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ठूंस कर भर रहे सवारी, नहीं कर रहे सोशल डिस्टेंस का पालन
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सद्भावना पुल पर ई रिक्शा चलाता नाबालिग किशोर।
- फोटो : JAUNPUR
जौनपुर। कोरोना संक्रमण काल के बावजूद शहर में चल रहे आटो व ई रिक्शा में ठूंस कर सवारी भरे जा रही है। इसमें सोशल डिस्टेंस का पालन भी नहीं हो रहा। चौराहों व सड़क के बीच रोक कर सवारी भी बैठा रहे हैं। मनमाना किराया भी वसूल रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार सब कुछ देखते हुए भी आंखे मूंदे पड़े हैं।
कोरोना संक्रमण में सरकार ने 50 फीसदी सीटों वाहनों के संचालन की छूट दी है। शहर में कुल 1300 आटो व ई-रिक्शा चलते हैं। कम सवारी ढोने के नाम पर सवारियों से मनामना किराया भी वसूल रहे हैं। रेलवे स्टेशन से ओलंदगंज आने के लिए पहले 10 रुपया किराया लेते थे, अब 13 से 20 रुपये वसूल रहे हैं। इसी प्रकार कलेक्ट्रेट से सिपाह तक पहले पांच रुपया किराया लेते थे, लेकिन अब 10 रुपया वसूल रहे हैं। बावजूद इसके आटो व ई-रिक्शा चालक सवारियों को ठूंस-ठूंस कर बैठा रहे हैं। जिससे सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां भी उड़ रही हैं। वहीं हादसे का भी कारण बनते हैं। बावजूद इसके आटो व ई-रिक्शा में बञैठना लोगों की मजबूरी है। कारण ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोग प्राइवेट बसों से तो आ जाते हैं, लेकिन शहर में जाने के लिए उनके लिए साधन के नाम पर आटो व -ई-रिक्शा है। यह बसब कुछ चौराहों पर खड़े पुलिस के सामने होता है, लेकिन वे इस पर लगाम लगाना मुनासिब नहीं समझते हैं। जिससे आटो व ई-रिक्शा धड़ल्ले से कोरोना काल में मानक से अधिक सवारियां बैठाकर चल रहे हैं।
समय-समय पर अभियान चला कर कार्रवाई की जाती है। अगर आटो व ई-रिक्शा चालक मनमाना किराया वसूल रहे हैं और सोशल डिस्टेंस का पालन किए बिना सवारी बैठा रहे हैं तो इसकी जांच कराई जाएगी। दोषी पाए जाने वालों के विरुद्घ कार्रवाई की जाएगी। - एसपी सिंह, एआरटीओ प्रशासन
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कोरोना संक्रमण में सरकार ने 50 फीसदी सीटों वाहनों के संचालन की छूट दी है। शहर में कुल 1300 आटो व ई-रिक्शा चलते हैं। कम सवारी ढोने के नाम पर सवारियों से मनामना किराया भी वसूल रहे हैं। रेलवे स्टेशन से ओलंदगंज आने के लिए पहले 10 रुपया किराया लेते थे, अब 13 से 20 रुपये वसूल रहे हैं। इसी प्रकार कलेक्ट्रेट से सिपाह तक पहले पांच रुपया किराया लेते थे, लेकिन अब 10 रुपया वसूल रहे हैं। बावजूद इसके आटो व ई-रिक्शा चालक सवारियों को ठूंस-ठूंस कर बैठा रहे हैं। जिससे सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां भी उड़ रही हैं। वहीं हादसे का भी कारण बनते हैं। बावजूद इसके आटो व ई-रिक्शा में बञैठना लोगों की मजबूरी है। कारण ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोग प्राइवेट बसों से तो आ जाते हैं, लेकिन शहर में जाने के लिए उनके लिए साधन के नाम पर आटो व -ई-रिक्शा है। यह बसब कुछ चौराहों पर खड़े पुलिस के सामने होता है, लेकिन वे इस पर लगाम लगाना मुनासिब नहीं समझते हैं। जिससे आटो व ई-रिक्शा धड़ल्ले से कोरोना काल में मानक से अधिक सवारियां बैठाकर चल रहे हैं।
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समय-समय पर अभियान चला कर कार्रवाई की जाती है। अगर आटो व ई-रिक्शा चालक मनमाना किराया वसूल रहे हैं और सोशल डिस्टेंस का पालन किए बिना सवारी बैठा रहे हैं तो इसकी जांच कराई जाएगी। दोषी पाए जाने वालों के विरुद्घ कार्रवाई की जाएगी। - एसपी सिंह, एआरटीओ प्रशासन
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