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केराकत स्कूल वैन हादसा : मां की गोद हुई सूनी, बहनों की आंखों के सामने छिन गया भाई
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केराकत मौत -मृतक रोटी बिलखती माँ। संवाद
केराकत। सुबह तक आरव की किलकारियों से घर गुलजार था। मां ज्योति ने बेटे को दूध पिलाया था। वह घर के सामने खेल रहा था। दोनों बड़ी बहनें माही और प्राची स्कूल जाने के लिए उसी स्कूल वैन में बैठ चुकी थीं लेकिन कुछ ही पलों में सब कुछ बदल गया। खेलते-खेलते आरव स्कूल वैन के पास पहुंचा और अगले पहिये की चपेट में आ गया। बहनों की आंखों के सामने उनका छोटा भाई हमेशा के लिए उनसे दूर हो गया।
परिजनों का आरोप है कि हादसे के समय चालक मोबाइल पर बात कर रहा था। हादसे के बाद से मां ज्योति बेसूध पड़ी हैं। कभी आरव को पुकारतीं तो कभी उसे गोद में लेने के लिए हाथ बढ़ातीं। परिजन उन्हें संभालने की कोशिश करते रहे लेकिन बेटे को खोने का दर्द उनकी हर कोशिश पर भारी पड़ रहा था। वहीं, माही और प्राची की आंखों के सामने बार-बार हादसे का वही दृश्य घूम रहा था। सुबह उठते ही कभी वह बड़े पिता संतोष के कमरे में पहुंच जाता था तो कभी किसी दूसरे चाचा के पास।
बच्चों को स्कूल जाने के बाद दुकान जाने वाले थे पिता
मृतक आरव के पिता सुनील पान की दुकान चलाते हैं। रोज की तरह मंगलवार की सुबह दोनों बेटियों को स्कूल भेजने के बाद वह दुकान जाने की तैयारी में थे। स्कूल वाहन घर के सामने पहुंची तो माही और प्राची उसमें बैठ गईं। इसी दौरान आरव भी उनके पास पहुंच गया। बेटे की मौत के बाद से पिता सदमे में हैं।
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गांव में सन्नाटा
आरव सिर्फ परिवार का ही नहीं, आसपास के लोगों का भी दुलारा था। उसकी मौत की खबर मिलते ही पचवर गांव में सन्नाटा पसर गया है। घर पर जुटे ग्रामीण परिजनों को ढाढ़स बंधाते रहे। मां और बहनों का विलाप सुनकर उन्हें सांत्वना देने पहुंचे लोगों की भी आंखें भर आईं।
16 दिसंबर को था जन्मदिन
परिजनों ने बताया कि आरव का जन्मदिन 16 दिसंबर को था। माता-पिता को क्या पता था कि जन्मदिन आने से पहले ही उनके इकलौता बेटा उनसे हमेशा के लिए छिन जाएगा। जिस घर में कुछ महीने बाद जन्मदिन की खुशियां मननी थीं, मंगलवार को उसी घर में मातम था।
स्कूल से शोक जताने तक कोई नहीं पहुंचा
बड़े पिता संतोष का आरोप है कि हादसे के बाद स्कूल की ओर से शोक जताने के लिए भी कोई मौके पर नहीं पहुंचा। इससे परिवार के लोगों में नाराजगी है। परिजनों का कहना है कि मासूम की जान चली गई लेकिन स्कूल प्रबंधन की ओर से परिवार का दुख बांटने के लिए संवेदना जताने तक कोई नहीं आया।
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परिजनों का आरोप है कि हादसे के समय चालक मोबाइल पर बात कर रहा था। हादसे के बाद से मां ज्योति बेसूध पड़ी हैं। कभी आरव को पुकारतीं तो कभी उसे गोद में लेने के लिए हाथ बढ़ातीं। परिजन उन्हें संभालने की कोशिश करते रहे लेकिन बेटे को खोने का दर्द उनकी हर कोशिश पर भारी पड़ रहा था। वहीं, माही और प्राची की आंखों के सामने बार-बार हादसे का वही दृश्य घूम रहा था। सुबह उठते ही कभी वह बड़े पिता संतोष के कमरे में पहुंच जाता था तो कभी किसी दूसरे चाचा के पास।
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बच्चों को स्कूल जाने के बाद दुकान जाने वाले थे पिता
मृतक आरव के पिता सुनील पान की दुकान चलाते हैं। रोज की तरह मंगलवार की सुबह दोनों बेटियों को स्कूल भेजने के बाद वह दुकान जाने की तैयारी में थे। स्कूल वाहन घर के सामने पहुंची तो माही और प्राची उसमें बैठ गईं। इसी दौरान आरव भी उनके पास पहुंच गया। बेटे की मौत के बाद से पिता सदमे में हैं।
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गांव में सन्नाटा
आरव सिर्फ परिवार का ही नहीं, आसपास के लोगों का भी दुलारा था। उसकी मौत की खबर मिलते ही पचवर गांव में सन्नाटा पसर गया है। घर पर जुटे ग्रामीण परिजनों को ढाढ़स बंधाते रहे। मां और बहनों का विलाप सुनकर उन्हें सांत्वना देने पहुंचे लोगों की भी आंखें भर आईं।
16 दिसंबर को था जन्मदिन
परिजनों ने बताया कि आरव का जन्मदिन 16 दिसंबर को था। माता-पिता को क्या पता था कि जन्मदिन आने से पहले ही उनके इकलौता बेटा उनसे हमेशा के लिए छिन जाएगा। जिस घर में कुछ महीने बाद जन्मदिन की खुशियां मननी थीं, मंगलवार को उसी घर में मातम था।
स्कूल से शोक जताने तक कोई नहीं पहुंचा
बड़े पिता संतोष का आरोप है कि हादसे के बाद स्कूल की ओर से शोक जताने के लिए भी कोई मौके पर नहीं पहुंचा। इससे परिवार के लोगों में नाराजगी है। परिजनों का कहना है कि मासूम की जान चली गई लेकिन स्कूल प्रबंधन की ओर से परिवार का दुख बांटने के लिए संवेदना जताने तक कोई नहीं आया।