{"_id":"5eac54df8ebc3e9069550c4d","slug":"first-prayers-offered-in-homes-jaunpur-news-vns5228910144","type":"story","status":"publish","title_hn":"घरों में पढ़ी गई पहले जुमे की नमाज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
घरों में पढ़ी गई पहले जुमे की नमाज
विज्ञापन
जौनपुर। माहे रमजान के पहले जुमे पर घरों में ही नमाज पढ़ी गई। रोजेदारों ने लॉक डाउन का पूरी तरह पालन किया। खुद को अल्लाह की इबादत में लीन करते हुए कोरोना के संक्रमण से अहले वतन को निजात दिलाने की दुआ की। रोजेदारों से गुलजार रहने वाली मस्जिद और उसके आसपास के इलाके में सन्नाटा पसरा रहा।
रमजान का महीना सब्र और इबादत का है। इस मुकद्दस महीने के जुमे पर रोजेदार मस्जिदों में नमाज करने से नहीं चूकते। इस बार कोरोना संक्रमण के कारण लॉक डाउन ने तमाम बंदिशें लगा रखी हैं। देश और समाज को सुरक्षित रखने के लिए इन बंदिशों का पालन करते हुए रोजेदारों ने घर में ही पूरी अकीदत से नमाज पढ़ी और इबादत की। आम दिनों में हर जुमे पर गुलजार रहने वाले शहर की ऐतिहासिक बड़ी मस्जिद, लाल दरवाजा मस्जिद, अटाला मस्जिद, शेर वाली मस्जिद, शाही किला की मस्जिद सहित अन्य इबादतगाहों पर सन्नाटा रहा। लोग लॉक डाउन के पालन के लिए सतर्क रहे। सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस भी चक्रमण करती रही।
फिजिकल डिस्टेंसिंग के साथ बच्चे कर रहे कुरान की तिलावत
केराकत। रमजान में मुस्लिम परिवार के बच्चे रोजा रखने के साथ नमाज और कुरान की तिलावत भी बड़े जोशो खरोश से कर रहे हैं। डेहरी गांव में शेख याहिया के घर के बच्चे फिजिकल डिस्टेंसिग का पालन करते हुए कुरान की तिलावत (पाठ) करते देखे जा रहे हैं। ओबैद गुफरान 10, जुबैदा गुफरान 9, आबिदा 7, शिफा लइक 8, रगद 9, नसेहा फैहान 9, सादिया रेहान 11 आदि रोजे की पाबंदियों का भी पालन कर रहे हैं। उनका कहना है कि रमजान के महीने में कुरान पढ़ने का बहुत बड़ा सवाब मिलता है। इसकी तिलावत से दिल को भी सुकून मिल रहा है।
विज्ञापन
सदका फितर अदा करना जरूरी
खेतासराय। रमजान के महीने में जकात के साथ सदका फितर निकालना भी जरूरी है। मदरसा अहले सुन्नत एजाजुल उलूम के मौलाना खालिद मिसबाही ने बताया कि बंदे का रोजा आसमान व जमीन के बीच में रुका रहता है, जब तक सदका फितर अदा न कर दिया जाए। सदका फितर ईद की नमाज से पूर्व अदा किया जा सकता है। यह एक तरह का दान है, जो जरुरतमंदों को दिया जाता है। मदरसा एजाजुल उलूम के नाजिम सैयद ताहिर ने बताया कि एक सदका फितर का मूल्य अच्छी क्वालिटी के 2 किलो 50 ग्राम गेहूं के मूल्य के बराबर होता है। वर्तमान में एक सदका फितर की कीमत 35 रुपये निर्धारित की गई है। इसे नगद और गेहूं दोनों रूप में दे सकते हैं।
विज्ञापन
रमजान का महीना सब्र और इबादत का है। इस मुकद्दस महीने के जुमे पर रोजेदार मस्जिदों में नमाज करने से नहीं चूकते। इस बार कोरोना संक्रमण के कारण लॉक डाउन ने तमाम बंदिशें लगा रखी हैं। देश और समाज को सुरक्षित रखने के लिए इन बंदिशों का पालन करते हुए रोजेदारों ने घर में ही पूरी अकीदत से नमाज पढ़ी और इबादत की। आम दिनों में हर जुमे पर गुलजार रहने वाले शहर की ऐतिहासिक बड़ी मस्जिद, लाल दरवाजा मस्जिद, अटाला मस्जिद, शेर वाली मस्जिद, शाही किला की मस्जिद सहित अन्य इबादतगाहों पर सन्नाटा रहा। लोग लॉक डाउन के पालन के लिए सतर्क रहे। सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस भी चक्रमण करती रही।
विज्ञापन
फिजिकल डिस्टेंसिंग के साथ बच्चे कर रहे कुरान की तिलावत
केराकत। रमजान में मुस्लिम परिवार के बच्चे रोजा रखने के साथ नमाज और कुरान की तिलावत भी बड़े जोशो खरोश से कर रहे हैं। डेहरी गांव में शेख याहिया के घर के बच्चे फिजिकल डिस्टेंसिग का पालन करते हुए कुरान की तिलावत (पाठ) करते देखे जा रहे हैं। ओबैद गुफरान 10, जुबैदा गुफरान 9, आबिदा 7, शिफा लइक 8, रगद 9, नसेहा फैहान 9, सादिया रेहान 11 आदि रोजे की पाबंदियों का भी पालन कर रहे हैं। उनका कहना है कि रमजान के महीने में कुरान पढ़ने का बहुत बड़ा सवाब मिलता है। इसकी तिलावत से दिल को भी सुकून मिल रहा है।
विज्ञापन
सदका फितर अदा करना जरूरी
खेतासराय। रमजान के महीने में जकात के साथ सदका फितर निकालना भी जरूरी है। मदरसा अहले सुन्नत एजाजुल उलूम के मौलाना खालिद मिसबाही ने बताया कि बंदे का रोजा आसमान व जमीन के बीच में रुका रहता है, जब तक सदका फितर अदा न कर दिया जाए। सदका फितर ईद की नमाज से पूर्व अदा किया जा सकता है। यह एक तरह का दान है, जो जरुरतमंदों को दिया जाता है। मदरसा एजाजुल उलूम के नाजिम सैयद ताहिर ने बताया कि एक सदका फितर का मूल्य अच्छी क्वालिटी के 2 किलो 50 ग्राम गेहूं के मूल्य के बराबर होता है। वर्तमान में एक सदका फितर की कीमत 35 रुपये निर्धारित की गई है। इसे नगद और गेहूं दोनों रूप में दे सकते हैं।