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घनी आबादी के बीच पटाखों का कारोबार
ब्यूरो, अमर उजाला, जौनपुर
Updated Thu, 27 Oct 2016 01:26 AM IST
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जिले में भी वाराणसी जैसी घटना हो जाए तो ताज्जुब नहीं। जौनपुर शहर समेत, मड़ियाहूं, मछलीशहर, शाहगंज आदि इलाकों में आबादी के बीच पटाखे का कारोबार धड़ल्ले से हो रहा है। कहीं पटाखा बनाने का काम होता है तो कहीं उसका गोदाम बना दिया गया है।
पांच से दस साल पहले जहां आबादी से दूर पटाखा का कारोबार करने के लिए प्रशासन ने लाइसेंस जारी किए थे वहां भी अब आस पास आबादी बस गई है। फिर भी वहां पटाखों का कारोबार पहले जैसा ही चल रहा है। त्योहारी सीजन के साथ ही पटाखों की डिमांड भी तेजी से बढ़ी है।
वैध और अवैध रूप से संचालित आतिशबाजी के इस धंधे में जितनी आमदनी है उससे कही ज्यादा खतरे हैं। सूत्रों की माने तो शहर के कई घनी आबादी वाले इलाकों में घरों में पटाखे बनाने का काम चल रहा है। मांग पूरी करने के चक्कर में लाइसेंस धारक भी भारी मात्रा में बारूद का स्टाक जमा कर लेते हैं।
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जिला प्रशासन ने पटाखा बनाने के लिए 24 और बेचने के लिए 74 लाइसेंस जारी किए हैं। इनमें सर्वाधिक लाइसेंस सदर तहसील में जारी किए गए हैं। सूत्रों के मुताबिक शहर के कटघरा इलाके में पटाखे बनाने का काम चोरी छिपे चलता है। आसपास के कसबों में छोटे स्तर पर कई घरों में पटाखे बनाए जाते हैं।
जिनके पास लाइसेंस हैं भी, उनके यहां भी सुरक्षा संबंधी उपाय नदारद हैं। अगर कभी कोई हादसा हुआ तो एकत्र विस्फोटक से घटनास्थल के अलावा आसपास का क्षेत्र भी चपेट में आने से इनकार नहीं किया जा सकता।
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पांच से दस साल पहले जहां आबादी से दूर पटाखा का कारोबार करने के लिए प्रशासन ने लाइसेंस जारी किए थे वहां भी अब आस पास आबादी बस गई है। फिर भी वहां पटाखों का कारोबार पहले जैसा ही चल रहा है। त्योहारी सीजन के साथ ही पटाखों की डिमांड भी तेजी से बढ़ी है।
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वैध और अवैध रूप से संचालित आतिशबाजी के इस धंधे में जितनी आमदनी है उससे कही ज्यादा खतरे हैं। सूत्रों की माने तो शहर के कई घनी आबादी वाले इलाकों में घरों में पटाखे बनाने का काम चल रहा है। मांग पूरी करने के चक्कर में लाइसेंस धारक भी भारी मात्रा में बारूद का स्टाक जमा कर लेते हैं।
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जिला प्रशासन ने पटाखा बनाने के लिए 24 और बेचने के लिए 74 लाइसेंस जारी किए हैं। इनमें सर्वाधिक लाइसेंस सदर तहसील में जारी किए गए हैं। सूत्रों के मुताबिक शहर के कटघरा इलाके में पटाखे बनाने का काम चोरी छिपे चलता है। आसपास के कसबों में छोटे स्तर पर कई घरों में पटाखे बनाए जाते हैं।
जिनके पास लाइसेंस हैं भी, उनके यहां भी सुरक्षा संबंधी उपाय नदारद हैं। अगर कभी कोई हादसा हुआ तो एकत्र विस्फोटक से घटनास्थल के अलावा आसपास का क्षेत्र भी चपेट में आने से इनकार नहीं किया जा सकता।