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जनता को गुमराह कर रहे जल निगम के अधिकारी
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जौनपुर। शहर की सीवरेज व्यवस्था सुधारने के लिए सीवर लाइन बिछाने और एसटीपी निर्माण की परियोजना कार्यदाई संस्था जलनिगम के मनमानी की भेंट चढ़ती दिख रही है। स्वच्छ गोमती अभियान का दावा है कि डिजाइन में खामी का हवाला देकर दो माह पहले सीवर लाइन बिछाने का काम रोकने का दावा करने वाले अफसरों ने बिना किसी संशोधन के फिर से उसी आधार पर काम शुरू करा दिया है। जब उसमें खामी थी तो बिना संशोधन वह कैसे सही हो गया।
गोमती नदी को स्वच्छ बनाने और उसमें गिरने वाले शहर के सभी छोटे-बड़े नालों के पानी को साफ करने के मकसद से नमामी गंगे परियोजना के तहत 205 करोड़ रुपये मंजूर हुए हैं। इस धनराशि से शहर में सीवर लाइन बिछना और पचहटिया में एसटीपी का निर्माण होना है। अक्टूबर में एसटीपी निर्माण का काम शुरू करा दिया गया था। जनवरी में सीवर लाइन बिछाने का काम शुरू हुआ, फिर अचानक यह कहते हुए रोक दिया गया कि डिजाइन में कुछ दिक्कतें हैं। उसमें सुधार के लिए उसे एमएनआईटी प्रयागराज को भेजा गया है। इसके बाद से लॉक डाउन लागू हो गया। निगम के अफसर फिर से उसी डिजाइन पर काम करा रहे हैं। ऐसे में उनकी कार्यप्रणाली पर तमाम त्र्तरह के सवाल उठ रहे हैं। स्वच्छ गोमती अभियान के संयोजक गौतम गुप्ता का कहना है कि एसटीपी में तमाम तरह की खामियां हैं, जिसे लेकर कोर्ट में याचिका दायर की गई है। इससे सिर्फ अपनी गर्दन बचाने के लिए अफसरों ने काम रोकने की बात कह लोगों को गुमराह किया था। दरअसल, उन्होंने न काम रोका और न ही एमएनआईटी में कोई संशोधन प्रस्ताव भेजा था। शासन के निर्देशों में स्पष्ट उल्लेख है कि प्रोजेक्ट में कोई गड़बड़ी पाई जाती है तो उसमें संशोधन के लिए उच्चाधिकारियों से लिखित अनुमति लेनी होगी, जबकि मौके पर ऐसा कुछ नहीं किया गया। जलनिगम के अफसर अपनी मनमानी से इस परियोजना का बंटाधार करने में लगे हैं। इस बाबत एक्सईएन सुनील कुमार का कहना है कि लॉक डाउन के कारण कुछ दिनों तक काम बंद था, जिसे शासन के निर्देशों के अनुरुप शुरू करा दिया गया है।
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गोमती नदी को स्वच्छ बनाने और उसमें गिरने वाले शहर के सभी छोटे-बड़े नालों के पानी को साफ करने के मकसद से नमामी गंगे परियोजना के तहत 205 करोड़ रुपये मंजूर हुए हैं। इस धनराशि से शहर में सीवर लाइन बिछना और पचहटिया में एसटीपी का निर्माण होना है। अक्टूबर में एसटीपी निर्माण का काम शुरू करा दिया गया था। जनवरी में सीवर लाइन बिछाने का काम शुरू हुआ, फिर अचानक यह कहते हुए रोक दिया गया कि डिजाइन में कुछ दिक्कतें हैं। उसमें सुधार के लिए उसे एमएनआईटी प्रयागराज को भेजा गया है। इसके बाद से लॉक डाउन लागू हो गया। निगम के अफसर फिर से उसी डिजाइन पर काम करा रहे हैं। ऐसे में उनकी कार्यप्रणाली पर तमाम त्र्तरह के सवाल उठ रहे हैं। स्वच्छ गोमती अभियान के संयोजक गौतम गुप्ता का कहना है कि एसटीपी में तमाम तरह की खामियां हैं, जिसे लेकर कोर्ट में याचिका दायर की गई है। इससे सिर्फ अपनी गर्दन बचाने के लिए अफसरों ने काम रोकने की बात कह लोगों को गुमराह किया था। दरअसल, उन्होंने न काम रोका और न ही एमएनआईटी में कोई संशोधन प्रस्ताव भेजा था। शासन के निर्देशों में स्पष्ट उल्लेख है कि प्रोजेक्ट में कोई गड़बड़ी पाई जाती है तो उसमें संशोधन के लिए उच्चाधिकारियों से लिखित अनुमति लेनी होगी, जबकि मौके पर ऐसा कुछ नहीं किया गया। जलनिगम के अफसर अपनी मनमानी से इस परियोजना का बंटाधार करने में लगे हैं। इस बाबत एक्सईएन सुनील कुमार का कहना है कि लॉक डाउन के कारण कुछ दिनों तक काम बंद था, जिसे शासन के निर्देशों के अनुरुप शुरू करा दिया गया है।
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