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तेज बारिश से गेहूं के बोझ भींगे, प्याज-लहसुन को भी क्षति

Mon, 27 Apr 2020 09:18 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 27 Apr 2020 09:18 PM IST
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Heavy rains make wheat burdens, onion-garlic damage
01- मौसम ने बदला मिजाज आज आसमान में सूरज के साथ कुछ इस तरह से अठखेली करता रहा बादल। - फोटो : JAUNPUR
जौनपुर। बेमौसम हुई बरसात ने किसानों की मुश्किल बढ़ा दी है। रविवार की रात आंधी के साथ हुई बारिश ने खेतों में कटकर रखे गेहूं के बोझ को भिगो दिया है। खुले आसमान के नीचे रखा भूसा भी भीग गया है। अरहर, आम, प्याज और लहसुन की फसल को भी बारिश ने नुकसान पहुंचाया है। क्रय केंद्रों पर गेहूं भीगने की सूचना है। कई इलाकों में पेड़ गिरने और तार टूटने से बिजली व्यवस्था ध्वस्त हो गई।
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रविवार की आधी रात में तेज हवा के साथ बारिश शुरू हो गई। गरज-चमक के साथ करीब आधे घंटे तक हुई बरसात से फाल्ट के चलते नईगंज उपकेंद्र से जुड़े पॉलीटेक्निक चौराहा, सिटी स्टेशन रोड, नईगंज, रुहट्टा सहित कई क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति ठप हो गई। जेसीज, सिविल लाइंस, पुरानी बाजार, कोतवाली क्षेत्र में भी आंधी-पानी से बिजली व्यवस्था बाधित हुई। सुबह बिजली निगम के कर्मी फाल्ट सुधारकर आपूर्ति बहाल करने में जुटे रहे। उधर, ग्रामीण क्षेत्रों में बारिश से प्याज, लहसुन और सब्जी की फसलों को नुकसान पहुंचा है। ज्यादातर क्षेत्रों में गेहूं की कटाई पूरी हो चुकी है, लेकिन बोझ अभी खेतों में ही पड़े थे। बारिश के कारण गेहूं के बोझ भीग गए है। पशुओं के चारे के लिए तैयार भूसा खुले आसमान में ही पड़े होने के कारण पानी से भींग गया। बची हुई मात्रा को किसान सुखाने और सहेजने में जुटे हैं। कृषि विज्ञान केंद्र बक्शा के मौसम वैज्ञानिक डॉ. पंकज जायसवाल ने बताया कि करीब आठ एमएम की वर्षा रिकार्ड की गई है। गेहूं की 70 फीसदी कटाई-मड़ाई का कार्य पूरा हो चुका है। अवशेष 30 फीसदी फसल पर बारिश का असर पड़ा है। इसके अलावा आम के छोटे फल आंधी के कारण झड़ गए हैं। 17 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाओं का प्रवाह रहा।
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आंधी-पानी से टिकोरे गिरे, छप्पर उड़े
केराकत/बरईपार। पहले आंधी और फिर बरसात ने घरों पर लगे छप्पर, टीनशेड उखड़ गए। किसानों के खेतों में रखी फसल भी भींग गई। कटाई-मड़ाई बाधित हुई है। आम के पेड़ से टिकोरे जमीन पर गिर जाने से बागवानों में भी चिता की लकीरें खिंच गई है। दो दिन से शाम को तेज आंधी मध्य रात्रि में बरसात से किसान परेशान हैं। उधर, खाली खेतों में किसान ढैंचा, बजरी आदि की बुवाई में भी जुट गए हैं। मौसम ठंडा होने से लोगों को गर्मी से निजात मिली है।
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