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लोगों की गाढ़ी कमाई पर है साइबर अपराधियों की नजर

Mon, 08 Feb 2021 11:49 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 08 Feb 2021 11:49 PM IST
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Cyber criminals are eyeing people's hard-earned money
जौनपुर। इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, प्लास्टिक कार्ड और कैशलेस ट्रांजेक्शन के बढ़ते चलन के बीच साइबर क्राइम की घटनाएं भी तेजी से बढ़ रही हैं। साइबर अपराधी लोगों के बैंक खाते में सेंध लगाकर रुपये पार कर दे रहे हैं। इसका पता लोगों को तब चलता है जब उनके मोबाइल पर खाते से पैसा निकलने का मैसेज आता है या फिर वे रुपये निकालने के लिए खुद बैंक पहुंचते हैं। जिले में हर दूसरे-तीसरे दिन कोई न कोई साइबर जालसाजों का शिकार बन जाता है।
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साइबर जालसाज कभी लॉटरी खुलने के नाम पर तो कभी एटीएम बंद होने से बचाने का झांसा देकर लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। एटीएम का क्लोन बनाकर भी जालसाज लोगों को ठग रहे हैं। इस तरह के अपराध को रोकने के लिए पुलिस ने साइबर सेल की स्थापना जरूर की है पर इससे बचने के लिए पहले खुद से सतर्क रहने की जरूरत है। कभी लोग कम समय में अधिक मुनाफा कमाने के चक्कर में तो कभी लाटरी खुलने की खुशी में अपनी गाढ़ी कमाई को गंवा बैठते हैं। ऐसे में अपनी गाढ़ी कमाई को बैंक खाते में भी सुरक्षित रखने के लिए कई सावधानियां बरतने की जरूरत है।
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सिंगरामऊ थान क्षेत्र के डुहुड़ा गांव निवासी प्रदीप तिवारी के बैंक खाते से साइबर जालसाजों ने बीते दिसंबर महीने में चार दिन के भीतर सात बार में 2.15 लाख रुपये पार कर दिए थे। प्रदीप तिवारी हरियाणा की एक प्राइवेट कंपनी में काम करते हैं। उनका बैंक खाता यूबीआई की सिंगरामऊ शाखा में है। 24 दिसंबर को उन्हें मोबाइल पर खाते से पैसे निकलने का मैसेज मिला तो हैरान हो गए। वह वहां से घर आए और बैंक जाकर छानबीन की। बैंक से मदद नहीं मिली तो थानेे में शिकायत दर्ज कराई थी।
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शाहगंज कोतवाली क्षेत्र के एक गांव निवासी महिला ने यूपीआई एक्टीवेशन के लिए गूगल पर यूपीआई कस्टमर केयर का नंबर सर्च कराया। जहां से उसे एक मोबाइल नंबर प्राप्त हुआ। उस नंबर पर महिला ने फोन कर अपना यूपीआई नंबर एक्टीवेट करने की प्रक्रिया को जानना चाहा तो उधर से एक लिंक मैसेज के माध्यम से भेज दिया गया। कहा गया कि लिंक से एनीडेस्क ऐप अपने मोबाइल पोन में डाउनलोड कर लीजिए। ऐसा करने पर उसका पासवर्ड पूछकर जालसाजों ने खाते से 99980 रुपये उड़ा दिए। हालांकि महिला ने फौरन इसकी शिकायत पुलिस से की थी। साइबर सेल कुछ दिनों में ही महिला के पैसे उसके बैंक खाते में वापस करवा दिए।

- अपना डेबिट, क्रेडिट कार्ड किसी से साझा न करें।
- खरीदारी के समय कार्ड को अपने सामने मशीन में स्वाइप करें और पिन खुद से डालें।
- लिमिट को कम रखें।
- ट्रांजेक्शन गड़बड़ी पर बैंक से लिखित में शिकायत करें।
- अपने मोबाइल वॉलेट का चयन सावधानी से करें। नियम और शर्ते जरूर पढ़ें।
कोई भी बैंक अधिकारी किसी भी खाताधारक से फोन पर एटीएम, क्रेडिट कार्ड या बैंक खाते से संबंधित कोई जानकारी फोन से नहीं मांगता। इसलिए कभी भी फोन काल पर अपने बैंक खाते से संबंधित कोई जानकारी साझा न करें। ठगी का शिकार होने पर अपने करीबी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करा सकते हैं। -डॉ. संजय कुमार, एएसपी सिटी।
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