बदलापुर। अयोध्या से पधारे कथावाचक अनिलेश महराज ने कहा कि धरती पर जब अत्याचार बढ़ जाता है तो असुर पाप कर्मों से गाय, ब्राह्मणों और धरती को सताते हैं। तब धरती का पाप हरने के लिए प्रभु स्वयं अवतार लेते हैं। उन्होंने क्षेत्र के इनामीपुर गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में चौथे दिन श्रोताओं के बीच कथा में उन्होंने कहा कि जब-जब धरती पर धर्म की हानि होती है और अभिमानी असुर अनीति पर चलकर लोगों को सताते हैं तो धर्म की रक्षा एवं असुरों के उद्धार के लिए प्रभु अवतार लेते है। जहां कंस वध के लिए भगवान कृष्ण तो रावण वध के लिए प्रभु श्रीराम ने अवतार लिया था। उन्होंने कहा कि जब वसुदेव ने परमात्मा को गोद में लिया तो भव बंधन रूपी समस्त बेड़िया स्वतः खुल गईं। माया रूपी कन्या को लिया तो पुनः बेड़ी व हथकड़ी लग गई। इसका मतलब है कि परमात्मा की शरण में रहोगे तो संसार सागर से पार हो जाओगे और माया के चक्कर में रहोगे तो भव बंधन में फंसे रहोगे। उन्होंने कहा कि भक्ति पथ पर चलने के लिए ज्ञानी होना जरूरी नहीं है। अगर जरूरी है तो प्रभु के चरणों में अनुराग। कथा में यज्ञाचार्य योगेश राम त्रिपाठी, राम उजागिर तिवारी, डॉ. अनिल त्रिपाठी, डॉ. अनिरुद्ध तिवारी, अभिषेक तिवारी, दिनेश, विवेक, आनंद, मुकेश आदि उपस्थित रहे। आयोजक डॉ. सुरेश चंद्र तिवारी ने आभार ज्ञापित किया।