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आंकड़ों में अंतर से कार्ययोजना बनाने में फंस सकता है पेच
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जौनपुर। एक ओर अमृत पेयजल योजना टू के तहत पेयजल की सुविधा से वंचित घरों तक शुद्ध पीने का पानी उपलब्ध कराने के लिए पाइप लाइन पहुंचाने की तैयारी की जा रही है, वहीं नगर पालिका और जल निगम के आंकड़ों में कनेक्शन धारकों की संख्या में काफी अंतर होने के कारण आने वाले समय में कार्ययोजना तैयार करने में दिक्कत हो सकती है।
सवा तीन लाख आबादी वाले शहर में मकानों की संख्या को लेकर नगर पालिका और जल निगम के आंकड़ों में ज्यादा अंतर है। नगर पालिका के आंकड़ों में शहर क्षेत्र में कुल 39 हजार मकान हैं। इनमें से 27 हजार 313 मकानों में ही पेयजल कनेक्शन हैं, जिनसे जल कल प्रशासन जल कर वसूलता है। उधर, जल निगम के आंकड़े में शहर क्षेत्र में कुल 34 हजार 616 मकान हैं और इनमें से करीब 15 हजार घरों में ही पेयजल कनेक्शन है। दोनों विभागों के आंकड़ों में चार हजार 384 मकानों का अंतर है, जबकि 12 हजार 313 का अंतर पेयजल कनेक्शनधारकों के बीच है। ऐसे में पेयजल की सुविधा से वंचित लोगों के लिए भविष्य में जब कार्ययोजना बनाने की बात सामने आएगी तो उसमें दिक्कत पैदा हो सकती है।
जल निगम (शहरी) के अधिशासी अभियंता एसके गुप्ता का कहना है कि उनके विभाग को नगर पालिका की ओर से ही आंकड़ा उपलब्ध कराया गया है। भवनों व कनेक्शनधारकों की संख्या में अंतर की बात है तो अमृत पेयजल योजना टू को परवान चढ़ाने के लिए भवनों व कनेक्शनधारकों का सर्वे कराने की तैयारी है। सर्वे नगर पालिका और जल निगम मिलकर करेंगे। इससे अंतर साफ जाएगा और कार्ययोजना बनाने में मदद मिलेगी। उधर, जलकल के अधिशासी अभियंता उमेश प्रसाद का कहना है कि जल निगम के पास कनेक्शनधारकों का जो आंकड़ा है, उसकी जानकारी उन्हें नहीं है। उनके विभाग में जो आंकड़ा है, वही सही है।
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सवा तीन लाख आबादी वाले शहर में मकानों की संख्या को लेकर नगर पालिका और जल निगम के आंकड़ों में ज्यादा अंतर है। नगर पालिका के आंकड़ों में शहर क्षेत्र में कुल 39 हजार मकान हैं। इनमें से 27 हजार 313 मकानों में ही पेयजल कनेक्शन हैं, जिनसे जल कल प्रशासन जल कर वसूलता है। उधर, जल निगम के आंकड़े में शहर क्षेत्र में कुल 34 हजार 616 मकान हैं और इनमें से करीब 15 हजार घरों में ही पेयजल कनेक्शन है। दोनों विभागों के आंकड़ों में चार हजार 384 मकानों का अंतर है, जबकि 12 हजार 313 का अंतर पेयजल कनेक्शनधारकों के बीच है। ऐसे में पेयजल की सुविधा से वंचित लोगों के लिए भविष्य में जब कार्ययोजना बनाने की बात सामने आएगी तो उसमें दिक्कत पैदा हो सकती है।
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जल निगम (शहरी) के अधिशासी अभियंता एसके गुप्ता का कहना है कि उनके विभाग को नगर पालिका की ओर से ही आंकड़ा उपलब्ध कराया गया है। भवनों व कनेक्शनधारकों की संख्या में अंतर की बात है तो अमृत पेयजल योजना टू को परवान चढ़ाने के लिए भवनों व कनेक्शनधारकों का सर्वे कराने की तैयारी है। सर्वे नगर पालिका और जल निगम मिलकर करेंगे। इससे अंतर साफ जाएगा और कार्ययोजना बनाने में मदद मिलेगी। उधर, जलकल के अधिशासी अभियंता उमेश प्रसाद का कहना है कि जल निगम के पास कनेक्शनधारकों का जो आंकड़ा है, उसकी जानकारी उन्हें नहीं है। उनके विभाग में जो आंकड़ा है, वही सही है।
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