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मंदिर से लक्ष्मण की बेशकीमती मूर्ति चोरी
जौनपुर ब्यूराे
Updated Tue, 27 Oct 2015 12:03 AM IST
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कोतवाली के पास लोहा मंडी मुख्य मार्ग पर स्थित रामजानकी मंदिर से सोमवार सुबह चोरों ने अष्टधातु की लगभग दो सौ साल पुरानी लक्ष्मणजी की मूर्ति उड़ा दी। इस बेशकीमती मूर्ति की अंतरराष्ट्रीय कीमत 50 लाख रुपये से अधिक बताई जा
रही है। उधर, चोरों की तुरंत गिरफ्तारी के लिए लोगों ने हंगामा किया। प्रशासनिक अधिकारियों ने उन्हें शीघ्र गिरफ्तारी का आश्वासन देकर शांत कराया। लोहा मंडी मुख्य मार्ग पर विजय मोदनवाल के घर के पास प्राचीन रामजानकी मंदिर है।
मंदिर का संचालन मोदनवाल समाज करता है। विजय के घर के लोग सुबह मंदिर की सफाई करते हैं। सोमवार सुबह करीब आठ बजे उनके पुत्र विनय मंदिर में पहुंचे तो देखा कि राम, सीता और लक्ष्मण की मूर्तियों में से लक्ष्मण की मूर्ति
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गायब है। उन्होंने अपने पिता और पुलिस को इसकी सूचना दी। सूचना मिलने पर पुलिस की डाग स्क्वायड टीम ने जांच पड़ताल की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। लोगों की मानें तो सुबह छह बजे मंदिर का दरवाजा खुलने के बाद कुर्ता
पायजामा पहने एक किशोर मंदिर में आया था। लेकिन लोगों ने उस पर ध्यान नहीं दिया। पुलिस किशोर के बारे में पता कर रही है। उधर, मोदनवाल समाज के अध्यक्ष अनिल मोदनवाल, कमलेश अग्रहरि आदि ने मूर्ति बरामद न होने पर
आंदोलन की चेतावनी दी। थाने पहुंचे डीएम भानुचंद्र गोस्वामी और एसपी राजू बाबू सिंह ने तुरंत मूर्ति बरामद करने का आश्वासन दिया है। बता दें कि वर्तमान में लोहा मंडी स्थित मंदिर वहां से सौ मीटर की दूरी पर संगतजी के मंदिर के नाम
से प्रसिद्ध थी। मंदिर में राम, लक्ष्मण और सीता की अष्टधातु की मूर्ति थी लेकिन 15 वर्ष पहले वहां से सीताजी की मूर्ति चोरी हो गई। इसके बाद मोदनवाल समाज ने वहां से राम, लक्ष्मण की मूर्ति को लाकर विजय मोदनवाल के घर के समीप
स्थापित कर दिया। लक्ष्मण की मूर्ति चोरी होने के बाद मंदिर में स्थापित आठ-नौ प्रतिमाओं में केवल राम की मूर्ति अष्टधातु की रह गई है।
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रही है। उधर, चोरों की तुरंत गिरफ्तारी के लिए लोगों ने हंगामा किया। प्रशासनिक अधिकारियों ने उन्हें शीघ्र गिरफ्तारी का आश्वासन देकर शांत कराया। लोहा मंडी मुख्य मार्ग पर विजय मोदनवाल के घर के पास प्राचीन रामजानकी मंदिर है।
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मंदिर का संचालन मोदनवाल समाज करता है। विजय के घर के लोग सुबह मंदिर की सफाई करते हैं। सोमवार सुबह करीब आठ बजे उनके पुत्र विनय मंदिर में पहुंचे तो देखा कि राम, सीता और लक्ष्मण की मूर्तियों में से लक्ष्मण की मूर्ति
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गायब है। उन्होंने अपने पिता और पुलिस को इसकी सूचना दी। सूचना मिलने पर पुलिस की डाग स्क्वायड टीम ने जांच पड़ताल की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। लोगों की मानें तो सुबह छह बजे मंदिर का दरवाजा खुलने के बाद कुर्ता
पायजामा पहने एक किशोर मंदिर में आया था। लेकिन लोगों ने उस पर ध्यान नहीं दिया। पुलिस किशोर के बारे में पता कर रही है। उधर, मोदनवाल समाज के अध्यक्ष अनिल मोदनवाल, कमलेश अग्रहरि आदि ने मूर्ति बरामद न होने पर
आंदोलन की चेतावनी दी। थाने पहुंचे डीएम भानुचंद्र गोस्वामी और एसपी राजू बाबू सिंह ने तुरंत मूर्ति बरामद करने का आश्वासन दिया है। बता दें कि वर्तमान में लोहा मंडी स्थित मंदिर वहां से सौ मीटर की दूरी पर संगतजी के मंदिर के नाम
से प्रसिद्ध थी। मंदिर में राम, लक्ष्मण और सीता की अष्टधातु की मूर्ति थी लेकिन 15 वर्ष पहले वहां से सीताजी की मूर्ति चोरी हो गई। इसके बाद मोदनवाल समाज ने वहां से राम, लक्ष्मण की मूर्ति को लाकर विजय मोदनवाल के घर के समीप
स्थापित कर दिया। लक्ष्मण की मूर्ति चोरी होने के बाद मंदिर में स्थापित आठ-नौ प्रतिमाओं में केवल राम की मूर्ति अष्टधातु की रह गई है।