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कानून के बाद भी नहीं मिला सौ दिन का रोजगार
ब्यूरो, अमर उजाला, जौनपुर
Updated Sun, 01 May 2016 07:14 PM IST
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मौके पर नहीं मिले मनरेगा के तहत किए कार्य
- फोटो : अमर उजाला
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महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून (मनरेगा) भी मजदूरों की दशा नहीं बदल सका। मनरेगा के तहत पंजीकृत श्रमिकों को साल में सौ दिन का रोजगार देने का सपना जरूर दिखाया गया पर तीन लाख जॉब कार्ड धारकों में से महज 6751 श्रमिकों को छोड़ किसी को भी सौ दिन का रोजगार नहीं मिल सका है।
खून, पसीना बहाकर परिवार चलाने वाले श्रमिकों की बेहतरी के लिए शुरू की गई केंद्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना से जिले के मजदूरों को कोई खास लाभ नहीं मिल सका है। हालांकि अफसरों का दावा है कि महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून मांग आधारित कार्यक्रम है। जो लोग काम की मांग करेंगे उन्हीं को रोजगार दिया जाएगा।
जिले में जॉबकार्ड धारकों की संख्या 302778 है। अफसरों का दावा है कि वर्ष 2015-16 में वैसे तो 107838 को रोजगार दिया गया है। लेकि न सौ दिन का रोजगार सिर्फ 6751 को ही दिया जा सका। जबकि शहर के लेबर चौराहों पर प्रतिदिन श्रमिकों की भीड़ देखी जा सकती है। कोई ऐसा दिन नहीं होता कि जब घर से काम पाने की लालच में शहर आने वाले 50 से अधिक श्रमिकों को कोई काम नहीं मिलता और उन्हें मायूस लौटना पड़ता है।
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खून, पसीना बहाकर परिवार चलाने वाले श्रमिकों की बेहतरी के लिए शुरू की गई केंद्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना से जिले के मजदूरों को कोई खास लाभ नहीं मिल सका है। हालांकि अफसरों का दावा है कि महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून मांग आधारित कार्यक्रम है। जो लोग काम की मांग करेंगे उन्हीं को रोजगार दिया जाएगा।
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जिले में जॉबकार्ड धारकों की संख्या 302778 है। अफसरों का दावा है कि वर्ष 2015-16 में वैसे तो 107838 को रोजगार दिया गया है। लेकि न सौ दिन का रोजगार सिर्फ 6751 को ही दिया जा सका। जबकि शहर के लेबर चौराहों पर प्रतिदिन श्रमिकों की भीड़ देखी जा सकती है। कोई ऐसा दिन नहीं होता कि जब घर से काम पाने की लालच में शहर आने वाले 50 से अधिक श्रमिकों को कोई काम नहीं मिलता और उन्हें मायूस लौटना पड़ता है।
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