{"_id":"62604b8c5bbbcb265a297c3c","slug":"djs-playing-on-kumbhakarniya-nidra-mein-sarkar-nak-also-till-late-night-jaunpur-news-vns649351891","type":"story","status":"publish","title_hn":"‘कुंभकर्णीय निद्रा में सरकार’,‘नाक’ पर भी बज रहे देर रात तक डीजे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
‘कुंभकर्णीय निद्रा में सरकार’,‘नाक’ पर भी बज रहे देर रात तक डीजे
विज्ञापन
जौनपुुर। ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण को लेकर कुछ साल पहले दिखाई गई सख्ती अब फाइलों में दब गई। वजह सरकार का इस ओर ध्यान नहीं हैं। इसके चलते शादी की खुशी में लोग इतने मगन हो जा रहे हैं की पूछिए मत। इन्हें न तो किसी की परेशानियों का ख्याल रहता है और न ही सुप्रीम कोर्ट के आदेश का डर। ये मनमानी करते हुए रात दस बजे के बाद तक खुलेआम ध्वनि विस्तारक यंत्रों की धुन पर थिरकते रहते हैं। आश्चर्य की बात तो यह कि कभी इसे लेकर सख्ती दिखाने वाले जिम्मेदार सब कुछ देखकर भी मौन साधे हुए हैं।
उच्च न्यायालय के आदेश के बाद साल 2016-17 में योगी आदित्यनाथ सरकार हरकत में आ गई थीं। धार्मिक स्थानों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर बिना अनुमति लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया था। सरकार की सख्ती के बाद प्रशासन भी खरगोश की चाल चला और करीब डेढ़ हजार धार्मिक स्थानों पर ध्वनि विस्तारक यंत्रों को लगाने की अनुमति प्रदान किया था। उस समय के तत्कालीन जिलाधिकारी ने प्रमुख सचिव गृह के पत्र का हवाला देते हुए इसे लेकर बैठक की थी। साथ ही सख्त चेतावनी दी था कि बिना अनुमति के शादी-विवाह जैसे आयोजनों में भी डीजे का उपयोग न किया जाए, लेकिन यह चेतावनी शादी के दौर शुरू होते ही मानों ठंडे बस्ते में डाल दी गई। अब तो इस आदेश को लेकर जिम्मेदार पूरी तरह से भूल गए हैं। नतीजतन गिने चुने लोगों को छोड़ दे तो भी सभी ने बिना अनुमति के अपने यहां आयोजनों में ध्वनि विस्तारक यंत्रों का प्रयोग किया, जो जारी भी है। इससे आने-जाने वाले लोगों, बच्चों और वृद्ध के साथ- साथ मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, किंतु जिम्मेदारों के कान पर जू नहीं रेंग रहा है।
विज्ञापन
उच्च न्यायालय के आदेश के बाद साल 2016-17 में योगी आदित्यनाथ सरकार हरकत में आ गई थीं। धार्मिक स्थानों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर बिना अनुमति लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया था। सरकार की सख्ती के बाद प्रशासन भी खरगोश की चाल चला और करीब डेढ़ हजार धार्मिक स्थानों पर ध्वनि विस्तारक यंत्रों को लगाने की अनुमति प्रदान किया था। उस समय के तत्कालीन जिलाधिकारी ने प्रमुख सचिव गृह के पत्र का हवाला देते हुए इसे लेकर बैठक की थी। साथ ही सख्त चेतावनी दी था कि बिना अनुमति के शादी-विवाह जैसे आयोजनों में भी डीजे का उपयोग न किया जाए, लेकिन यह चेतावनी शादी के दौर शुरू होते ही मानों ठंडे बस्ते में डाल दी गई। अब तो इस आदेश को लेकर जिम्मेदार पूरी तरह से भूल गए हैं। नतीजतन गिने चुने लोगों को छोड़ दे तो भी सभी ने बिना अनुमति के अपने यहां आयोजनों में ध्वनि विस्तारक यंत्रों का प्रयोग किया, जो जारी भी है। इससे आने-जाने वाले लोगों, बच्चों और वृद्ध के साथ- साथ मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, किंतु जिम्मेदारों के कान पर जू नहीं रेंग रहा है।
विज्ञापन