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टावरों के संचालन को लेकर दो पक्षों में तनीं बंदूकें

Wed, 01 Sep 2021 11:35 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 01 Sep 2021 11:35 PM IST
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Guns drawn in two sides for the operation of towers
जिले के अलग अलग इलाकों में स्थापित संचार कंपनी के 31 टावर पर कब्जा करने के विवाद को लेकर बुधवार को सरायख्वाजा थाना क्षेत्र के जासोपुर चकिया गांव के पास दो पक्ष आमने सामने हो गए। असलहों के साथ दोनों पक्ष से पचास से अधिक लोग आमने-सामने हो गए। हालात को देखते हुए सर्किल के सभी थानों की फोर्स बुला ली गई। पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में देर तक चली पंचायत में तय हुआ कि दोनों पत्र शुक्रवार को कंपनी के कार्यालय में जाएंगे और वहीं पर अपना विवाद सुलझाएंगे।
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एक संचार कंपनी ने जिले के अलग अलग इलाकों में स्थापित 31 टावरों के संचालन के लिए एक स्थानीय फर्म के साथ करार किया था। आरोप है कि करार की समय सीमा समाप्त होने पर कंपनी ने किसी दूसरी फर्म से करार कर लिया। जबकि पहले से टावर की देखरेख करने वाली फर्म के मालिक का दावा है कि जबतक कंपनी उनका सवा करोड़ का बकाया भुगतान नहीं करेगी तबतक वह टावर पर किसी को भी फटकने नहीं देंगे। इस मामले को लेकर दोनों फर्म के मालिकों के बीच पिछले सप्ताह एक प्रभावशाली नेता के घर पंचायत भी हो चुकी है। शुक्रवार को नया अनुबंध कराने वाली फर्म के कुछ लोग पूर्वांचल विश्वविद्यालय की बाउंड्री से लगे जासोपुर चकियां गांव के टावर पर कब्जा करने पहुंचे तो दूसरे पक्ष के लोग भी पहुंच गए। देखते ही देखते दोनों पक्षों से दर्जनों चारपहिया वाहन से 50 से अधिक की संख्या में असलहाधारी भी पहुंच गए। इसकी भनक लगते ही सरायख्वाजा थानाध्यक्ष जगदीश कुशवाहा पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुुलिस के सामने भी लोग एक दूसरे को देख लेने की धमकी देने लगे। मामला नाजुक होता देख उच्च अधिकारियों को सूचना दी गई। सूचना पर बक्शा, सिकरारा, खेतासराय, समेत सर्किल के अन्य थानों की पुलिस पहुंच गए। सीओ रणविजय सिंह भी मौके पर पहुंचे। दोपहर से शुरू हुआ यह हाईप्रोफाइल ड्रामा शाम छह बजे इस शर्त पर समाप्त हुआ कि अब दोनों पक्ष संचार कंपनी के कार्यालय में जाएंगे वहीं अपने लेनदेन का विवाद को सुलझाएंगे। एएसपी ग्रामीण त्रिभुवन सिंह का कहना है कि संचार कंपनी का जिस फर्म से करार हुआ था उसका करार खत्म होने पर कंपनी ने दसरी फर्म से अनुबंध कर लिया है। लेकिन पहली फर्म ने सवा करोड़ कंपनी पर बकाया होने का दावा करते हुए टावर को छोड़ने को तैयार नहीं है। इस विवाद को अब कंपनी के कार्यालय में सुलझाने की बात पर समझौता कराया गया है।
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