का जाप किया गया।