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मधुबन : 24 घंटे में 52 सेमी घटा सरयू का जलस्तर
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दुबारी के देवारा क्षेत्र के गांव में बाढ़ के पानी से बर्बाद धान की फसल को देखते किसान। संवाद
सरयू नदी का जलस्तर तेजी से घटने से देवारा क्षेत्र में बाढ़ से घिरे लोगों ने राहत की सांस ली है। नदी का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे पहुंच गया है। जगह-जगह जलजमाव से संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।
कई दिनों से नदी के जलस्तर में लगातार कमी दर्ज की जा रही है। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता संजय मात्रे ने बताया कि हाहानाला रेगुलेटर पर रविवार सुबह आठ बजे सरयू का जलस्तर 66.08 मीटर रिकॉर्ड किया गया।
शनिवार को 66.60 मीटर दर्ज किया गया था। इस तरह 24 घंटे में नदी का जलस्तर 52 सेंटीमीटर का घटाव दर्ज किया गया। नदी खतरे का निशान 66.31 मीटर है।
इस संबंध में क्षेत्र के मिथिलेश यादव, जय प्रकाश यादव, ग्राम प्रधान सपन कन्नौजिया, जयराम साहनी का कहना है कि खेतों से बाढ़ का पानी पूरी तरह निकलने में अभी कई दिन लग सकते हैं। बाढ़ से फसलों को काफी नुकसान हुआ है। बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।
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बाढ़ का पानी कम होने के बाद अब प्रभावित लोगों के स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता बनी हुई है। सीएचसी मधुबन के अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार पांडेय ने बताया कि बाढ़ के बाद कई तरह की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसे लेकर स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अलर्ट है। बाढ़ प्रभावित लोगों की लगातार निगरानी की जा रही है।
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कई दिनों से नदी के जलस्तर में लगातार कमी दर्ज की जा रही है। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता संजय मात्रे ने बताया कि हाहानाला रेगुलेटर पर रविवार सुबह आठ बजे सरयू का जलस्तर 66.08 मीटर रिकॉर्ड किया गया।
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शनिवार को 66.60 मीटर दर्ज किया गया था। इस तरह 24 घंटे में नदी का जलस्तर 52 सेंटीमीटर का घटाव दर्ज किया गया। नदी खतरे का निशान 66.31 मीटर है।
इस संबंध में क्षेत्र के मिथिलेश यादव, जय प्रकाश यादव, ग्राम प्रधान सपन कन्नौजिया, जयराम साहनी का कहना है कि खेतों से बाढ़ का पानी पूरी तरह निकलने में अभी कई दिन लग सकते हैं। बाढ़ से फसलों को काफी नुकसान हुआ है। बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।
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बाढ़ का पानी कम होने के बाद अब प्रभावित लोगों के स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता बनी हुई है। सीएचसी मधुबन के अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार पांडेय ने बताया कि बाढ़ के बाद कई तरह की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसे लेकर स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अलर्ट है। बाढ़ प्रभावित लोगों की लगातार निगरानी की जा रही है।