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बेटियां खुलकर कहें अपनी बात, पुलिस हमेशा आपके साथ
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जौनपुर। जलालपुर के बयालसी पीजी कॉलेज की छात्राएं बुधवार को उत्साह से लबरेज थीं। हर चुनौती को मात देने का जज्बा उनके चेहरे पर साफ दिख रहा था। वह सशक्त बनने को आतुर थीं। थोड़ी झिझक थी भी तो वह पुलिस के आला अफसरों को अपने बीच पाकर दूर हो गई। फिर उन्होंने सुरक्षा से जुड़े सवालों की झड़ी लगा दी। महिला हेल्पलाइन की कार्य पद्धति, पावर एंजल्स की उपयोगिता, घरेलू हिंसा और छेड़खानी से जुड़े मामलों में पुलिस की कार्रवाइयों से जुड़े तमाम सवाल उछाले। पुलिस अफसरों ने न सिर्फ सवालों का जवाब दिया, बल्कि हर संकट की घड़ी में मददगार के रूप में सबसे आगे रहने का वादा भी किया। मौका था अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स के तहत महिला सुरक्षा और सशक्तीकरण पर सेमिनार का। इसमें 400 से अधिक छात्राओं ने भागीदारी की।
मुख्य अतिथि एएसपी सिटी डॉ. संजय कुमार ने कहा कि पुलिस विभाग का स्लोगन है- आलवेज माई आंसर इज एस... इसे ही ध्येय बनाकर पुलिस काम कर रही है। आप जब कभी कोई परेशानी महसूस करें तो पुलिस को बेहिचक याद करें। पुलिस आपकी सुरक्षा के लिए तत्पर है। उन्होंने बेटियों को विविध कानूनी प्रावधानों के बारे में जानकारी दी और जरूरत पड़ने पर उसका उपयोग करने के लिए प्रेरित किया। कहा कि घटनाओं को छिपाएं नहीं, बेझिझक बताएं। आपका सहयोग मिलेगा तो पुलिस बेटियों-महिलाओं से मनमानी करने वालों से सख्ती से निपटेगी। एसओ सत्यप्रकाश सिंह ने कहा कि महिलाओं को एक-दूसरे का संरक्षक बनना होगा। गलती करने वाला कोई भी हो, उसका बचाव करने के बजाए दंडित करने में मदद करें। विशिष्ट अतिथि बयालसी इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. शैलेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि व्यक्तित्व के निर्माण में अनुकूल परिस्थितियों की अपेक्षा विपरीत हालात ज्यादा सहायक होते हैं। जो मुश्किलों से जूझकर आगे बढ़ता है, वही अपराजिता होता है। छात्राओं में इतनी क्षमता है। बस उन्हें पहचानने की जरूरत है। समाज को संवारने के लिए महिला-पुरुष दोनों की जिम्मेदारी है। डॉ. अलकेश्वरी सिंह ने कहा कि महिला सुरक्षा के लिए कानून तो हैं, लेकिन क्रियान्वयन नहीं हो पा रहा। बेटियों को जागरूक होने के साथ ही समाज को भी अपनी दृष्टि बदलनी होगी। डॉ. प्रतिभा सिंह ने महिला अपराध पर प्रभावी नियंत्रण के लिए महिला पुलिसकर्मियों की संख्या बढ़ाने और पुलिस को और भी संवेदनशील होकर काम करने की जरूरत बताई। अध्यक्षीय संबोधन में पूर्व प्राचार्य डॉ. प्रमोद कुमार सिंह ने कहा कि बेटियों को सशक्त बनाने में ऐसे आयोजन उपयोगी साबित होंगे। संवाद से ही उनमें झिझक खत्म होगा और वह मुखर होकर अपनी बात कह सकेंगी। प्राचार्य डॉ. अखिलेश चंद्र सेठ ने आभार जताया। कार्यक्रम में डॉ. बृजेश मिश्र, विनोद सिंह, चंद्रभूषण त्रिपाठी, डॉ. राकेश गुप्ता, डॉ. जय सिंह, डॉ. सीमा सिंह, अजय सिंह, प्रतिभा सिंह, नीलम सिंह, रमायन सिंह, विनय प्रताप सिंह, भूपेंद्र प्रताप, बफाती अली, अंशुमान सिंह, शिवानी, आशुतोष पांडेय आदि मौजूद रहे। संचालन डॉ. संजय नारायण सिंह ने किया।
गीत, नाटक से किया भावविभोर
कार्यक्रम में छात्राओं ने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ पर आधारित नाटक और गीत की प्रस्तुति दी। दीक्षा मिश्र, प्रीतू वर्मा, प्रतिमा यादव, जूली विश्वकर्मा, अंजली गुप्ता, अंकिता, जागृति आदि ने नाटक के जरिए बेटियों को देवी का रूप बताते हुए कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए जागरूक किया। एसिड अटैक नाटक की प्रस्तुति से समाज में महिलाओं पर अपराध और परिवार में उनकी उपेक्षा को दर्शाया। रूपा देवी ने मुझे क्या बेचेगा जमाना... गीत की प्रस्तुति दी। इनके अलावा अंजली, शिवांगी, रीमा, अंकिता ने सरस्वती वंदना, सविता, रीमा, अंकिता ने कुलगीत प्रस्तुत किया। अतिथि जी ऐसे न जाना होगा... के जरिए अतिथियों का स्वागत किया। कॉलेज की रेंजर्स छात्रा प्रतिभा यादव, माया कुमार, सोनू, वीनू, हर्षिता सिंह ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
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मुख्य अतिथि एएसपी सिटी डॉ. संजय कुमार ने कहा कि पुलिस विभाग का स्लोगन है- आलवेज माई आंसर इज एस... इसे ही ध्येय बनाकर पुलिस काम कर रही है। आप जब कभी कोई परेशानी महसूस करें तो पुलिस को बेहिचक याद करें। पुलिस आपकी सुरक्षा के लिए तत्पर है। उन्होंने बेटियों को विविध कानूनी प्रावधानों के बारे में जानकारी दी और जरूरत पड़ने पर उसका उपयोग करने के लिए प्रेरित किया। कहा कि घटनाओं को छिपाएं नहीं, बेझिझक बताएं। आपका सहयोग मिलेगा तो पुलिस बेटियों-महिलाओं से मनमानी करने वालों से सख्ती से निपटेगी। एसओ सत्यप्रकाश सिंह ने कहा कि महिलाओं को एक-दूसरे का संरक्षक बनना होगा। गलती करने वाला कोई भी हो, उसका बचाव करने के बजाए दंडित करने में मदद करें। विशिष्ट अतिथि बयालसी इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. शैलेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि व्यक्तित्व के निर्माण में अनुकूल परिस्थितियों की अपेक्षा विपरीत हालात ज्यादा सहायक होते हैं। जो मुश्किलों से जूझकर आगे बढ़ता है, वही अपराजिता होता है। छात्राओं में इतनी क्षमता है। बस उन्हें पहचानने की जरूरत है। समाज को संवारने के लिए महिला-पुरुष दोनों की जिम्मेदारी है। डॉ. अलकेश्वरी सिंह ने कहा कि महिला सुरक्षा के लिए कानून तो हैं, लेकिन क्रियान्वयन नहीं हो पा रहा। बेटियों को जागरूक होने के साथ ही समाज को भी अपनी दृष्टि बदलनी होगी। डॉ. प्रतिभा सिंह ने महिला अपराध पर प्रभावी नियंत्रण के लिए महिला पुलिसकर्मियों की संख्या बढ़ाने और पुलिस को और भी संवेदनशील होकर काम करने की जरूरत बताई। अध्यक्षीय संबोधन में पूर्व प्राचार्य डॉ. प्रमोद कुमार सिंह ने कहा कि बेटियों को सशक्त बनाने में ऐसे आयोजन उपयोगी साबित होंगे। संवाद से ही उनमें झिझक खत्म होगा और वह मुखर होकर अपनी बात कह सकेंगी। प्राचार्य डॉ. अखिलेश चंद्र सेठ ने आभार जताया। कार्यक्रम में डॉ. बृजेश मिश्र, विनोद सिंह, चंद्रभूषण त्रिपाठी, डॉ. राकेश गुप्ता, डॉ. जय सिंह, डॉ. सीमा सिंह, अजय सिंह, प्रतिभा सिंह, नीलम सिंह, रमायन सिंह, विनय प्रताप सिंह, भूपेंद्र प्रताप, बफाती अली, अंशुमान सिंह, शिवानी, आशुतोष पांडेय आदि मौजूद रहे। संचालन डॉ. संजय नारायण सिंह ने किया।
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गीत, नाटक से किया भावविभोर
कार्यक्रम में छात्राओं ने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ पर आधारित नाटक और गीत की प्रस्तुति दी। दीक्षा मिश्र, प्रीतू वर्मा, प्रतिमा यादव, जूली विश्वकर्मा, अंजली गुप्ता, अंकिता, जागृति आदि ने नाटक के जरिए बेटियों को देवी का रूप बताते हुए कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए जागरूक किया। एसिड अटैक नाटक की प्रस्तुति से समाज में महिलाओं पर अपराध और परिवार में उनकी उपेक्षा को दर्शाया। रूपा देवी ने मुझे क्या बेचेगा जमाना... गीत की प्रस्तुति दी। इनके अलावा अंजली, शिवांगी, रीमा, अंकिता ने सरस्वती वंदना, सविता, रीमा, अंकिता ने कुलगीत प्रस्तुत किया। अतिथि जी ऐसे न जाना होगा... के जरिए अतिथियों का स्वागत किया। कॉलेज की रेंजर्स छात्रा प्रतिभा यादव, माया कुमार, सोनू, वीनू, हर्षिता सिंह ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
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