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नवरात्र आज से, घरों में ही होंगे सभी अनुष्ठान

Tue, 24 Mar 2020 09:57 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 24 Mar 2020 09:57 PM IST
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From today onwards, all rituals will be held in homes
जौनपुर। चैत्र नवरात्र की शुरुआत बुधवार से हो रही है। इसकी तैयारियों में मंगलवार को लोग जुटे रहे। लॉक डाउन के चलते ज्यादातर लोगों ने एक दिन पहले ही नारियल-चुनरी सहित अन्य पूजन सामग्री की खरीददारी कर ली थी। मंगलवार को फलों की बिक्री अधिक हुई। इस बार नवरात्र में श्रद्धालुओं को मंदिरों में पूजन का सौभाग्य नहीं मिलेगा। कोरोना वायरस के कारण लॉक डाउन होने से सभी को घर में ही पूजन करना होगा।
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मां शीतला धाम चौकिया और परमानतपुर कालीकुत्ती स्थित मां मैहर मंदिर में नवरात्र पर दर्शन पूजन के लिए भक्तों की खासी भीड़ उमड़ती है। जिले के ही नहीं बल्कि पूर्वांचल के श्रद्धालुओं के लिए मां शीतला धाम चौकियां और मैहर मंदिर आस्था और विश्वास का केंद्र है, लेकिन इस बार दोनों मंदिर परिसर में नवरात्र को लेकर कोई उत्साह नहीं हैं। परिसर में दुकान लगाने वाले व्यापारी भी काफी मायूस हैं। इस बार उनका नवरात्र अच्छा नहीं बीतेगा। परिसर में माला फूल विक्रेताओं के साथ अन्य दुकानदारों में मायूसी है। दुकानदार हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।
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31 तक बंद रहेगा मैहर देवी मंदिर
जौनपुर। श्री शारदा शक्तिपीठ (मैहर देवी मंदिर) में 31 मार्च तक दर्शनार्थियों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। मंदिर में 25 मार्च से नवरात्र उत्सव में पूजा-पाठ सहित समस्त धार्मिक कार्यक्रम ट्रस्टियों की देखरेख में मंदिर प्रबंधन यथावत जारी रखेगा। शक्तिपीठ के प्रधान न्यासी महंत सूर्य प्रकाश जायसवाल ने बताया कि कोरोना वायरस के प्रकोप से फैल रही महामारी के खतरे से आम जनजीवन को बचाने के लिए हो रहे प्रयासों के तहत मंदिर ट्रस्ट की बैठक में यह निर्णय लिया गया है। कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए भीड़ न लगने देना और भीड़ का हिस्सा न बनना अत्यंत आवश्यक है।
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कलश स्थापना कर पूजन से मिलता है पूर्ण फल
मछलीशहर। पं मुरारी श्याम पांडेय कहते हैं कि नवरात्र में कलश की स्थापना का खास महत्व है। कलश-स्थापना के समय सभी देवी-देवताओं एवं तीर्थों का आह्वान कर पूजन किया जाता है। कलश पूजन से सभी देवी-देवताओं और तीर्थो की उपासना का फल प्राप्त होता है। पं.देवीप्रसाद मिश्र कहतें है कि नारियल को सुख, समृद्धि एवं ऐश्वर्य के रूप में जाना जाता है। यह यज्ञादि-अनुष्ठान को पूर्ण फल प्रदान करता है। डॉ.शैलेश मोदनवाल का कहना है कि इस वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि 25 मार्च बुधवार को 3 बजकर 50 मिनट तक ही है। कलश स्थापना विधान प्रतिपदा तिथि के भीतर प्रात:काल से प्रारंभ होकर दिन में 3 बजकर 50 मिनट के अंदर ही होना है। अभिजित मुहूर्त का समय दिन में 11बजकर 35मिनट से 12 बजकर 23 मिनट तक रहेगा। महाष्टमी बुधवार एक अप्रैल को होगी। जबकि महानवमी के साथ ही रामनवमी बृहस्पतिवार दो अप्रैल को मनाई जाएगी।
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