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गोमूत्र से बढ़ेगी गोशालाओं की आमदनी
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फसलों की सुरक्षा के लिए गोमूत्र का होगा उपयोग
अपर जिला कृषि अधिकारी बोले, गोशालाओं को गोमूत्र एकत्रित करने के लिए किया गया निर्देशित
संवाद न्यूज एजेंसी
जौनपुर। अब गो मूत्र एकत्र कर फसलों की सुरक्षा में उपयोग किया जाएगा। इसके लिए पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर गोशालाओं का चयन किया जाएगा। इन गोशालाओं में गोमूत्र एकत्रित करने की व्यवस्था की जाएगी। गोमूत्र को कीटनाशक दवाओं के रूप में तैयार किया जाएगा। इससे गोशालाओं की आमदनी बढ़ेगी।
इस संबंध में अपर जिला कृषि अधिकारी रमेश चंद्र यादव ने बताया कि गोआश्रय स्थलों पर गोमूत्र और गोबर एकत्र करने के लिए कहा गया है। गोमूत्र का उपयोग खेती में होगा। इससे खेती अच्छी होगी और मिट्टी की सेहत भी ठीक रहेगी। उन्होंने ने बताया कि गोमूत्र को कीटनाशक दवाओं के रूप में तैयार किया जाएगा। उसके बाद बोतल या गैलन में भरकर उसे खाद व बीज की दुकानों की माध्यम से बेचा जाएगा, उससे जो आय होगी वह गोशाला में रखे गोवंश पर खर्च की जाएगी। भारतीय नस्ल की देशी गायों के एक लीटर गोमूत्र को एकत्रित कर 40 लीटर पानी में घोलकर यदि दलहन-तिलहन सब्जी आदि के बीज को चार से छह घंटे भिगोकर खेत में बुआई की जाती है तो बीज का अंकुरण अच्छा और रोग रहित होता है। इसके अतिरिक्त बीज का जमाव जल्दी होता है।
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अपर जिला कृषि अधिकारी बोले, गोशालाओं को गोमूत्र एकत्रित करने के लिए किया गया निर्देशित
संवाद न्यूज एजेंसी
जौनपुर। अब गो मूत्र एकत्र कर फसलों की सुरक्षा में उपयोग किया जाएगा। इसके लिए पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर गोशालाओं का चयन किया जाएगा। इन गोशालाओं में गोमूत्र एकत्रित करने की व्यवस्था की जाएगी। गोमूत्र को कीटनाशक दवाओं के रूप में तैयार किया जाएगा। इससे गोशालाओं की आमदनी बढ़ेगी।
इस संबंध में अपर जिला कृषि अधिकारी रमेश चंद्र यादव ने बताया कि गोआश्रय स्थलों पर गोमूत्र और गोबर एकत्र करने के लिए कहा गया है। गोमूत्र का उपयोग खेती में होगा। इससे खेती अच्छी होगी और मिट्टी की सेहत भी ठीक रहेगी। उन्होंने ने बताया कि गोमूत्र को कीटनाशक दवाओं के रूप में तैयार किया जाएगा। उसके बाद बोतल या गैलन में भरकर उसे खाद व बीज की दुकानों की माध्यम से बेचा जाएगा, उससे जो आय होगी वह गोशाला में रखे गोवंश पर खर्च की जाएगी। भारतीय नस्ल की देशी गायों के एक लीटर गोमूत्र को एकत्रित कर 40 लीटर पानी में घोलकर यदि दलहन-तिलहन सब्जी आदि के बीज को चार से छह घंटे भिगोकर खेत में बुआई की जाती है तो बीज का अंकुरण अच्छा और रोग रहित होता है। इसके अतिरिक्त बीज का जमाव जल्दी होता है।
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