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जौनपुर: अवैध कॉलोनी को नहीं मिलेगा बिजली-पानी कनेक्शन
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जौनपुर। अगर आप शहर या इसके आसपास के गांवों में मकान बनाने के लिए जमीन खरीदने जा रहे हैं तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। अब नई कॉलोनियां बसाना आसान नहीं होगा। अवैध प्लाटिंग पर अंकुश लगाने के लिए प्रशासन ने कवायद शुरू कर दी है। विनियमित क्षेत्र के दायरे में आने वाले शहर समेत 241 राजस्व गांवों में प्लॉटिंग से पहले मास्टर प्लान से मानचित्र स्वीकृत कराना अनिवार्य होगा। इसकी अनदेखी पर कानूनी कार्रवाई तो होगी ही, साथ में सड़क, बिजली-पानी जैसी किसी जनसुविधा का लाभ भी उन्हें नहीं मिलेगा। सभी हलका लेखपालों को इस पर निगरानी रखने की जिम्मेदारी दी गई है। अगर ऐसे मामलों को चिह्नित करने में वह लापरवाही करेंगे तो उन पर भी कार्रवाई होगी।
शहर का दायरा तेजी से बढ़ता जा रहा है। दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों से आकर लोग शहर में बसने को लालायित हैं। वह आसपास जमीन ढूंढ रहे हैं। शहरी क्षेत्र में जमीन उपलब्ध न होने पर आसपास से सटे गांवों में पहुंच रहे हैं। प्लाटिंग के कारोबार से जुड़े लोग इसका लाभ उठाते हुए नए-नए क्षेत्रों में कॉलोनी बनाकर छोटे-छोटे प्लाट बेचकर मालामाल हो रहे हैं। प्लाट बिकते ही वह अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ लेते हैं। बाद में इसका खामियाजा मकान बनवाने वालों को भुगतना पड़ता है। सड़क, पानी, नाली जैसी जनसुविधा न होने से वह गांव से भी बदतर हाल में रहने को विवश होते हैं। वह कभी नगर पालिका के चक्कर काटते हैं तो कभी तहसील व जिला प्रशासन के सामने माथा पीटते हैं। राजस्व रिकार्ड में कॉलोनी स्वीकृत न होने के कारण अफसर भी आश्वासन की घुट्टी देकर टाल देते हैं।
पिछले कुछ वर्षों में ऐसी शिकायतें तेजी से बढ़ी है। प्रापर्टी डीलर की कारस्तानी से कॉलोनी में रहने वालों को तो दिक्कत है ही, शासन-प्रशासन को भी फजीहत झेलनी पड़ रही है। बेतरतीब ढंग से बढ़ते शहर के सुनियोजित विकास के लिए अब डीएम ने कड़े कदम उठाए हैं। इसके तहत मास्टर प्लान की स्वीकृति के बिना कोई भी कॉलोनी न बसाने का निर्देश दिया है। अगर इन क्षेत्रों में कोई मनमाने ढंग से प्लाटिंग करता भी है तो उसे सड़क-नाली तो दूर बिजली, पानी का कनेक्शन भी नहीं दिया जाएगा। इसकी निगरानी के लिए सिटी मजिस्ट्रेट के नेतृत्व में तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गई है। इस कमेटी में मास्टर प्लान के जेई के अलावा सभी हलका लेखपाल हैं। उन्हें अपने क्षेत्र में होने वाले अवैध निर्माण की सूचना देनी होगी। उस निर्माण पर अवैध होने की नोटिस चस्पा कराई जाएगी। फिर कानूनी कार्रवाई भी होगी।
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शहर समेत 241 राजस्व गांवों में होगा पालन
नए निर्देश सिर्फ शहर या उसके आसपास के कुछ गांवों में ही नहीं, बल्कि विनियमित क्षेत्र में समाहित सभी 241 गांवों में लागू होगा। इसमें जफराबाद व कजगांव नगर पंचायत के अलावा सिरकोनी, बक्शा, धर्मापुर, करंजाकला और सिकरारा ब्लाक के दर्जनों गांव भी इसमें शामिल हैं। इन ग्रामीण क्षेत्रों में ही अवैध प्लाटिंग का खेल जोरों पर है। नए आदेश से इस पर अंकुश लगने की संभावना जताई जा रही है।
लकड़ी के सहारे तार खींचकर अब नहीं जलेगी बिजली
मास्टर प्लान की अनुमति पर ही कॉलोनी बसाने का नियम तो पहले से भी है, मगर कोई भी इस पर ध्यान नहीं देता। सस्ती जमीन खरीदने की चाह में लोग बिना किसी छानबीन के बैनामा करा लेते हैं। तब प्लाटिंग करने वाले लकड़ी के पोल के सहारे दूर से तार खींचकर बिजली की सुविधा होने का झांसा देते हैं। खरीदारों को कहा जाता है कि कॉलोनी बसने के बाद सब सुविधा हो जाएगी, लेकिन बाद में वह पल्ला झाड़ लेते हैं। मजबूरन लोग कनेक्शन लेकर दूर से तार अपने घर तक लाते हैं। अब इस पर सख्ती से अंकुश लगेगा। अगर कोई जमीन खरीदता भी है तो उसे तब तक कनेक्शन भी नहीं दिया जाएगा, जब तक कॉलोनी स्वीकृत न हो।
सुनियोजित विकास को मिलेगी गति
इस नई कवायद से सबसे बड़ा लाभ भी खरीदारों को है। कोई भी नई कॉलोनी व्यवस्थित ही बनेगी। वहां न्यूनतम जनसुविधाएं उपलब्ध कराने के बाद ही प्लाट की बिक्री हो सकेगी। खास बात यह कि इन कॉलोनियों में संकरी गलियां नहीं होगी। अच्छी चौड़ी सड़क होगी। सीवर, बिजली, पानी का भी इंतजाम पहले से तय होगा।
इसलिए नहीं लेते अनुमति
प्लाटिंग का काम करने वालों का कॉलोनी का ले आउट स्वीकृत कराने में दिलचस्पी न लेने के कई कारण हैं। सबसे प्रमुख कारण रास्ते की जमीन में कटौती का है। अधिकृत कॉलोनी में न्यूनतम 30 फीट की सड़क होनी अनिवार्य है। ज्यादातर कॉलोनी में दस से 15 फीट की सड़क देकर प्लाट बना दिए जाते हैं। इसके अलावा कृषि भूमि पर प्लाट बनाने से पहले भूमि का स्वरूप (नवैइत) भी बदलवाना जरुरी है, जो टेढ़ी प्रक्रिया है। इसके बदले शुल्क भी देना पड़ता है।
शहर में बसी पंजाबी कॉलोनी ही स्वीकृत
विनियमित क्षेत्र के अभिलेखों पर गौर करें तो सिर्फ पंजाबी कॉलोनी ही तय मानचित्र के आधार पर विकसित की गई है। अन्य किसी भी कॉलोनी में मानक का पालन नहीं हुआ है। इनकी संख्या दो दर्जन से ज्यादा है। लिहाजा उनके मानचित्र को मास्टर प्लान से अनुमति भी नहीं मिली है। यह बात दीगर है कि सीमा विस्तार के साथ उन कॉलोनियों को भी नगर पालिका का हिस्सा मान लिया गया। रिकार्ड में वहां पहले से ही आबादी का जिक्र करते हुए उन्हें शहर में शामिल किया गया है। अब यह प्रक्रिया नहीं होगी।
विनियमित क्षेत्र के दायरे में आने वाले शहर समेत 241 राजस्व गांवों में नई कॉलोनी बसाने से पहले उसका ले आउट स्वीकृत कराना अनिवार्य होगा। बिना इसके ही कोई प्लाटिंग करता है तो उस पर कार्रवाई होगी। संबंधित प्लॉट पर अवैध होने की नोटिस चस्पा होगी और तब तक उन्हें सड़क, नाली की सुविधा बिजली, पानी का कनेक्शन भी नहीं दिया जाएगा। ऐसे अवैध कॉलोनियों की सूची तैयार कराई जा रही है। सुनियोजित विकास के लिए यह कदम उठाया गया है। -रोहन यादव, जेई, विनियमित क्षेत्र।
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शहर का दायरा तेजी से बढ़ता जा रहा है। दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों से आकर लोग शहर में बसने को लालायित हैं। वह आसपास जमीन ढूंढ रहे हैं। शहरी क्षेत्र में जमीन उपलब्ध न होने पर आसपास से सटे गांवों में पहुंच रहे हैं। प्लाटिंग के कारोबार से जुड़े लोग इसका लाभ उठाते हुए नए-नए क्षेत्रों में कॉलोनी बनाकर छोटे-छोटे प्लाट बेचकर मालामाल हो रहे हैं। प्लाट बिकते ही वह अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ लेते हैं। बाद में इसका खामियाजा मकान बनवाने वालों को भुगतना पड़ता है। सड़क, पानी, नाली जैसी जनसुविधा न होने से वह गांव से भी बदतर हाल में रहने को विवश होते हैं। वह कभी नगर पालिका के चक्कर काटते हैं तो कभी तहसील व जिला प्रशासन के सामने माथा पीटते हैं। राजस्व रिकार्ड में कॉलोनी स्वीकृत न होने के कारण अफसर भी आश्वासन की घुट्टी देकर टाल देते हैं।
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पिछले कुछ वर्षों में ऐसी शिकायतें तेजी से बढ़ी है। प्रापर्टी डीलर की कारस्तानी से कॉलोनी में रहने वालों को तो दिक्कत है ही, शासन-प्रशासन को भी फजीहत झेलनी पड़ रही है। बेतरतीब ढंग से बढ़ते शहर के सुनियोजित विकास के लिए अब डीएम ने कड़े कदम उठाए हैं। इसके तहत मास्टर प्लान की स्वीकृति के बिना कोई भी कॉलोनी न बसाने का निर्देश दिया है। अगर इन क्षेत्रों में कोई मनमाने ढंग से प्लाटिंग करता भी है तो उसे सड़क-नाली तो दूर बिजली, पानी का कनेक्शन भी नहीं दिया जाएगा। इसकी निगरानी के लिए सिटी मजिस्ट्रेट के नेतृत्व में तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गई है। इस कमेटी में मास्टर प्लान के जेई के अलावा सभी हलका लेखपाल हैं। उन्हें अपने क्षेत्र में होने वाले अवैध निर्माण की सूचना देनी होगी। उस निर्माण पर अवैध होने की नोटिस चस्पा कराई जाएगी। फिर कानूनी कार्रवाई भी होगी।
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शहर समेत 241 राजस्व गांवों में होगा पालन
नए निर्देश सिर्फ शहर या उसके आसपास के कुछ गांवों में ही नहीं, बल्कि विनियमित क्षेत्र में समाहित सभी 241 गांवों में लागू होगा। इसमें जफराबाद व कजगांव नगर पंचायत के अलावा सिरकोनी, बक्शा, धर्मापुर, करंजाकला और सिकरारा ब्लाक के दर्जनों गांव भी इसमें शामिल हैं। इन ग्रामीण क्षेत्रों में ही अवैध प्लाटिंग का खेल जोरों पर है। नए आदेश से इस पर अंकुश लगने की संभावना जताई जा रही है।
लकड़ी के सहारे तार खींचकर अब नहीं जलेगी बिजली
मास्टर प्लान की अनुमति पर ही कॉलोनी बसाने का नियम तो पहले से भी है, मगर कोई भी इस पर ध्यान नहीं देता। सस्ती जमीन खरीदने की चाह में लोग बिना किसी छानबीन के बैनामा करा लेते हैं। तब प्लाटिंग करने वाले लकड़ी के पोल के सहारे दूर से तार खींचकर बिजली की सुविधा होने का झांसा देते हैं। खरीदारों को कहा जाता है कि कॉलोनी बसने के बाद सब सुविधा हो जाएगी, लेकिन बाद में वह पल्ला झाड़ लेते हैं। मजबूरन लोग कनेक्शन लेकर दूर से तार अपने घर तक लाते हैं। अब इस पर सख्ती से अंकुश लगेगा। अगर कोई जमीन खरीदता भी है तो उसे तब तक कनेक्शन भी नहीं दिया जाएगा, जब तक कॉलोनी स्वीकृत न हो।
सुनियोजित विकास को मिलेगी गति
इस नई कवायद से सबसे बड़ा लाभ भी खरीदारों को है। कोई भी नई कॉलोनी व्यवस्थित ही बनेगी। वहां न्यूनतम जनसुविधाएं उपलब्ध कराने के बाद ही प्लाट की बिक्री हो सकेगी। खास बात यह कि इन कॉलोनियों में संकरी गलियां नहीं होगी। अच्छी चौड़ी सड़क होगी। सीवर, बिजली, पानी का भी इंतजाम पहले से तय होगा।
इसलिए नहीं लेते अनुमति
प्लाटिंग का काम करने वालों का कॉलोनी का ले आउट स्वीकृत कराने में दिलचस्पी न लेने के कई कारण हैं। सबसे प्रमुख कारण रास्ते की जमीन में कटौती का है। अधिकृत कॉलोनी में न्यूनतम 30 फीट की सड़क होनी अनिवार्य है। ज्यादातर कॉलोनी में दस से 15 फीट की सड़क देकर प्लाट बना दिए जाते हैं। इसके अलावा कृषि भूमि पर प्लाट बनाने से पहले भूमि का स्वरूप (नवैइत) भी बदलवाना जरुरी है, जो टेढ़ी प्रक्रिया है। इसके बदले शुल्क भी देना पड़ता है।
शहर में बसी पंजाबी कॉलोनी ही स्वीकृत
विनियमित क्षेत्र के अभिलेखों पर गौर करें तो सिर्फ पंजाबी कॉलोनी ही तय मानचित्र के आधार पर विकसित की गई है। अन्य किसी भी कॉलोनी में मानक का पालन नहीं हुआ है। इनकी संख्या दो दर्जन से ज्यादा है। लिहाजा उनके मानचित्र को मास्टर प्लान से अनुमति भी नहीं मिली है। यह बात दीगर है कि सीमा विस्तार के साथ उन कॉलोनियों को भी नगर पालिका का हिस्सा मान लिया गया। रिकार्ड में वहां पहले से ही आबादी का जिक्र करते हुए उन्हें शहर में शामिल किया गया है। अब यह प्रक्रिया नहीं होगी।
विनियमित क्षेत्र के दायरे में आने वाले शहर समेत 241 राजस्व गांवों में नई कॉलोनी बसाने से पहले उसका ले आउट स्वीकृत कराना अनिवार्य होगा। बिना इसके ही कोई प्लाटिंग करता है तो उस पर कार्रवाई होगी। संबंधित प्लॉट पर अवैध होने की नोटिस चस्पा होगी और तब तक उन्हें सड़क, नाली की सुविधा बिजली, पानी का कनेक्शन भी नहीं दिया जाएगा। ऐसे अवैध कॉलोनियों की सूची तैयार कराई जा रही है। सुनियोजित विकास के लिए यह कदम उठाया गया है। -रोहन यादव, जेई, विनियमित क्षेत्र।