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फार्मासिस्टों के भरोसे जिले के कई अस्पताल
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जौनपुर। सरकारी तंत्र भले ही स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी का दावा कर रहा हो, लेकिन जमीनी सच्चाई इसके उलट है। ग्रामीणों के लिए चिकित्सा सुविधा बीमार तंत्र के भरोसे है। चिकित्सकों-कर्मचारियों की भारी कमी से जूझते अस्पतालों का संचालन कहीं फार्मासिस्ट कर रहे हैं तो कहीं वह भी नहीं हैं। कोविड काल में स्थिति और भी बिगड़ गई है। तमाम चिकित्सकों-कर्मचारियों को कोरोना ड्यूटी में लगा दिए जाने या खुद संक्रमित होने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीजों के इलाज की सुविधा लगभग ठप है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी एक-दो चिकित्सक ही मिल रहे हैं। ऐसे में दूर-दराज से पहुंचने वालों को चिकित्सकों का इंतजार करके लौट जाना पड़ रहा है।
जिले में कुल 22 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, आठ ब्लाक स्तरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 73 अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। इनके लिए कुल 268 चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं। प्रत्येक सीएचसी पर एक जनरल सर्जन, एक फिजिशियन, एक बाल रोग विशेषज्ञ, एक एनेस्थिसिया और एक रेडियोलॉजिस्ट समेत कम से कम पांच और पीएचसी पर दो डॉक्टर होने चाहिए। इसकी तुलना में पूरे जिले में सिर्फ 202 ही चिकित्सक ही तैनात हैं। इसमें भी कई डेंटल सर्जन हैं तो कोई ईएनटी स्पेशलिस्ट। पूरे जिले में सिर्फ दो फिजिशियन, छह बाल रोग विशेषज्ञ, तीन सर्जन और चार एनेस्थिसिया के डॉक्टर हैं। एक रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती है, मगर उन्हें कोरोना काल में वाराणसी से संबद्ध कर लिया गया है। ऐसी ही स्थिति अन्य स्टाफ की भी है। फार्मासिस्टों के 144 स्वीकृत पदों की तुलना में 136 की तैनाती है, जबकि स्टाफ नर्स के स्वीकृत 90 पदों पर सिर्फ 56 तैनात हैं। इनमें से भी अधिकांश नर्स व फार्मासिस्टों को कोरोना ड्यूटी में लगाया गया है। कई कोविड से ग्रसित हैं तो कुछ अन्य कारणों से अवकाश पर हैं। ग्रामीण जनता का उपचार सिर्फ एएनएम, आशा कार्यकर्ताओं के भरोसे चल रहा है। सभी अस्पतालों में ओपीडी बंद है। सिर्फ इमरजेंसी के मरीजों का ही उपचार चल रहा है।
उपचार क्या करें, जर्जर भवन में खुद डरे रहते हैं
धर्मापुर। स्थानीय पीएचसी पर दो डॉक्टरों का पद है। इस पर डॉ. चंद्रजीत यादव व डॉ. खुशबू सिंह तैनात हैं। एक फार्मासिस्ट राजेश कुमार, वार्ड ब्वाय आनंद कुमार पांडेय, एलटी विक्रम को नियुक्त किया गया है। विक्रम की ड्यूटी जिला अस्पताल पर कोविड की सैंपलिंग में लगी है। इमरजेंसी में यहां मरीजों को तब तक ही भर्ती करने की सुविधा है, जब तक डॉक्टर मौजूद रहें। पीएचसी पर मौजूद डॉ. इंद्रजीत यादव ने बताया कि भवन काफी जर्जर हो चुका है। आए दिन प्लास्टर उखड़ते रहते हैं। सबसे ज्यादा खतरा इसी भवन को लेकर है। बराबर मन में भय बना रहता है। सीएमओ डॉ. राकेश कुमार का कहना है कि डॉक्टर-कर्मचारी के रिक्त पदों के बारे में सूचना शासन को नियमित भेजी जाती है। इस वक्त कोरोना का नियंत्रण रोकना प्राथमिकता है। संक्रमण रोकने के लिए ही ओपीडी सेवा को बंद किया गया है। शासन का निर्देश मिलने पर इसका संचालन शुरू किया जाएगा। दवाओं की कमी नहीं है। कोई लिखित शिकायत करता है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
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जिले में कुल 22 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, आठ ब्लाक स्तरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 73 अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। इनके लिए कुल 268 चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं। प्रत्येक सीएचसी पर एक जनरल सर्जन, एक फिजिशियन, एक बाल रोग विशेषज्ञ, एक एनेस्थिसिया और एक रेडियोलॉजिस्ट समेत कम से कम पांच और पीएचसी पर दो डॉक्टर होने चाहिए। इसकी तुलना में पूरे जिले में सिर्फ 202 ही चिकित्सक ही तैनात हैं। इसमें भी कई डेंटल सर्जन हैं तो कोई ईएनटी स्पेशलिस्ट। पूरे जिले में सिर्फ दो फिजिशियन, छह बाल रोग विशेषज्ञ, तीन सर्जन और चार एनेस्थिसिया के डॉक्टर हैं। एक रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती है, मगर उन्हें कोरोना काल में वाराणसी से संबद्ध कर लिया गया है। ऐसी ही स्थिति अन्य स्टाफ की भी है। फार्मासिस्टों के 144 स्वीकृत पदों की तुलना में 136 की तैनाती है, जबकि स्टाफ नर्स के स्वीकृत 90 पदों पर सिर्फ 56 तैनात हैं। इनमें से भी अधिकांश नर्स व फार्मासिस्टों को कोरोना ड्यूटी में लगाया गया है। कई कोविड से ग्रसित हैं तो कुछ अन्य कारणों से अवकाश पर हैं। ग्रामीण जनता का उपचार सिर्फ एएनएम, आशा कार्यकर्ताओं के भरोसे चल रहा है। सभी अस्पतालों में ओपीडी बंद है। सिर्फ इमरजेंसी के मरीजों का ही उपचार चल रहा है।
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उपचार क्या करें, जर्जर भवन में खुद डरे रहते हैं
धर्मापुर। स्थानीय पीएचसी पर दो डॉक्टरों का पद है। इस पर डॉ. चंद्रजीत यादव व डॉ. खुशबू सिंह तैनात हैं। एक फार्मासिस्ट राजेश कुमार, वार्ड ब्वाय आनंद कुमार पांडेय, एलटी विक्रम को नियुक्त किया गया है। विक्रम की ड्यूटी जिला अस्पताल पर कोविड की सैंपलिंग में लगी है। इमरजेंसी में यहां मरीजों को तब तक ही भर्ती करने की सुविधा है, जब तक डॉक्टर मौजूद रहें। पीएचसी पर मौजूद डॉ. इंद्रजीत यादव ने बताया कि भवन काफी जर्जर हो चुका है। आए दिन प्लास्टर उखड़ते रहते हैं। सबसे ज्यादा खतरा इसी भवन को लेकर है। बराबर मन में भय बना रहता है। सीएमओ डॉ. राकेश कुमार का कहना है कि डॉक्टर-कर्मचारी के रिक्त पदों के बारे में सूचना शासन को नियमित भेजी जाती है। इस वक्त कोरोना का नियंत्रण रोकना प्राथमिकता है। संक्रमण रोकने के लिए ही ओपीडी सेवा को बंद किया गया है। शासन का निर्देश मिलने पर इसका संचालन शुरू किया जाएगा। दवाओं की कमी नहीं है। कोई लिखित शिकायत करता है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
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