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Jaunpur News: विदेशी राजाओं के शासन में भी मुद्राओं पर अंकित रहे भगवान शिव

Fri, 08 Mar 2024 12:08 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 08 Mar 2024 12:08 AM IST
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Lord Shiva remained inscribed on currencies even during the rule of foreign kings.
जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के शोध छात्र संदीप कुमार सिंह ने सिक्कों पर अपने शोध में पाया कि प्राचीन भारतीय सिक्कों के साथ ही विदेशी राजाओं (कुषाण काल) के सिक्कों पर भी भगवान शिव का अंकन मिलता है। कुषाण राजा दो हजार वर्ष पहले चीन से भारत आए थे। उनके शासनकाल में भी तांबे और सोने के सिक्कों पर भगवान शिव का अंकन होता था।
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कुषाण राजवंश के लोग मूलतः चीन के यूह-ची जाति के थे। कुषाणों का समूह भ्रमणशील था। इन पर हूण शासक ने आक्रमण कर इन्हें पश्चिम की तरफ भागने पर विवश कर दिया। यह भारत में 160 ईसा पूर्व आए थे। कुषाण राजवंश का पहला शासक कुजुल कडफिसेस था। विम कडफिसेस को पिता कुजुल से उत्तराधिकार में काबुल, गांधार फारस व उत्तर पश्चिम भारत का साम्राज्य मिला। यह सिंधु को पार कर मथुरा तक आ गया था। फिर इसका साम्राज्य बनारस तक विस्तृत हो गया था।
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शैव धर्म को मानने वाला था विम कडफिसेस
संदीप ने अपने शोध में पाया कि विम कडफिसेस शैव (शिव) धर्म को मानने वाला था। इसकी जानकारी उसके शासन में जारी कि गई मुद्राओं से प्राप्त होती है। मुद्राओं पर नंदी के साथ भगवान शिव की आकृति अंकित है। मुद्राओं पर लेख दो भाषाओं में मिलता है एक यूनानी व दूसरी खरोष्ठि लिपि में। कुषाण काल में मथुरा कला शैली में शैव संप्रदाय (शिव को मानने वाले) में पूजा के लिए लिंग व पुरुष आकृति दोनों ही प्रचलन में थे। शैव धर्म उस समय अपने शीर्ष पर था और भारत ही नहीं विदेशी भी शिव को पूजते थे।
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संदीप ने शोध में पाया कि कुषाण सम्राट विम कडफिसेस के समय से लेकर अंतिम शासक वासुदेव तक बहुत से सिक्कों में शिव की आकृति का अंकन मिलता है।



इन कुषाण राजाओं के काल में भी दिखता है शिव का अंकन

- विम कडफिसेस के सिक्कों के स्वर्ण मुद्राओं पर अंकन दो भुजा वाले त्रिशूलधारी भगवान शिव की आकृति मिलती है। ताम्र मुद्राओं पर भगवान शिव नंदी बैल के साथ त्रिशूल पकड़े तीन मुख वाले एवं दो मुख वाले शिव की आकृति मिलती है। इससे स्पष्ट होता है कि विम भारतीय हिंदू धर्म के शैव मत से सिर्फ प्रभावित ही नहीं था बल्कि अनुयायी भी था।
- विम कडफिसेस के बाद उसका पुत्र सबसे प्रसिद्ध और शक्तिशाली शासक कनिष्क ने सत्ता ग्रहण की। इसकी मुद्राओं पर भगवान शिव को चार भुजाओं वाले देवता के रूप में प्रदर्शित किया गया है।


-कनिष्क के बाद हुविष्क एक शक्तिशाली शासक बना, इसकी ताम्र मुद्राओं पर भी भगवान शिव की चार भुजाओं वाले शिव का अंकन मिलता है।
- हुविष्क के पुत्र वासुदेव ने भी अपने शासनकाल में मुद्राओं पर भगवान शिव के साथ नंदी का अंकन किया था।
ऐतिहासिक त्रिलोचन महादेव मंदिर है कुषाण कालीन
जौनपुर। जिले के जलालपुर के रेहटी गांव में त्रिलोचन महादेव का ऐतिहासिक मंदिर स्थापित है। शोध छात्र संदीप कुमार सिंह ने अपने शोध में पाया कि त्रिलोचन महादेव मंदिर का शिवलिंग दो हजार वर्ष पुराना कुषाण कालीन है। लेखक शरतेंदु की पुस्तक जौनपुर का गौरवशाली इतिहास में इसका विवरण मिलता है। शिवलिंग एक मुखी हैं जिस पर शिव के मुख का अंकन था जो घिसाव के कारण विलुप्त हो गया। पूर्वांचल में यह मंदिर का आस्था का केंद्र है। सावन के महीने और महाशिवरात्रि के दिन यहां मेले का आयोजन होता है। लाखों शिवभक्त यहां पर जलाभिषेक कर अभिभूत होते हैं। इसके बाद वाराणसी काशी विश्वनाथ व अन्य शिव धाम के लिए रवाना होते हैं।
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