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भारत की संस्कृति में समाहित है लोकतंत्र
अमर उजाला ब्यूरो, जौनपुर
Updated Fri, 21 Aug 2015 12:43 AM IST
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राष्ट्रीय शोध केंद्र के प्रो. अशोक मोडक ने कहा कि कहा कि भारत की संस्कृति में लोकतंत्र रचा बसा है। मार्क्सवादी विचारधारा को माने तो जो कमाएगा वही खाएगा।
लेकिन पंडित दीनदयाल उपाध्याय कहा करते थे कि जो कमाएगा वही खिलाएगा। उनके यह विचार भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देती हैं।
प्रो. मोडक गुरुवार को टीडी ला कालेज के मानवेंद्र ग्रंथालय में स्वदेशी जागरण मंच और ठा. तिलकधारी सिंह विधि परिषद की ओर से आयोजित व्याख्यान माला में बोल रहे थे।
गोरक्ष के प्रांतीय संगठक अजय उपाध्याय ने कहा कि भारत की संस्कृति में लोक तंत्र का स्वरुप समाहित है। विश्व में कोई ऐसा देश नहीं मिलेगा जहां की संस्कृति भारत जैसी हो। इससे पहले अतिथियों ने ठा. तिलकधारी सिंह और पंडित
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दीनदयाल उपाध्याय के चित्र पर पुष्प अर्पित कर कार्यक्रम की शुरूआत की। संस्कृ ति गुप्ता और वर्तिका ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत किया। पूर्व प्राचार्य डा. राधेश्याम सिंह ने विचार व्यक्त किया। टीडी कालेज के प्राचार्य डा. राकेश सिंह ने कहा कि डा.
अंबेडकर ग्रामीण भारत के पक्षधर थे। क्यों कि बिना लोकतंत्र के सामंती व्यवस्था समाप्त नहीं हो सकती। विभागाध्यक्ष डा. एसपी सिंह ने आभार जताया।
संयोजक डा. हिमांशु सिंह और संजय सेठ ने श्रीफल और पुरस्तक भेंटकर अतिथियों का स्वागत किया। इस मौके पर डा. पीएल टामटा, राजेश सिंह, संतोश सिंह, डा. राजीव प्रकाश सिंह, डा. आरएन त्रिपाठी, जय प्रकाश सिंह, अवनीश सिंह, राम भुवन मिश्र, सुरेंद्र प्रताप सिंह, नलिन मिश्र आदि मौजूद थे। संचालन डा. आएन ओझा ने किया।
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लेकिन पंडित दीनदयाल उपाध्याय कहा करते थे कि जो कमाएगा वही खिलाएगा। उनके यह विचार भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देती हैं।
प्रो. मोडक गुरुवार को टीडी ला कालेज के मानवेंद्र ग्रंथालय में स्वदेशी जागरण मंच और ठा. तिलकधारी सिंह विधि परिषद की ओर से आयोजित व्याख्यान माला में बोल रहे थे।
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गोरक्ष के प्रांतीय संगठक अजय उपाध्याय ने कहा कि भारत की संस्कृति में लोक तंत्र का स्वरुप समाहित है। विश्व में कोई ऐसा देश नहीं मिलेगा जहां की संस्कृति भारत जैसी हो। इससे पहले अतिथियों ने ठा. तिलकधारी सिंह और पंडित
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दीनदयाल उपाध्याय के चित्र पर पुष्प अर्पित कर कार्यक्रम की शुरूआत की। संस्कृ ति गुप्ता और वर्तिका ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत किया। पूर्व प्राचार्य डा. राधेश्याम सिंह ने विचार व्यक्त किया। टीडी कालेज के प्राचार्य डा. राकेश सिंह ने कहा कि डा.
अंबेडकर ग्रामीण भारत के पक्षधर थे। क्यों कि बिना लोकतंत्र के सामंती व्यवस्था समाप्त नहीं हो सकती। विभागाध्यक्ष डा. एसपी सिंह ने आभार जताया।
संयोजक डा. हिमांशु सिंह और संजय सेठ ने श्रीफल और पुरस्तक भेंटकर अतिथियों का स्वागत किया। इस मौके पर डा. पीएल टामटा, राजेश सिंह, संतोश सिंह, डा. राजीव प्रकाश सिंह, डा. आरएन त्रिपाठी, जय प्रकाश सिंह, अवनीश सिंह, राम भुवन मिश्र, सुरेंद्र प्रताप सिंह, नलिन मिश्र आदि मौजूद थे। संचालन डा. आएन ओझा ने किया।