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इस्लाम में जुल्म की कोई गुंजाइश नहीं
अमर उजाला ब्यूरो, जौनपुर
Updated Sun, 20 Sep 2015 12:44 AM IST
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आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के उपाध्यक्ष व शिया आलिम डाॅ. कल्बे सादिक ने कहा कि इस्लाम में जुल्म की कोई गुंजाइश नहीं है। शरीयत में इसे सख्ती से मना किया गया है। जो भी जुल्म पसंद लोग हैं वो मुसलमान नहीं हैं।
वह शनिवार को जामिया इमाम जाफर सादिक सदर इमामबाड़ा बेगमगंज में मोहम्मद अहसन लल्लू मरहूम की शरीके हयात के इसले सवाब में आयोजित मजलिस में बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि आप देश के लिए जीना सीखें देश आपको सब कुछ देने के लिए तैयार रहेगा। इतिहास साक्षी है जिस मुसलमान ने भी देश के लिए कुछ किया देश ने उसके लिए बहुत कुछ किया। इंसान ने हमेशा महिलाओं को न सिर्फ हमेशा कमतर आंका
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बल्कि उसे योजना के तहत शिक्षा से भी वंचित रखा। क्योंकि शिक्षा ही ऐसा साधन है जो उन्हें आदमियों को बराबरी पर लाकर खड़ा करता है। आज हालात कुछ बदले हैं और महिलाओं ने शिक्षा से लेकर हर क्षेत्र में परचम लहराने में कोई कसर
नहीं छोड़ी है। उन्होंने मुसलमानों से अपील की कि अपनी बेटियों को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ाएं ताकि आने वाली पीढ़ियों का विकास हो सके। कुरान में औरतों पर जुल्म सख्ती से मना किया गया है। ऐसा करने वाले अल्लाह की नजर में गिर
जाते हैं। धर्म ने जिन चीजों से रोका है उसके वैज्ञानिक कारण है। आज न हिंदु मुसलमान के खिलाफ है, न ही मुसलमान हिंदु के, बल्कि कुछ ऐसे संगठन हैं जिनसे दोनों समाज को दिक्कतें होती हैं। प्रत्येक व्यक्ति को चाहिए कि वो
भावनाओं में न बहकर बुद्धि से काम ले। मजलिस की शुरुआत सोजखानी से हुई। शायरों ने कलाम पेश किए। इससे पहले अजादारी काउंसिल की ओर से एएमडेजी के नेतृत्व में शहर में जगह-जगह उनका स्वागत किया गया।
इस मौके पर मुस्लिम धर्मगुरु मौलाना सफदर हुसैन जैदी, मौलाना हसन मेहंदी, नजमुल हसन नजमी, कोलकाता के इमाम मौलाना अतहर अब्बास, मौलाना फजले मुमताज, आले हसन, हसन अब्बास, हसन रिजवी, आरिफ हुसैनी, हसनैन कमर
दीपू, सुहैल असगर खान, असगर जैदी, तहसीन अब्बास, समीर नजर, नासिर रजा, कासिम सईद वास्ती, आदि रहे। आयोजक हसन मेहदी ने आभार व्यक्त किया।
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वह शनिवार को जामिया इमाम जाफर सादिक सदर इमामबाड़ा बेगमगंज में मोहम्मद अहसन लल्लू मरहूम की शरीके हयात के इसले सवाब में आयोजित मजलिस में बोल रहे थे।
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उन्होंने कहा कि आप देश के लिए जीना सीखें देश आपको सब कुछ देने के लिए तैयार रहेगा। इतिहास साक्षी है जिस मुसलमान ने भी देश के लिए कुछ किया देश ने उसके लिए बहुत कुछ किया। इंसान ने हमेशा महिलाओं को न सिर्फ हमेशा कमतर आंका
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बल्कि उसे योजना के तहत शिक्षा से भी वंचित रखा। क्योंकि शिक्षा ही ऐसा साधन है जो उन्हें आदमियों को बराबरी पर लाकर खड़ा करता है। आज हालात कुछ बदले हैं और महिलाओं ने शिक्षा से लेकर हर क्षेत्र में परचम लहराने में कोई कसर
नहीं छोड़ी है। उन्होंने मुसलमानों से अपील की कि अपनी बेटियों को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ाएं ताकि आने वाली पीढ़ियों का विकास हो सके। कुरान में औरतों पर जुल्म सख्ती से मना किया गया है। ऐसा करने वाले अल्लाह की नजर में गिर
जाते हैं। धर्म ने जिन चीजों से रोका है उसके वैज्ञानिक कारण है। आज न हिंदु मुसलमान के खिलाफ है, न ही मुसलमान हिंदु के, बल्कि कुछ ऐसे संगठन हैं जिनसे दोनों समाज को दिक्कतें होती हैं। प्रत्येक व्यक्ति को चाहिए कि वो
भावनाओं में न बहकर बुद्धि से काम ले। मजलिस की शुरुआत सोजखानी से हुई। शायरों ने कलाम पेश किए। इससे पहले अजादारी काउंसिल की ओर से एएमडेजी के नेतृत्व में शहर में जगह-जगह उनका स्वागत किया गया।
इस मौके पर मुस्लिम धर्मगुरु मौलाना सफदर हुसैन जैदी, मौलाना हसन मेहंदी, नजमुल हसन नजमी, कोलकाता के इमाम मौलाना अतहर अब्बास, मौलाना फजले मुमताज, आले हसन, हसन अब्बास, हसन रिजवी, आरिफ हुसैनी, हसनैन कमर
दीपू, सुहैल असगर खान, असगर जैदी, तहसीन अब्बास, समीर नजर, नासिर रजा, कासिम सईद वास्ती, आदि रहे। आयोजक हसन मेहदी ने आभार व्यक्त किया।