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संस्कृति और भाषा का अद्भुत संगम है मातृभाषा : मोनिका एस गर्ग
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जौनपुर। पूर्वांचल विश्वविद्यालय एवं गुरु नानक कॉलेज स्वायत्तशासी चेन्नई की ओर से सोमवार को सात दिवसीय ऑनलाइन अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। उद्घाटन सत्र में अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर शिक्षण, शोध एवं रोजगार में मातृभाषा की उपादेयता विषय पर चर्चा हुई।
बतौर मुख्य अतिथि अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा मोनिका एस गर्ग ने कहा कि मातृभाषा में सभी भाषाओं और संस्कृतियों का अद्भुत संगम है। व्यक्ति जीवन के शुरुआती दौर में मौलिक मूल्य और विचारों को अपने माता-पिता से सीखता है। वह अपने सभी संस्कार मातृभाषा में ही आत्मसात करता है। देश में 1635 मातृभाषा है। इन्हें कैसे विकसित किया जाए, इस पर शोध कैसे हो और रोजगार के अवसर कैसे मिले, इस पर गहन चर्चा की जरूरत है। अध्यक्षता कर रहीं कुलपति प्रो. निर्मला एस मौर्य ने कहा कि ऐसी कार्यशाला लोक संस्कृतियों का स्मरण कराती हैं। रिपोर्टिगिं, विज्ञापन, द्विभाषी रिपोर्टिगिं पर डिप्लोमा कोर्स कराने की भी योजना है। बैंकिंग का साहित्य ऑनलाइन है। इसके अनुवाद में भी रोजगार के अच्छे अवसर हैं।
विशिष्ट अतिथि प्रख्यात लोक गायिका पद्मश्री अजिता श्रीवास्तव ने कहा कि भारत बहुभाषी देश है। डिजिटल दौर में मातृभाषा पर संकट है। हम अपनी मातृभाषा में गर्व से बात करें। मातृभाषा के गीत सुपर हिट हो रहे हैं और व्यवसाय भी कर रहे हैं। इसको बढ़ावा न देने से हमारी संस्कृति का लोप हो रहा है। गुरु नानक कॉलेज चेन्नई की सलाहकार डॉ. मरलीन मौरिस मलयालम भाषा की है। इसके बाद भी वह हिंदी समेत देश के कई भाषाओं को जानती हैं। मातृभाषा से जुड़े रहना हर इंसान के लिए जरूरी है। वित्त अधिकारी संजय राय ने कहा कि दंतकथा कथाओं को कैसे मातृभाषा से जोड़ा जाए इसके लिए प्रयास करना होगा।
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बतौर मुख्य अतिथि अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा मोनिका एस गर्ग ने कहा कि मातृभाषा में सभी भाषाओं और संस्कृतियों का अद्भुत संगम है। व्यक्ति जीवन के शुरुआती दौर में मौलिक मूल्य और विचारों को अपने माता-पिता से सीखता है। वह अपने सभी संस्कार मातृभाषा में ही आत्मसात करता है। देश में 1635 मातृभाषा है। इन्हें कैसे विकसित किया जाए, इस पर शोध कैसे हो और रोजगार के अवसर कैसे मिले, इस पर गहन चर्चा की जरूरत है। अध्यक्षता कर रहीं कुलपति प्रो. निर्मला एस मौर्य ने कहा कि ऐसी कार्यशाला लोक संस्कृतियों का स्मरण कराती हैं। रिपोर्टिगिं, विज्ञापन, द्विभाषी रिपोर्टिगिं पर डिप्लोमा कोर्स कराने की भी योजना है। बैंकिंग का साहित्य ऑनलाइन है। इसके अनुवाद में भी रोजगार के अच्छे अवसर हैं।
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विशिष्ट अतिथि प्रख्यात लोक गायिका पद्मश्री अजिता श्रीवास्तव ने कहा कि भारत बहुभाषी देश है। डिजिटल दौर में मातृभाषा पर संकट है। हम अपनी मातृभाषा में गर्व से बात करें। मातृभाषा के गीत सुपर हिट हो रहे हैं और व्यवसाय भी कर रहे हैं। इसको बढ़ावा न देने से हमारी संस्कृति का लोप हो रहा है। गुरु नानक कॉलेज चेन्नई की सलाहकार डॉ. मरलीन मौरिस मलयालम भाषा की है। इसके बाद भी वह हिंदी समेत देश के कई भाषाओं को जानती हैं। मातृभाषा से जुड़े रहना हर इंसान के लिए जरूरी है। वित्त अधिकारी संजय राय ने कहा कि दंतकथा कथाओं को कैसे मातृभाषा से जोड़ा जाए इसके लिए प्रयास करना होगा।
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