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शाहगंज सीट से लगातार पांच बार विधायक बने थे माता प्रसाद
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जौनपुर। शाहगंज विधानसभा सीट पर इस बार रोचक मुकाबला देखने को मिलेगा। इस सीट पर इस बार 4 लाख एक हजार 222 मतदाताओं को मतदान करने का मौका मिला है। इसमें 2 लाख 7 हजार 399 पुरुष और एक लाख 38 हजार महिला और 23 थर्ड जेंडर मतदाता है। वहीं, चुनावी इतिहास पर नजर करें तो इस विधानसभा सीट से लगातार पांच बार अरुणांचल प्रदेश के राज्यपाल रहे स्वर्गीय माता प्रसाद विधायक बने थे।
बात अगर पहले विधानसभा चुनाव की करें तो साल 1952 में कांग्रेस से बाबू नंदन इस सीट से पहली बार विधायक बने थे। इसके बाद लगातार पांच बार 1657, 1962, 1967, 1969, 1974 में माता प्रसाद कांग्रेस से विधायक बने थे। 1977 में जपा के छोटेलाल निर्भर कांग्रेस के लगातार छह चुनाव से चले आ रहे विजय रथ को रोकने वाले पहले नेता बने थे। लेकिन 1980 में हुए अगले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने फिर से अपनी सीट पर कब्जा जमा ली थी। मगर, 1985 में हुए चुनाव में उसे हार के सामना करना पड़ा, फिर आज तक इस सीट पर कांग्रेस का कोई प्रत्याशी जीत नहीं सका है। हालांकि हर बार की तरह इस बार भी जीत के लिए रणनीति के तहत काम कर रही है। वहीं, बात अगर भाजपा की करें, तो इस सीट पर दो बार 1991 और 1996 में ही कमल खिल सका है। बसपा, जद जैसे दल भी एक-एक बार इस सीट पर जीत दर्ज कर सके हैं, जब कि साल 2002 से लगातार इस सीट पर समाजवादी पार्टी का कब्जा रहा है।
आजादी के बाद हुए चुनाव के ये रहे विजेता
1952- बाबू नंदन (कांग्रेस)
1957-माता प्रसाद (कांग्रेस)
1962 माता प्रसाद (कांग्रेस)
1967-माता प्रसाद (कांग्रेस)
1969- माता प्रसाद (कांग्रेस)
1974-माता प्रसाद (कांग्रेस)
1977-छोटेलाल निर्भय (जपा)
1980-पहलवान रावत (कांग्रेस)
1985-दीपचंद्र सोनकर (दमकिया)
1989 -दीप चंद्र सोनकर (जद)
1991-राम पारस रजक (भाजपा)
1993-राम दवर (बसपा)
1996-बांकेलाल सोनकर (भाजपा)
2002-जगदीश सोनकर (सपा)
2007-जगदीश सोनकर (सपा)
2012-शैलेंद्र यादव ललई (सपा)
2017- शैलेंद्र यादव ललई (सपा)
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बात अगर पहले विधानसभा चुनाव की करें तो साल 1952 में कांग्रेस से बाबू नंदन इस सीट से पहली बार विधायक बने थे। इसके बाद लगातार पांच बार 1657, 1962, 1967, 1969, 1974 में माता प्रसाद कांग्रेस से विधायक बने थे। 1977 में जपा के छोटेलाल निर्भर कांग्रेस के लगातार छह चुनाव से चले आ रहे विजय रथ को रोकने वाले पहले नेता बने थे। लेकिन 1980 में हुए अगले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने फिर से अपनी सीट पर कब्जा जमा ली थी। मगर, 1985 में हुए चुनाव में उसे हार के सामना करना पड़ा, फिर आज तक इस सीट पर कांग्रेस का कोई प्रत्याशी जीत नहीं सका है। हालांकि हर बार की तरह इस बार भी जीत के लिए रणनीति के तहत काम कर रही है। वहीं, बात अगर भाजपा की करें, तो इस सीट पर दो बार 1991 और 1996 में ही कमल खिल सका है। बसपा, जद जैसे दल भी एक-एक बार इस सीट पर जीत दर्ज कर सके हैं, जब कि साल 2002 से लगातार इस सीट पर समाजवादी पार्टी का कब्जा रहा है।
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आजादी के बाद हुए चुनाव के ये रहे विजेता
1952- बाबू नंदन (कांग्रेस)
1957-माता प्रसाद (कांग्रेस)
1962 माता प्रसाद (कांग्रेस)
1967-माता प्रसाद (कांग्रेस)
1969- माता प्रसाद (कांग्रेस)
1974-माता प्रसाद (कांग्रेस)
1977-छोटेलाल निर्भय (जपा)
1980-पहलवान रावत (कांग्रेस)
1985-दीपचंद्र सोनकर (दमकिया)
1989 -दीप चंद्र सोनकर (जद)
1991-राम पारस रजक (भाजपा)
1993-राम दवर (बसपा)
1996-बांकेलाल सोनकर (भाजपा)
2002-जगदीश सोनकर (सपा)
2007-जगदीश सोनकर (सपा)
2012-शैलेंद्र यादव ललई (सपा)
2017- शैलेंद्र यादव ललई (सपा)