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संघर्षों में भी मुस्कुराना सीखें
ब्यूरो, अमर उजाला, जौनपुर
Updated Sat, 24 Jan 2015 11:34 PM IST
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पूर्वांचल विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में राज्यपाल राम नाईक ने छात्र-छात्राओं को विद्यालयीय शिक्षा के बाद जीवन जीने के मर्म समझाए। चार सूत्र वाक्यों को गांठ बांधने की नसीहत देते हुए कुलाधिपति ने कहा कि प्रतिस्पर्धा के दौर में खुद को साबित करने के लिए संघर्षों के बावजूद मुस्कुराते रहें, दूसरों की प्रशंसा करना सीखें, किसी को नीचा दिखाने का प्रयास न करें और अच्छे में भी अच्छा करने के बारे में सोचें।
उन्होंने स्नातकों, परास्नातकों और शोध उपाधि धारकों के साथ जीवन आसान बनाने वाले कई अनुभवों को भी साझा किया। कहा कि 18वें दीक्षांत समारोह के साथ ही पूर्वांचल विश्वविद्यालय वयस्क हो गया है और अब इसे नई छलांग लगाने के लिए तैयार रहना चाहिए।
राज्यपाल ने उपाधि धारकों से कहा कि डिग्री लेने के साथ भले ही आप लोगों की विद्यालयीय शिक्षा संपन्न हो रहे हों, लेकिन जीवन में हर क्षण शिक्षा ग्रहण करने की प्रवृत्ति न छोड़ें। समारोह की अध्यक्षता कर रहे राज्यपाल ने अपने भाषण की शुरुआत में सऊदी अरब के राजा अब्दुल्ला के निधन पर शोक संवेदना प्रकट कर की। उन्होंने कहा कि उनके निधन पर केंद्र सरकार ने एक दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है।
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हालांकि साथ ही उन्होंने वसंत पंचमी के अवसर पर होने वाले दीक्षांत समारोह के सुखद संयोग का भी जिक्र किया। राज्यपाल ने चिंता जताते हुए कहा कि देश में 700 विश्वविद्यालय हैं, लेकिन दुनिया के सर्वश्रेष्ठ 200 विश्वविद्यालयों में देश का एक भी विश्वविद्यालय शुमार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि इस फेहरिस्त में पूविवि भी शामिल हो, हमें इसका संकल्प लेना होगा।
कहा कि छात्र-छात्राओं को पढ़ाई के साथ-साथ व्यक्तित्व विकास पर भी ध्यान देना चाहिए। समारोह में कुलाधिपति ने 51 टापरों को गोल्ड मेडल दिए। दीक्षांत समारोह में 400 स्नातकों, परास्नातकों और शोधार्थियों को उपाधि दी गई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वैज्ञानिक और नीति आयोग के सदस्य डा. वीके सारस्वत ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी की विभिन्न विधाओं में मजबूती के साथ आगे बढ़ते भारत की तस्वीर पेश की।
उन्होंने कहा कि हर क्षेत्र में भारत एक चैंपियन के रूप में सामने आ रहा है। उन्होंने अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और उसकी चुनौतियाें पर विस्तार से चर्चा की। कहा कि रक्षा प्रणाली और अन्य विधाओं के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का विकास बेहद जरूरी है। उन्होंने महात्मा गांधी के उस कथन को भी रेखांकित किया, जिसमें उन्होंने कहा है कि हम क्या कर सकते हैं और हममें क्या करने की क्षमता है, इसकी समझ ही दुनिया की कई समस्याओं का समाधान कर सकती है। कुलपति प्रो. पीयूष रंजन अग्रवाल ने स्वागत भाषण के बाद उपाधिधारकों को दीक्षा ग्रहण कराई।
इस मौके पर कुलसचिव डा. वीके पांडेय, वित्त अधिकारी अमरचंद, परीक्षा नियंत्रक संजय मल्ल, मंडलायुक्त राजेंद्र मोहन श्रीवास्तव, पूर्व सांसद कमला प्रसाद सिंह, पूर्व राज्यपाल माता प्रसाद, विधायक सीमा द्विवेदी, टीडी कालेज प्रबंधक अशोक सिंह, प्राचार्य डा. यूपी सिंह, प्रो. कीर्ति सिंह, डा. लालजी त्रिपाठी, डा. आरपी ओझा, शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष डा. राजीव प्रकाश सिंह, डा. विजय प्रताप तिवारी, प्रो. वीके सिंह, प्रो. बीडी तिवारी, प्रो. डीडी दुबे, डा. मानस पांडेय, प्रो. रामजी लाल, डा. एके श्रीवास्तव, पूविवि कर्मचारी संघ के अध्यक्ष अमलदार यादव आदि मौजूद थे। संचालन डा. एचसी पुरोहित ने किया।
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उन्होंने स्नातकों, परास्नातकों और शोध उपाधि धारकों के साथ जीवन आसान बनाने वाले कई अनुभवों को भी साझा किया। कहा कि 18वें दीक्षांत समारोह के साथ ही पूर्वांचल विश्वविद्यालय वयस्क हो गया है और अब इसे नई छलांग लगाने के लिए तैयार रहना चाहिए।
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राज्यपाल ने उपाधि धारकों से कहा कि डिग्री लेने के साथ भले ही आप लोगों की विद्यालयीय शिक्षा संपन्न हो रहे हों, लेकिन जीवन में हर क्षण शिक्षा ग्रहण करने की प्रवृत्ति न छोड़ें। समारोह की अध्यक्षता कर रहे राज्यपाल ने अपने भाषण की शुरुआत में सऊदी अरब के राजा अब्दुल्ला के निधन पर शोक संवेदना प्रकट कर की। उन्होंने कहा कि उनके निधन पर केंद्र सरकार ने एक दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है।
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हालांकि साथ ही उन्होंने वसंत पंचमी के अवसर पर होने वाले दीक्षांत समारोह के सुखद संयोग का भी जिक्र किया। राज्यपाल ने चिंता जताते हुए कहा कि देश में 700 विश्वविद्यालय हैं, लेकिन दुनिया के सर्वश्रेष्ठ 200 विश्वविद्यालयों में देश का एक भी विश्वविद्यालय शुमार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि इस फेहरिस्त में पूविवि भी शामिल हो, हमें इसका संकल्प लेना होगा।
कहा कि छात्र-छात्राओं को पढ़ाई के साथ-साथ व्यक्तित्व विकास पर भी ध्यान देना चाहिए। समारोह में कुलाधिपति ने 51 टापरों को गोल्ड मेडल दिए। दीक्षांत समारोह में 400 स्नातकों, परास्नातकों और शोधार्थियों को उपाधि दी गई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वैज्ञानिक और नीति आयोग के सदस्य डा. वीके सारस्वत ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी की विभिन्न विधाओं में मजबूती के साथ आगे बढ़ते भारत की तस्वीर पेश की।
उन्होंने कहा कि हर क्षेत्र में भारत एक चैंपियन के रूप में सामने आ रहा है। उन्होंने अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और उसकी चुनौतियाें पर विस्तार से चर्चा की। कहा कि रक्षा प्रणाली और अन्य विधाओं के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का विकास बेहद जरूरी है। उन्होंने महात्मा गांधी के उस कथन को भी रेखांकित किया, जिसमें उन्होंने कहा है कि हम क्या कर सकते हैं और हममें क्या करने की क्षमता है, इसकी समझ ही दुनिया की कई समस्याओं का समाधान कर सकती है। कुलपति प्रो. पीयूष रंजन अग्रवाल ने स्वागत भाषण के बाद उपाधिधारकों को दीक्षा ग्रहण कराई।
इस मौके पर कुलसचिव डा. वीके पांडेय, वित्त अधिकारी अमरचंद, परीक्षा नियंत्रक संजय मल्ल, मंडलायुक्त राजेंद्र मोहन श्रीवास्तव, पूर्व सांसद कमला प्रसाद सिंह, पूर्व राज्यपाल माता प्रसाद, विधायक सीमा द्विवेदी, टीडी कालेज प्रबंधक अशोक सिंह, प्राचार्य डा. यूपी सिंह, प्रो. कीर्ति सिंह, डा. लालजी त्रिपाठी, डा. आरपी ओझा, शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष डा. राजीव प्रकाश सिंह, डा. विजय प्रताप तिवारी, प्रो. वीके सिंह, प्रो. बीडी तिवारी, प्रो. डीडी दुबे, डा. मानस पांडेय, प्रो. रामजी लाल, डा. एके श्रीवास्तव, पूविवि कर्मचारी संघ के अध्यक्ष अमलदार यादव आदि मौजूद थे। संचालन डा. एचसी पुरोहित ने किया।