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छाई हाेली की खुमारी
ब्यूरो/अमर उजाला, जौनपुर
Updated Tue, 22 Mar 2016 11:29 PM IST
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मंगलवार को नगर के कोतवाली चौराहे के पास अबीर गुलाल खरीदते बच्चे।
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होली का उत्साह एक दिन पहले ही जिले भ्ार में छा गया है। पर्व की तिथि को लेकर ऊहापोह के बीच लोग मंगलवार से ही रंगों में रंगे नजर आने लगे। बुध्ावार को होलिका दहन की तैयारियों में बच्चों की टोली जुटी रही। बुजुर्ग लोग परंपराओं को बच्चों के बीच बांटते नजर आए।
होली के त्योहार पर लोग महानगरों से अपने घरों को आ रहे हैं। यात्रियों के भीड़ का आलम यह है कि भेड़ -बकरियों की तरह भर कर यात्रा करते दिखाई दे रहे हैं। यह हाल पिछले एक हफ्ते से चल रहा है। मंगलवार ट्रेन में जगह नहीं मिलने पर विवश हो यात्री बसों में चढ़ अपने गंतव्य तक पहुंच रहे हैं।
होली मनाने के लिए ट्रेन और बस दोनों में चढ़ लोगों की भीड़ महानगरों से जिले में आ रही है। होली के त्योहार के मद्देनजर बाजारों में भी कपड़े सहित अन्य दूकानों पर खरीद्दारों की भीड़ उमड़ रही है। कहीं से भी होली के मौके पर इस साल बाजार की रौनक गायब थी लेकिन पर्व के नजदीक आते ही रौनक छा गई। आम तौर पर देखा जा रहा था कि होली के सप्ताह भर पहले से ही बाजारों में भीड़ भाड़ बढ़ जाती थी इसके पीछे कारोबार से जुड़े लोग अलग कारण मानते हैं।
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रेडीमेड व्यवसायी सुरेंद्र सिंघानियां ने कहा कि माल संस्कृति और आनलाइन मार्केटिंग ने धंधे को मंदा किया है। रंग कारोबारी रत्तीलाल का भी यही मानना है। मिठाई व्यवसायी फिरतूराम कहते हैं कि हर बार की अपेक्षा इस बार ग्राहकों की संख्या में कमी आई है। इसका एक कारण किसानों बदहाली भी है।
कपड़ा व्यवसायी विक्की उपाध्याय का कहना है कि पहले लोग त्योहार के समय में ही कपड़ों आदि की खरीददारी करते थे लेकिन अब ऐसी बात नहीं है।
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होली के त्योहार पर लोग महानगरों से अपने घरों को आ रहे हैं। यात्रियों के भीड़ का आलम यह है कि भेड़ -बकरियों की तरह भर कर यात्रा करते दिखाई दे रहे हैं। यह हाल पिछले एक हफ्ते से चल रहा है। मंगलवार ट्रेन में जगह नहीं मिलने पर विवश हो यात्री बसों में चढ़ अपने गंतव्य तक पहुंच रहे हैं।
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होली मनाने के लिए ट्रेन और बस दोनों में चढ़ लोगों की भीड़ महानगरों से जिले में आ रही है। होली के त्योहार के मद्देनजर बाजारों में भी कपड़े सहित अन्य दूकानों पर खरीद्दारों की भीड़ उमड़ रही है। कहीं से भी होली के मौके पर इस साल बाजार की रौनक गायब थी लेकिन पर्व के नजदीक आते ही रौनक छा गई। आम तौर पर देखा जा रहा था कि होली के सप्ताह भर पहले से ही बाजारों में भीड़ भाड़ बढ़ जाती थी इसके पीछे कारोबार से जुड़े लोग अलग कारण मानते हैं।
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रेडीमेड व्यवसायी सुरेंद्र सिंघानियां ने कहा कि माल संस्कृति और आनलाइन मार्केटिंग ने धंधे को मंदा किया है। रंग कारोबारी रत्तीलाल का भी यही मानना है। मिठाई व्यवसायी फिरतूराम कहते हैं कि हर बार की अपेक्षा इस बार ग्राहकों की संख्या में कमी आई है। इसका एक कारण किसानों बदहाली भी है।
कपड़ा व्यवसायी विक्की उपाध्याय का कहना है कि पहले लोग त्योहार के समय में ही कपड़ों आदि की खरीददारी करते थे लेकिन अब ऐसी बात नहीं है।