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Dhananjay Singh: बाहुबली धनंजय सिंह को पुलिस ने मुठभेड़ में मारने का किया था दावा, फिर तय किया संसद तक का सफर

Tue, 05 Mar 2024 06:46 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, जौनपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, जौनपुर। Published by: प्रगति चंद Updated Tue, 05 Mar 2024 06:46 PM IST
सार

Bahubali Dhananjay Singh: मुजफ्फरनगर निवासी अभिनव सिंघल के अपहरण केस में धनंजय सिंह दोषी करार हुए हैं। इसको लेकर पूर्व सांसद धनंजय सिंह एक बार फिर सुर्खियों में आ गए हैं। 

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Former MP Bahubali Dhananjay Singh journey from Encounter to Parliament
धनंजय सिंह - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

पूर्वांचल के बाहुबली व जौनपुर के पूर्व सांसद धनंजय सिंह एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं। मंगलवार को एमपी-एमएलए कोर्ट में पूर्व सांसद धनंजय सिंह व उनके सहयोगी संतोष विक्रम को दोषी ठहराया गया है। आइए जानते हैं बाहुबली धनंजय सिंह से जुड़ी कुछ खास बातें...

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पूर्व सांसद धनंजय सिंह की कहानी बिल्कुल फिल्मी है। पुलिस ने एक बार इन्हें एनकाउंटर में मारने का दावा किया था। बाद में धनंजय ने विधानसभा से लेकर संसद तक का सफर तय किया। इस बीच धनंजय के खिलाफ हत्या, रंगदारी, अपहरण जैसी गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज होते रहे।
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जौनपुर जिले के बनसफा में सामान्य परिवार में जन्मे धनंजय ने जौनपुर के टीडी कॉलेज से छात्र राजनीति की शुरुआत की। इसके बाद लखनऊ विश्विद्यालय में मंडल कमीशन का विरोध कर धनंजय ने अपनी छात्र राजनीति को धार दी। लखनऊ विश्विद्यालय में ही बाहुबली अभय सिंह के संपर्क में धनंजय आए और फिर हत्या, सरकारी ठेकों से वसूली, रंगदारी जैसे मुकदमों में नाम आने की वजह से धनंजय सुर्खियों में रहे। 1998 तक धनंजय का नाम लखनऊ से लेकर पूर्वांचल तक जरायम जगत में सुर्खियों में आ चुका था और उन पर पुलिस की ओर से 50 हजार का इनाम घोषित हो चुका था।
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अक्टूबर 1998 में पुलिस ने बताया कि 50 हजार के इनामी धनंजय सिंह तीन अन्य बदमाशों के साथ भदोही-मिर्जापुर रोड पर स्थित एक पेट्रोल पंप पर डकैती डालने आए थे। पुलिस ने दावा किया कि मुठभेड़ में धनंजय सहित चारों बदमाश मारे गए हैं। हालांकि धनंजय जिंदा थे और भूमिगत हो गए थे। फरवरी 1999 में धनंजय पुलिस के सामने पेश हुए तो भदोही की फर्जी मुठभेड़ का पर्दाफाश हुआ। धनंजय के जिंदा सामने आने पर मानवाधिकार आयोग ने जांच शुरू की और फर्जी मुठभेड़ में शामिल रहे 34 पुलिसकर्मियों पर मुकदमे दर्ज हुए।

पुराने बाहुबली दोस्त से अदावत पर बनारस में हुई गोलीबारी

2002 आते-आते धनंजय सिंह और उनके बाहुबली दोस्त अभय एक-दूसरे के खिलाफ हो गए। नतीजतन, अक्टूबर 2002 में बनारस से जा रहे धनंजय के काफिले पर नदेसर में टकसाल टॉकीज के सामने गोलीबारी हुई। नदेसर के लोगों ने देखा था कि दोनों तरफ से जमकर गोलियां चली थीं। इस गोलीबारी में धनंजय के गनर सहित चार लोग घायल हुए थे। प्रकरण को लेकर धनंजय ने कैंट थाने में अभय सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था।

बजरंगी के गुरू की तस्वीर लेकर धनंजय बने निर्दलीय विधायक
जौनपुर के लोग बताते हैं कि 2002 में जौनपुर में विनोद नाटे नाम के एक बाहुबली नेता हुआ करते थे। विनोद को कुख्यात मुन्ना बजरंगी का भी गुरू कहा जाता है। विनोद नाटे ने रारी विधानसभा से चुनाव जीतने के लिए खासी मेहनत की थी। इसी बीच सड़क दुर्घटना में विनोद की मौत हो गई। इसके बाद धनंजय ने विनोद की तस्वीर को अपनी राजनीति का सहारा बनाया और जगह-जगह उनका जिक्र कर लोगों की संवेदनाएं बटोरते हुए 2002 में वह रारी से निर्दलीय विधायक बने।

2007 में धनंजय ने जनता दल यूनाइटेड के विधायक के तौर पर जीत दर्ज की। 2008 में धनंजय बहुजन समाज पार्टी में शामिल हो गए और 2009 में बसपा के टिकट पर जौनपुर से सांसद चुने गए। 2011 में बसपा सुप्रीमो मायावती ने उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों में संलिप्त होने के आरोप में बाहर का रास्ता दिखा दिया।

2012 के विधानसभा चुनाव में धनंजय ने अपनी पूर्व पत्नी डॉ. जागृति को निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर मल्हनी से उतारा लेकिन वह हार गईं। 2014 में जौनपुर से लोकसभा और 2017 में मल्हनी सीट से निषाद पार्टी से विधानसभा चुनाव में धनंजय ने किस्मत आजमाई लेकिन सफलता नहीं मिली।

निजी जीवन रहा उथलपुथल भरा, तीन शादियां हुईं

धनंजय सिंह का निजी जीवन भी उथलपुथल भरा रहा और उन्होंने तीन शादियां कीं। उनकी पहली पत्नी ने शादी के नौ महीने बाद ही आत्महत्या कर ली थी। दूसरी पत्नी डॉ. जागृति सिंह घरेलू नौकरानी की हत्या के आरोप में नवंबर 2013 में गिरफ्तार हुई थीं। इस मामले में सबूत मिटाने के आरोप में धनंजय भी नामजद हुए थे। हालांकि बाद में जागृति से उनका तलाक हो गया। 2017 में धनंजय ने दक्षिण भारत के एक बड़े कारोबारी परिवार से ताल्लुक रखने वाली श्रीकला रेड्डी से पेरिस में तीसरी शादी रचाई।

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