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अरुणाचल प्रदेश के पूर्व राज्यपाल माता प्रसाद का निधन

Wed, 20 Jan 2021 11:47 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 20 Jan 2021 11:47 PM IST
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Former Arunachal Pradesh Governor Mata Prasad passed away
पूर्व राज्यपाल माता प्रसाद की फाईल फोटो। - फोटो : JAUNPUR
जौनपुर। अरुणाचल प्रदेश के पूर्व राज्यपाल, उत्तर प्रदेश के पूर्व राजस्व मंत्री व वयोवृद्ध कांग्रेस नेता माता प्रसाद का मंगलवार की देर रात निधन हो गया। वह 95 वर्ष के थे और लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे। पीजीआई लखनऊ में उन्होंने अंतिम सांस ली। राजनीति में सादगी और संघर्ष के उदाहरण माता प्रसाद के निधन की खबर मिलते ही जिले में शोक छा गया।
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जिले के मछलीशहर तहसील क्षेत्र के कजियाना मोहल्ले में 11 अक्तूबर 1925 को जन्मे माता प्रसाद बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी सक्रिय भागीदारी रही। बाबू जगजीवन राम को अपना आदर्श मानने वाले माता प्रसाद कांग्रेस में विभिन्न पदों पर रहे। वर्ष 1957 में वह पहली बार शाहगंज सुरक्षित सीट से विधायक चुने गए। वह 1974 तक लगातार पांच बार निर्वाचित हुए। इसके बाद 1980 से 92 तक लगातार 12 वर्ष विधान परिषद के सदस्य रहे। तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी की कैबिनेट में वर्ष 1988 से 1989 तक राजस्व मंत्री रहे। पूर्व प्रधानमंत्री नरसिंह राव की सरकार ने इन्हें अक्तूबर 1993 में अरुणाचल प्रदेश का राज्यपाल नियुक्त किया। करीब छह वर्षों तक इस पद पर रहने के बाद 1999 में वह सेवानिवृत्त हुए और इसी के साथ सक्रिय राजनीति से भी दूरी बना ली थी। राज्यपाल होने के बाद भी हमेशा सादगी भरा जीवन जीते रहे। हुसैनाबाद स्थित आवास से वह अक्सर पैदल या रिक्शे पर शहर में भ्रमण करते दिख जाते थे। माता प्रसाद की लेखन में विशेष रुचि रही। उनकी चालीस से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हुई है। कई नाटक, कविता, संस्मरण का भी उन्होंने लेखन किया। साहित्यिक पत्रिकाओं के संपादन से भी जुड़े रहे। उनकी अंतिम पुस्तक शीराज-ए-हिंद जौनपुर और उसकी विभूतियां पिछले वर्ष जनवरी में प्रकाशित हुई थी। तभी वह अंतिम बार हुसैनाबाद स्थित आवास पर आए थे। इसके बाद लॉक डाउन के कारण लगातार लखनऊ में ही प्रवास कर रहे थे। बड़े पुत्र केशव प्रसाद के मुताबिक बीमारी के कारण उन्हें मंगलवार को पीजीआई लखनऊ में भर्ती किया गया था। उपचार के दौरान रात करीब 12 बजे उनका निधन हो गया। लखनऊ के भैसाकुंड घाट पर राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार हुआ। बड़े पुत्र केशव प्रसाद ने मुखाग्नि दी।
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