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रुपहले पर्दे को भाने लगी जौनपुर की माटी
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जौनपुर। लाइट, कैमरा, एक्शन...जैसे शब्द बड़े शहरों में तो अक्सर सुने जाते हैं। वहां शूटिंग होते रहना आम है। मगर अब जौनपुर में भी यह चलन तेजी से बढ़ रहा है। अब तक इत्र, इमरती और मक्का, मूली के लिए चर्चित जौनपुर रुपहले पर्दे पर भी बुलंद होने लगा है। यहां के ऐतिहासिक, धार्मिक रमणीय स्थल और गंवई परिवेश फिल्म निर्माताओं को खूब भा रहे हैं। तभी तो पिछले चार माह में यहां तीन भोजपुरी फिल्मों की शूटिंग पूरी हो चुकी है। जल्द ही कई अन्य फिल्में भी शुरू होने वाली हैं। फिल्म निर्माताओं का यहां बढ़ता रुझान न सिर्फ स्थानीय कलाकारों को नई ऊर्जा दे रहा है, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी बढ़ा रहा।
नब्बे के दशक में राजश्री प्रोडक्शन के बैनर तले बनी सुपरहिट फिल्म नदिया के पार ने पहली बार जौनपुर को रुपहले पर्दे पर प्रदर्शित किया था। चंदन और गुंजा के प्रेम ने इस फिल्म के जरिए करोड़ों दिलों में अपनी छाप छोड़ी। गोमती नदी के तट पर बसे राजेपुर गांव की फिजां में आज भी वह उमंग महसूस होती है। इस सुपरहिट फिल्म के बाद लंबे समय तक जौनपुर में ऐसी गतिविधियां लगभग ठप रहीं। बीच-बीच में कुछ फिल्में जरूर बनती रहीं, लेकिन उनका कोई खास प्रभाव नहीं बन पाया।
अब यूपी में नई फिल्म सिटी बनाने और गोरखपुर के आसपास भोजपुरी फिल्मों के लिए केंद्र बनाने की सरकार की पहल के बाद अचानक फिल्म निर्माताओं का रुझान जौनपुर की ओर बढ़ा है। कोरोना काल में अनलॉक के बाद से यहां जोया खान की सिंघासन, आम्रपाली दुबे की पूर्वा और रविकिशन, पवन सिंह के अभिनय वाले मेरा भारत महान जैसे तीन बड़े फिल्मों की शूटिंग हो चुकी है। बनारसी बाबू के अलावा अवधी में एक भी फिल्म की शूटिंग चल रही है। कुछ अन्य भोजपुरी फिल्में भी यहां पाइप लाइन में हैं।
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यह फिल्में भी बनीं
पिछले कुछ वर्षों के दौरान यहां एक दर्जन से अधिक फिल्में बनी हैं। इसमें होगी प्यार की जीत, करुवा बाबा, नौटंकी, गंगा के पार सइयां हमार, गार्जियन, हमका ऐसा वैसा न समझा, भगवान हाजिर हों, बेटवा बाहुबली, जौनपुर हुजूर, जिला जौनपुर, जान तेरे नाम, गजब का प्यार आदि हैं।
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कला, संस्कृति से शुरू से रहा है जुड़ाव
शिक्षा, कला और संस्कृति से जौनपुर का शुरू से गहरा लगाव रहा है। शर्की काल में यहां संगीत और साहित्य का खूब विकास हुआ। शिराज-ए-हिंद का उपनाम भी इन्हीं खूबियों से मिला है। राग जौनपुरी संगीत में यहां की पहचान रही। वामिक जौनपुरी, रुप नारायण त्रिपाठी, श्रीपाल सिंह क्षेम जैसे साहित्यकारों ने जिले का मान बढ़ाया। अब रविकिशन जौनपुर की पहचान बनकर बॉलीवुड में धूम मचा रहे हैं।
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उत्साहित हैं कलाकार, खुल रहे रोजगार के नए द्वार
फिल्म निर्माण की ओर रुझान बढ़ने से यहां के स्थानीय कलाकार काफी उत्साहित हैं। गांव, घर छोड़कर बाहर जाने में अक्षम यह कलाकार अब तक उपेक्षित महसूस कर रहे थे, मगर अब उनमें अलग उत्साह है। उन्हें घर में ही काम और नाम दोनों मिल रहा। एक्टर आशीष माली का कहना है कि जौनपुर में शुरू से ही प्रतिभाओं की भरमार रही, लेकिन उन्हें बेहतर मौका नहीं मिल पा रहा था। अब कलाकारों का भाग्योदय होने की उम्मीद है।
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इसलिए आ रहे निर्माता
पूर्वांचल में बनारस के बाद जौनपुर सबसे प्राचीन शहरों में एक है। 14वीं शताब्दी में ही इसे फिरोजशाह तुगलक ने सुव्यवस्थित तरीके से बसाया था, तब आसपास के अधिकांश जिले अस्तित्व में भी नहीं थे। तुगलक, शर्की, मुगल और ब्रिटिश काल की यहां कई ऐतिहासिक धरोहरे हैं, जो फिल्म निर्माताओं को आकर्षित कर रही हैं। इसके अलावा यह क्षेत्र हिंदी, भोजपुरी, अवधि तीनों के केंद्र में भी है। लिहाजा पूर्वी यूपी और बिहार की काफी संस्कृति यहां मिलती है। बड़े शहरों की अपेक्षा यहां सुविधाएं भी कम खर्चे में उपलब्ध हैं।
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मल्हनी की चुनावी सभा में मुख्यमंत्री ने मुझसे कहा था कि यहां के लिए भी फिल्म बनाऊं। मेरा भारत महान से इसकी शुरुआत हुई है। आगे भी यहां फिल्में बनाने का प्रयास होगा। जौनपुर में पर्याप्त शूटिंग लोकेशन है, यहां अच्छा माहौल है। गांव और शहर दोनों का स्वरूप यहां मिलता है। इन सबके अलावा जौनपुर मेरी जन्मभूमि हैं। मैं इसका कर्जदार हूं। इसे आगे बढ़ाने के लिए हमेशा प्रयास करुंगा। सरकार भी पूर्वांचल में फिल्म बनाने के लिए प्रोत्साहन दे रही है। -रविकिशन, फिल्म अभिनेता व सांसद गोरखपुर।
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पूर्वांचल में फिल्मों की शूटिंग के लिहाज से जौनपुर काफी उपयुक्त जगह है। बनारस में भीड़ और वहां शहरी कल्चर अधिक है। जौनपुर में दोनों का लुक है। इसके अलावा यहां सुविधाएं सस्ती हैं। लोगों का सहयोग भी बेहतर है। शाही किला, शाही पुल सहित कई ऐतिहासिक व धार्मिक स्थल भी शूटिंग के लिए अच्छे लोकेशन हैं। सरकार का भी प्रोत्साहन मिल रहा है। -राजेश राय, फिल्म निर्माता।
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नब्बे के दशक में राजश्री प्रोडक्शन के बैनर तले बनी सुपरहिट फिल्म नदिया के पार ने पहली बार जौनपुर को रुपहले पर्दे पर प्रदर्शित किया था। चंदन और गुंजा के प्रेम ने इस फिल्म के जरिए करोड़ों दिलों में अपनी छाप छोड़ी। गोमती नदी के तट पर बसे राजेपुर गांव की फिजां में आज भी वह उमंग महसूस होती है। इस सुपरहिट फिल्म के बाद लंबे समय तक जौनपुर में ऐसी गतिविधियां लगभग ठप रहीं। बीच-बीच में कुछ फिल्में जरूर बनती रहीं, लेकिन उनका कोई खास प्रभाव नहीं बन पाया।
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अब यूपी में नई फिल्म सिटी बनाने और गोरखपुर के आसपास भोजपुरी फिल्मों के लिए केंद्र बनाने की सरकार की पहल के बाद अचानक फिल्म निर्माताओं का रुझान जौनपुर की ओर बढ़ा है। कोरोना काल में अनलॉक के बाद से यहां जोया खान की सिंघासन, आम्रपाली दुबे की पूर्वा और रविकिशन, पवन सिंह के अभिनय वाले मेरा भारत महान जैसे तीन बड़े फिल्मों की शूटिंग हो चुकी है। बनारसी बाबू के अलावा अवधी में एक भी फिल्म की शूटिंग चल रही है। कुछ अन्य भोजपुरी फिल्में भी यहां पाइप लाइन में हैं।
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यह फिल्में भी बनीं
पिछले कुछ वर्षों के दौरान यहां एक दर्जन से अधिक फिल्में बनी हैं। इसमें होगी प्यार की जीत, करुवा बाबा, नौटंकी, गंगा के पार सइयां हमार, गार्जियन, हमका ऐसा वैसा न समझा, भगवान हाजिर हों, बेटवा बाहुबली, जौनपुर हुजूर, जिला जौनपुर, जान तेरे नाम, गजब का प्यार आदि हैं।
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कला, संस्कृति से शुरू से रहा है जुड़ाव
शिक्षा, कला और संस्कृति से जौनपुर का शुरू से गहरा लगाव रहा है। शर्की काल में यहां संगीत और साहित्य का खूब विकास हुआ। शिराज-ए-हिंद का उपनाम भी इन्हीं खूबियों से मिला है। राग जौनपुरी संगीत में यहां की पहचान रही। वामिक जौनपुरी, रुप नारायण त्रिपाठी, श्रीपाल सिंह क्षेम जैसे साहित्यकारों ने जिले का मान बढ़ाया। अब रविकिशन जौनपुर की पहचान बनकर बॉलीवुड में धूम मचा रहे हैं।
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उत्साहित हैं कलाकार, खुल रहे रोजगार के नए द्वार
फिल्म निर्माण की ओर रुझान बढ़ने से यहां के स्थानीय कलाकार काफी उत्साहित हैं। गांव, घर छोड़कर बाहर जाने में अक्षम यह कलाकार अब तक उपेक्षित महसूस कर रहे थे, मगर अब उनमें अलग उत्साह है। उन्हें घर में ही काम और नाम दोनों मिल रहा। एक्टर आशीष माली का कहना है कि जौनपुर में शुरू से ही प्रतिभाओं की भरमार रही, लेकिन उन्हें बेहतर मौका नहीं मिल पा रहा था। अब कलाकारों का भाग्योदय होने की उम्मीद है।
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इसलिए आ रहे निर्माता
पूर्वांचल में बनारस के बाद जौनपुर सबसे प्राचीन शहरों में एक है। 14वीं शताब्दी में ही इसे फिरोजशाह तुगलक ने सुव्यवस्थित तरीके से बसाया था, तब आसपास के अधिकांश जिले अस्तित्व में भी नहीं थे। तुगलक, शर्की, मुगल और ब्रिटिश काल की यहां कई ऐतिहासिक धरोहरे हैं, जो फिल्म निर्माताओं को आकर्षित कर रही हैं। इसके अलावा यह क्षेत्र हिंदी, भोजपुरी, अवधि तीनों के केंद्र में भी है। लिहाजा पूर्वी यूपी और बिहार की काफी संस्कृति यहां मिलती है। बड़े शहरों की अपेक्षा यहां सुविधाएं भी कम खर्चे में उपलब्ध हैं।
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मल्हनी की चुनावी सभा में मुख्यमंत्री ने मुझसे कहा था कि यहां के लिए भी फिल्म बनाऊं। मेरा भारत महान से इसकी शुरुआत हुई है। आगे भी यहां फिल्में बनाने का प्रयास होगा। जौनपुर में पर्याप्त शूटिंग लोकेशन है, यहां अच्छा माहौल है। गांव और शहर दोनों का स्वरूप यहां मिलता है। इन सबके अलावा जौनपुर मेरी जन्मभूमि हैं। मैं इसका कर्जदार हूं। इसे आगे बढ़ाने के लिए हमेशा प्रयास करुंगा। सरकार भी पूर्वांचल में फिल्म बनाने के लिए प्रोत्साहन दे रही है। -रविकिशन, फिल्म अभिनेता व सांसद गोरखपुर।
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पूर्वांचल में फिल्मों की शूटिंग के लिहाज से जौनपुर काफी उपयुक्त जगह है। बनारस में भीड़ और वहां शहरी कल्चर अधिक है। जौनपुर में दोनों का लुक है। इसके अलावा यहां सुविधाएं सस्ती हैं। लोगों का सहयोग भी बेहतर है। शाही किला, शाही पुल सहित कई ऐतिहासिक व धार्मिक स्थल भी शूटिंग के लिए अच्छे लोकेशन हैं। सरकार का भी प्रोत्साहन मिल रहा है। -राजेश राय, फिल्म निर्माता।