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लॉक डाउन में हत्या और मारपीट पर नहीं लगी रोक

Tue, 02 Jun 2020 10:48 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 02 Jun 2020 10:48 PM IST
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Murder and assault were not banned in lock down
जौनपुर। लॉक डाउन में सरकार ने घरों से बाहर निकलने पर पाबंदी लगाई थी। इसके बावजूद अपराधियों की गतिविधियों पर रोक नहीं लगी। जमीन के विवाद, रास्ता और जल निकासी के झगड़ों में मारपीट की घटनाएं रोजाना होती रहीं। दो माह के दौरान 15 लोगों की हत्या हुई। रोजाना हर थाने में मारपीट के चार-पांच मामले दर्ज किए गए और इन वारदातों में औसतन रोजाना 200 लोग घायल हुए।
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भूमि से संबंधित विवाद तो पहले से ही होते आ रहे हैं लेकिन लॉक डाउन के दौरान इसमें इजाफा हुआ है। लॉक डाउन के चलते तहसीलों और थानों में समाधान दिवस के आयोजन नहीं हुए। इससे तमाम विवादित मामलों का निस्तारण नहीं हो पाया। कहीं सुनवाई नहीं थी तो विवाद ने हिंसक रूप धारण कर लिया। लाक डाउन में तमाम लोग गांव आ गए। इससे पक्ष-विपक्ष सभी का संख्या बल बढ़ गया तो छोटी-छोटी बातों पर लोग धैर्य खोने लगे। लॉक डाउन में प्रशासन का ध्यान कहीं और केंद्रित था तो कुछ पुलिस वाले भी मौके की नजाकत को समझते हुए भूमि विवादों में पक्षकार बन गए।
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लंबे समय बाद बहुत से लोग घर वापस आ रहे हैं। अब तक उनके मकान और जमीन की सुविधाओं का जो लोग लाभ ले रहे थे, उनसे विवाद होना स्वाभाविक था। जो लोग वापस आए उनका परिवार के साथ सामंजस्य बनना मुश्किल है। इससे कचलते भी विवाद बढ़े हैं। अभाव ग्रस्तता के चलते भी व्यक्ति उन्मादी और हिंसक हो जाता है। -प्रो. आरएन त्रिपाठी, समाजशास्त्री।
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दुनिया भर में अपराध बढ़ रहे हैं। आने वाले समय में यहां भी मारपीट की घटनाएं बढ़ सकती हैं। लोगों की मानसिक ऊर्जा रचनात्मक कार्यों में नहीं लगेगी तो उनमें नकारात्मक प्रवृत्तियां बढ़ेंगी। लॉकडाउन के बाद दूसरे शहरों से गांव आने वालों से तालमेल में भी दिक्कत हो रही है। जब लोगों का अपना सुख सर्वोपरि हो जाता है तो द्वंद लाजमी है। सहनशीलता कम हो गई है। ऐसे में छोटी-छोटी बातों पर लड़ाइयां बढ़ेंगी।

प्रो.अरएन सिंह, मनोवैज्ञानिक।
मारपीट की अधिकतर घटनाएं भूमि विवाद को लेकर हुई हैं। सभी थानेदारों को निर्देश दिए गए हैं कि भूमि से संबंधित विवाद को गंभीरता से लें। विवादित भूमि पर कब्जे की कोशिश करने वालों के खिलाफ सख्ती से पेश आएं। गर्मी के दिनों में खेत खाली होने पर जब लोग मेड़बंदी या जुताई का काम करते हैं तो विवाद की गुंजाइश बढ़ जाती है। -अशोक कुमार, पुलिस अधीक्षक
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