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Jaunpur News: नहीं हारी हिम्मत, संघर्ष से नम्रता ने खेल में बनाया मुकाम

Mon, 16 Oct 2023 11:24 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 16 Oct 2023 11:24 AM IST
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Didn't lose courage, Namrata achieved success in sports through struggle
मछलीशहर।
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ग्रामीण परिवेश व गरीब परिवार में रहकर खेल में मुकाम हासिल कर नम्रता यादव युवतियों के लिए मिसाल बन गई है। बरईपार क्षेत्र के नेवढ़िया गांव में अपने ननिहाल में मामा बृजेश यादव के साथ रहकर अनेक प्रतियोगिताओं में पदक जीतने वाली नम्रता नोएडा में बीते सितंबर आयोजित लीड मैच जीतकर आगे होने वाली वुशु प्रतियोगिता के लिए चयनित हुई है। इनको वुशु, ग्रेपलिंग कुश्ती, गी कुश्ती और नोगी कुश्ती खेल में महारथ हासिल हैं।हरियाणा के रोहतक में आयोजित ग्रेपलिंग कुश्ती प्रतियोगिता में पूर्वांचल विश्वविद्यालय की टीम से खेलकर डबल गोल्ड मेडल जीता। इसके बाद नम्रता यादव का 2022 के रूप में आयोजित खेल प्रतियोगिता में चयन हुआ था। नम्रता को रूस जाने के लिए डेढ़ लाख रुपये की जरूरत थी। अमर उजाला ने उसकी मदद के लिए मार्मिक अपील की तो लोगों ने दिल खोल होनहार खिलाड़ी की मदद की थी। वह 53 किलो भार वर्ग में सेमीफाइनल में पोलैंड की खिलाड़ी से रोचक मुकाबले में हार गई लेकिन कांस्य पदक जीतकर लोगों का दिल जीत लिया था। नम्रता ने फोन पर बताया कि गत माह नोएडा में आयोजित वुशु खेल के लीग मैच में वह जीत हासिल कर ली है। आगे होने वाली प्रतियोगिता में वह हिस्सा लेगी ।
सिद्ध पीठ है मां दक्षिणा काली मंदिर
जौनपुर। नगर के सिटी रेलवे स्टेशन क्राॅसिंग के निकट स्थित आदिशक्ति सिद्ध पीठ मां दक्षिणा काली का मंदिर अलौकिक आस्था का केंद्र है। कहते हैं कि जो भी यहां सच्चे मन से मनौती मांगता है मां काली उसकी हर मुराद पूरी करती हैं। कहा जाता है कि मंदिर के संस्थापक भगवती सिंह बागीश मां काली के अनन्य भक्त हैं। उन्होंने वर्ष 1979 में कलकत्ता के आदि शक्ति पीठ दक्षिणेश्वर मंदिर में नारियल जल, तुलसी जल, गंगा जल पर रहते हुए महाकाल निशा (कालरात्रि) के पावन वसर पर अर्धरात्रि को माता काली के श्री चरण में दिव्य दर्शन किया, वहीं से प्रेरित होकर उन्होंने 1984 में शक्तिपीठ की स्थापना की।
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बोले ज्योतिषाचार्य :-
ज्योतिषाचार्य डा.टीपी त्रिपाठी ने बताया कि नवरात्र का दूसरा दिन माता ब्रह्माचारिणी का है। इन दिन स्वाधिष्ठान चक्र में ध्यान कर इनकी साधना की जाती है। संयम, तप, वैराग्य, व विजय प्राप्ति की दायिका हैं। इस दिन ऊँ ऐं ह्रीं क्लीं ब्रह्मचारिण्यै नम: फलदायी मंत्र है।
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