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Jivitputrika Vrat 2023: संतान को दीर्घायु के लिए शुक्रवार को होगा जीवित्पुत्रिका व्रत, जानें कब से हुई शुरुआत?

Thu, 05 Oct 2023 01:10 PM IST
किरन रौतेला न्यूज डेस्क,अमर उजाला, जौनपुर
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, जौनपुर Published by: किरन रौतेला Updated Thu, 05 Oct 2023 01:10 PM IST
सार

व्रत विधान का विधान बताते हुए डॉ.टीपी त्रिपाठी कहते हैं कि व्रत के दिन स्नान आदि से निवृत होकर  भगवान सूर्यनारायण की प्रतिमा को स्नान करा कर गंध,पुष्प, अक्षत, धूप, दीप आदि से उनकी पूजा की जाती है।

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Jivitputrika Vrat 2023: Jivitputrika Vrat will be observed on Friday for the long life of children, know when
जीवित्पुत्रिका पर्व पर पूजन करतीं महिलाएं।

विस्तार

आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को पुत्रवती महिलाएं अपने पुत्र के दीर्घायु होने  के लिए जीवित्पुत्रिका व्रत करती हैं। इस वर्ष यह व्रत 6 अक्टूबर शुक्रवार को होगा। 

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ज्योतिषाचार्य डॉ शैलेश मोदनवाल के अनुसार यह व्रत संतान को बला एवं कष्टों से बचाता है और उनको दीर्घायु प्रदान करता है। ऐसी कथा है कि इस व्रत के प्रभाव से अमोघ अस्त्र से उत्तरा के गर्भ में पल रहे अश्वत्थामा की रक्षा हुई थी और परीक्षित को जीवनदान मिला था। तभी से यह व्रत जीवित्पुत्रिका के नाम से विख्यात हुआ।
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व्रत विधान का विधान बताते हुए डॉ.टीपी त्रिपाठी कहते हैं कि व्रत के दिन स्नान आदि से निवृत होकर  भगवान सूर्यनारायण की प्रतिमा को स्नान करा कर गंध,पुष्प, अक्षत, धूप, दीप आदि से उनकी पूजा की जाती है। बाजरे व चने से बना भोग अर्पित किया जाता है। इस दिन स्त्रियां उड़द के कुछ साबुत दाने निगलती हैं जिसका प्रयोजन भगवान श्री कृष्ण के सूक्ष्म रूप को उदर में प्रवेश माना जाता है।कर्मकांड के विद्वान पं0मुरारी श्याम पांडेय के अनुसार इस दिन गेहूं तथा उड़द की दान का विशेष महत्व है। ब्राह्मण को भोजन भी कराया जाता है और उन्हें दान दक्षिणा देते है।व्रती महिलाएं अपने पुत्रों के गले में काले अथवा लाल रंग के रक्षा सूत्र या धागे को पहनाती है। 24 घंटे के उपवास के बाद दूसरे दिन ब्रह्म बेला में दही चूड़े का भोग लगाकर उसका कुछ भाग पशु पक्षियों को देने के बाद प्रसाद के रूप में ग्रहण करती हैं।

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