{"_id":"5dee9a698ebc3e87aa2c0b15","slug":"gauspir-dargah-gate-opened-to-see-darshan-jaunpur-news-vns498939796","type":"story","status":"publish","title_hn":"गौसपीर दरगाह का फाटक खुला दर्शन को उमड़ा सैलाब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गौसपीर दरगाह का फाटक खुला दर्शन को उमड़ा सैलाब
विज्ञापन
05- खुटहन के गौसपीर मेले में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़।
- फोटो : JAUNPUR
गौसपीर दरगाह का फाटक खुला, उमड़े जायरीन
संवाद न्यूज एजेंसी
खुटहन। दरबारे कादरिया गौसपीर दरगाह का फाटक रविवार की रात 11 बजकर 11 मिनट पर खुलते ही मत्था टेकने और मिन्नते मुरादे को जायरीनों का हुजूम उमड़ पड़ा। जायरीन गुस्ल का जल लेने को बेताब दिखे। इसी के साथ यहां का सालाना उर्स ( मेला) भी शुरू हो गया। यह उर्स प्रत्येक वर्ष रबी उस्सानी की ग्यारहवें से शुरू होकर सत्रह दिन तक चलता है।
जिला मुख्यालय से 30 किमी पश्चिम गौसपुर गांव स्थित दरगाह के बारे में कहावत है कि इजरत शाह मोहम्मद उमर व इजारत शाह नगीना दोनों भाई लगभग आठ सौ वर्ष पूर्व इजारत के लिए बगदाद शरीफ गए थे। जहां से उन दोनों ने एक ईंट लाया था। गौसपुर में रात्रि विश्राम के बाद उन्हे स्वप्न में बरसात हुई कि ईंट को इसी जगह एक रौजा की तामीर करके नस्ब कर दिया जाए। ताकि इस जमीन पर भी बगदाद शरीफ की तरह गौसपाक फैज का चश्मा जारी रहे। यही पाक ईंट दरगाह की गुंबद के भीतर छोटे से कुब्बे में नस्ब है। इसी कुब्बे का फाटक रवी उस्मानी की ग्यारहवें की रात जयरीनों को मत्था टेकने लिए खोला जाता है। दरगाह के दक्षिण तरफ हजरत शाह मोहम्मद उमर और शाह नगीना दोनो भाइयों की मजार बनी हुई है। यहां जायरीन चादर चढ़ाते है। दरगाह पर वार्षिक उर्स के अलावा भी प्रत्येक गुरूवार को अकीदतमंद पहुंचते है। मेले में आए रामकुमार चांदा सुल्तानपुर ने बताया कि वे 5 साल से लगातार आ रहे हैं। उन्हें कुष्ठ रोग हुआ है शहजाद पुर अंबेडकरनगर से आए जलालुद्दीन ने बताया कि उनकी पत्नी की तबीयत खराब रहती है। जमानिया गाजीपुर से आए रामलोचन गौतम ने बताया कि उनकी बेटी भूत प्रेत की बाधा से ग्रसित है इन सब का मानना है कि यहां दर्शन करने से सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं हिंदू भी यहां मत्था टेकने आते हैं। मेले की सुरक्षा हेतु एक प्लाटून पीएसी बल व शाहगंज, सरपतहा, खेतासराय और बदलापुर थाने की पुलिस फोर्स तैनात की गई है। दरगाह समिति के मुतवल्ली मोहम्मद मंसूर शाह, मोहम्मद असलम और मोहम्मद हारुन सहयोग में सहयोग में लगे हैं।
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
खुटहन। दरबारे कादरिया गौसपीर दरगाह का फाटक रविवार की रात 11 बजकर 11 मिनट पर खुलते ही मत्था टेकने और मिन्नते मुरादे को जायरीनों का हुजूम उमड़ पड़ा। जायरीन गुस्ल का जल लेने को बेताब दिखे। इसी के साथ यहां का सालाना उर्स ( मेला) भी शुरू हो गया। यह उर्स प्रत्येक वर्ष रबी उस्सानी की ग्यारहवें से शुरू होकर सत्रह दिन तक चलता है।
जिला मुख्यालय से 30 किमी पश्चिम गौसपुर गांव स्थित दरगाह के बारे में कहावत है कि इजरत शाह मोहम्मद उमर व इजारत शाह नगीना दोनों भाई लगभग आठ सौ वर्ष पूर्व इजारत के लिए बगदाद शरीफ गए थे। जहां से उन दोनों ने एक ईंट लाया था। गौसपुर में रात्रि विश्राम के बाद उन्हे स्वप्न में बरसात हुई कि ईंट को इसी जगह एक रौजा की तामीर करके नस्ब कर दिया जाए। ताकि इस जमीन पर भी बगदाद शरीफ की तरह गौसपाक फैज का चश्मा जारी रहे। यही पाक ईंट दरगाह की गुंबद के भीतर छोटे से कुब्बे में नस्ब है। इसी कुब्बे का फाटक रवी उस्मानी की ग्यारहवें की रात जयरीनों को मत्था टेकने लिए खोला जाता है। दरगाह के दक्षिण तरफ हजरत शाह मोहम्मद उमर और शाह नगीना दोनो भाइयों की मजार बनी हुई है। यहां जायरीन चादर चढ़ाते है। दरगाह पर वार्षिक उर्स के अलावा भी प्रत्येक गुरूवार को अकीदतमंद पहुंचते है। मेले में आए रामकुमार चांदा सुल्तानपुर ने बताया कि वे 5 साल से लगातार आ रहे हैं। उन्हें कुष्ठ रोग हुआ है शहजाद पुर अंबेडकरनगर से आए जलालुद्दीन ने बताया कि उनकी पत्नी की तबीयत खराब रहती है। जमानिया गाजीपुर से आए रामलोचन गौतम ने बताया कि उनकी बेटी भूत प्रेत की बाधा से ग्रसित है इन सब का मानना है कि यहां दर्शन करने से सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं हिंदू भी यहां मत्था टेकने आते हैं। मेले की सुरक्षा हेतु एक प्लाटून पीएसी बल व शाहगंज, सरपतहा, खेतासराय और बदलापुर थाने की पुलिस फोर्स तैनात की गई है। दरगाह समिति के मुतवल्ली मोहम्मद मंसूर शाह, मोहम्मद असलम और मोहम्मद हारुन सहयोग में सहयोग में लगे हैं।
विज्ञापन