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Jaunpur News: बिजली निगम की अधिकारियों पर मेहरबानी, आम लोग झेल रहे परेशानी
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जौनपुर। जिले में बिजली आपूर्ति की स्थिति बहुत खराब है। कहीं 6 घंटे तो कहीं आठ घंटे कटौती हो रही है। हालांकि इस समस्या से कलेक्ट्रेट क्षेत्र अछूता है। अधिकारियों के मोहल्ले में बिजली नहीं कट रही है। बहुत होता है तो 5-4 मिनट की ट्रिपिंग होती है।
बिजली आने का समय क्या है..? कटौती का कारण..? आदि सवालों के जवाब निगम के अभियंताओं के पास नहीं हैं। जौनपुर शहर में जहां जिलाधिकारी समेत तमाम आलाधिकारी व चिकित्सक रहते हैं, उन इलाकों में बिजली नहीं कटती है। दूसरी तरफ आम जनता के क्षेत्रों में नईगंज, कोतवाली, ओलंदगंज, सदर अस्पताल, भंडारी, कुत्तुपुर, कलीचाबाद, रुहट्टा, लइानबाजार, तारापुर कॉलोनी आदि जगह रोज दोपहर में एक से डेढ़ घंटे, रात में 11 बजे से 1 बजे और सुबह 6 बजे से 8 बजे तक नियमित कटौती हो रही है। हालांकि इस कटौती का स्पष्ट कारण निगम के पास नहीं है। पूरे शहर में ट्रिपिंग कभी भी हो जा रही है।
ग्रामीण क्षेत्रों में 13 घंटे की कटौती: ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति सबसे अधिक खराब है। बिजली आपूर्ति का कोई समय नहीं है। प्रतिदिन 12 से 13 घंटे की कटौती हो रही है। गांवों में जर्जर तार टूटने, ओवरलोडिंग से जंफर उड़ने, ट्रांसफाॅर्मर फुंकने आदि की प्रमुख समस्या है। इससे निजात दिलाने का काम निगम 48 से 72 घंटे में भी नहीं का पा रहा है।
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10 दिनों में फुंक चुके हैं 143 ट्रॉसफाॅर्मर: गर्मी के कारण ट्रांसफॉर्मर जलने की समस्या बढ़ गई है। शहर हो गांव जलने के बाद इन्हें बदलने में दो से तीन दिन लग जा रहे हैं। इसके बदले में शहरी क्षेत्रों में ट्राॅली ट्रांसफार्मर से आपूर्ति कराई जा रही है। वहीं, गांव के लोग इस समस्या से भी वंचित रह रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक गर्मी के चलते पिछले दस दिनों में 143 ट्रांसफाॅर्मर फुंक चुके हैं। वहीं 200 ट्रांसफाॅर्मरों की मरम्मत कराई गई। बिजली निगम का कहना है कि ओवरलोडिंग और गर्मी से ट्रांसफाॅर्मर फुंकने की समस्या आ रही है। हालांकि शिकायत मिलते ही ट्रांसफाॅर्मरों की मरम्मत कराई जा रही है। अब तक 200 ट्रांसफाॅर्मरों की मरम्मत कराई जा चुकी है।
गहराया पानी का संकट: पानी की व्यवस्था 90 फीसदी बिजली पर निर्भर हो गई है। बिजली है तो पानी मिलेगा नहीं है तो पानी नहीं मिलेगा। शहर या गांव में हो रही मनमानी कटौती के कारण सबसे बड़ी समस्या पानी की हो रही है।
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बिजली आने का समय क्या है..? कटौती का कारण..? आदि सवालों के जवाब निगम के अभियंताओं के पास नहीं हैं। जौनपुर शहर में जहां जिलाधिकारी समेत तमाम आलाधिकारी व चिकित्सक रहते हैं, उन इलाकों में बिजली नहीं कटती है। दूसरी तरफ आम जनता के क्षेत्रों में नईगंज, कोतवाली, ओलंदगंज, सदर अस्पताल, भंडारी, कुत्तुपुर, कलीचाबाद, रुहट्टा, लइानबाजार, तारापुर कॉलोनी आदि जगह रोज दोपहर में एक से डेढ़ घंटे, रात में 11 बजे से 1 बजे और सुबह 6 बजे से 8 बजे तक नियमित कटौती हो रही है। हालांकि इस कटौती का स्पष्ट कारण निगम के पास नहीं है। पूरे शहर में ट्रिपिंग कभी भी हो जा रही है।
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ग्रामीण क्षेत्रों में 13 घंटे की कटौती: ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति सबसे अधिक खराब है। बिजली आपूर्ति का कोई समय नहीं है। प्रतिदिन 12 से 13 घंटे की कटौती हो रही है। गांवों में जर्जर तार टूटने, ओवरलोडिंग से जंफर उड़ने, ट्रांसफाॅर्मर फुंकने आदि की प्रमुख समस्या है। इससे निजात दिलाने का काम निगम 48 से 72 घंटे में भी नहीं का पा रहा है।
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10 दिनों में फुंक चुके हैं 143 ट्रॉसफाॅर्मर: गर्मी के कारण ट्रांसफॉर्मर जलने की समस्या बढ़ गई है। शहर हो गांव जलने के बाद इन्हें बदलने में दो से तीन दिन लग जा रहे हैं। इसके बदले में शहरी क्षेत्रों में ट्राॅली ट्रांसफार्मर से आपूर्ति कराई जा रही है। वहीं, गांव के लोग इस समस्या से भी वंचित रह रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक गर्मी के चलते पिछले दस दिनों में 143 ट्रांसफाॅर्मर फुंक चुके हैं। वहीं 200 ट्रांसफाॅर्मरों की मरम्मत कराई गई। बिजली निगम का कहना है कि ओवरलोडिंग और गर्मी से ट्रांसफाॅर्मर फुंकने की समस्या आ रही है। हालांकि शिकायत मिलते ही ट्रांसफाॅर्मरों की मरम्मत कराई जा रही है। अब तक 200 ट्रांसफाॅर्मरों की मरम्मत कराई जा चुकी है।
गहराया पानी का संकट: पानी की व्यवस्था 90 फीसदी बिजली पर निर्भर हो गई है। बिजली है तो पानी मिलेगा नहीं है तो पानी नहीं मिलेगा। शहर या गांव में हो रही मनमानी कटौती के कारण सबसे बड़ी समस्या पानी की हो रही है।